मेक इन इंडिया-रक्षा उत्पादन में वैश्विक प्रतिस्पर्धा तक पहुंचा भारत : राजनाथ सिंह

ram

नई दिल्ली। ‘मेक इन इंडिया’ के 12 साल भारत की आर्थिक और औद्योगिक यात्रा में बड़े बदलाव का दौर रहे हैं। यह बात शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि भारत में निर्माण की शुरुआत का यह अभियान आज ऐसे मजबूत औद्योगिक तंत्र में बदल चुका है, जो घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दे रहा है, निवेश आकर्षित कर रहा है, नवाचार को प्रोत्साहित कर रहा है और रोजगार के अवसर पैदा कर रहा है। साथ ही भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजार में भी प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की विनिर्माण नीति ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड’ के सिद्धांत पर आगे बढ़ रही है। इसका असर खास तौर पर रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की रक्षा व्यवस्था वर्तमान जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए भी लगातार मजबूत की जा रही है। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की ताकत देखनी हो तो आसमान, समुद्र और जमीन तीनों जगह इसकी झलक दिखाई देती है।
इससे पहले उन्होंने गुरुवार रात एक कार्यक्रम में कहा कि आसमान में भारतीय पायलट तेजस लड़ाकू विमान और प्रचंड हेलिकॉप्टर के साथ देश की क्षमता का प्रदर्शन कर रहे हैं। समुद्र में भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत समुद्री सुरक्षा को मजबूत कर रहा है। वहीं जमीन पर भारतीय सेना अर्जुन टैंक और भारत में निर्मित लंबी दूरी की तोप धनुष के साथ देश की सीमाओं की रक्षा कर रही है।
रक्षा मंत्री ने भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि आकाश मिसाइल प्रणाली और ब्रह्मोस जैसे स्वदेशी प्लेटफॉर्म इसका उदाहरण हैं। उन्होंने भारत में निर्मित एशिया की सबसे बड़ी हेलिकॉप्टर फैक्ट्री का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान और छठी पीढ़ी के लड़ाकू जेट बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए रक्षा औद्योगिक गलियारे विकसित किए गए हैं। सरकार ने केवल बड़े रक्षा निर्माताओं पर निर्भर रहने के बजाय स्टार्ट-अप और एमएसएमई को भी रक्षा नवाचार से जोड़ा है।
उन्होंने कहा कि सरकार घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर भी काम कर रही है। इसके लिए सृजन रक्षा उपकरण सशक्तिकरण मंच के माध्यम से देश के रक्षा निर्माताओं, एमएसएमई और विक्रेताओं को एक साथ जोड़ा जा रहा है। राजनाथ सिंह के मुताबिक, इस मंच पर अब तक 41,000 से अधिक विक्रेता और 2.7 लाख से अधिक उत्पाद सूचीबद्ध किए जा चुके हैं। यह कदम देश में रक्षा उत्पादन से जुड़ी घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और भारतीय उद्योग की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *