नई दिल्ली। मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा में प्रश्नकाल और शून्यकाल हंगामे की भेंट चढ़ गए। नीट पेपर लीक मामले पर संसद के दोनों सदन लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के सदस्यों का हंगामा बरकरार रहा। इसके बाद सुबह 11 बजे से तीन बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। दोपहर 12.30 बजे दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर कांग्रेस और अन्य दलों के सांसदों की नारेबाजी जारी रही। पीठासीन दिलीप सैकिया ने विपक्ष के सदस्यों से कहा, “सुबह से लगातार आप लोग सदन को बाधित कर रहे हैं। यह ठीक नहीं है। असम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में बाढ़ से गंभीर हालात हैं और लोग परेशानी में हैं। ऐसे मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है। बाढ़ के मुद्दे पर सदन में चर्चा की जानी चाहिए।” उन्होंने शून्यकाल बेहद महत्वपूर्ण समय होता है और सांसदों को मुद्दा उठाने का अवसर मिलता है। विपक्ष के सदस्यों का व्यवहार बिल्कुल सही नहीं है। दिलीप सैकिया के बार-बार अनुरोध के बावजूद विपक्ष के सदस्यों का हंगामा जारी रहा। इसके बाद सदन की कार्यकारी दोपहर एक बजे तक के लिए स्थगित की गई।
इससे पहले, सुबह 11 बजे सत्र शुरू होने पर लोकसभा में दिवंगत सांसदों को श्रद्धांजलि दी गई। इसके तुरंत बाद विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी। स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष के सांसदों से अनुरोध किया कि वे अपनी सीट पर बैठे रहें। सदन चलाने में सहयोग करें।
विपक्ष का हंगामा नहीं थमने पर स्पीकर ने कार्रवाई दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। दोपहर में कार्यवाही फिर से शुरू होने के बाद यह सिर्फ सात मिनट तक चली और फिर विपक्ष की भारी नारेबाजी के बीच लोकसभा को दोबारा स्थगित कर दिया गया।
उधर, राज्यसभा में सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू होने पर नए सदस्यों को शपथ दिलाई गई। कुछ देर बाद विपक्ष के सदस्यों ने नीट पेपर लीक और प्रदर्शनकारी छात्रों का मुद्दा उठाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। इसके कारण कार्यवाही दोपहर 12 बजे स्थगित करनी पड़ी। दोपहर में कार्यवाही शुरू होने पर महज एक मिनट सदन चला। दोबारा में कार्यवाही को 12.30 तक स्थगित किया गया। इसी तरह 12.30 बजे कार्यवाही शुरू होने के एक मिनट बाद इसे तीसरा बार स्थगित कर दिया गया।

लोकसभा की कार्यवाही तीसरी बार स्थगित, मानसून सत्र के पहले दिन हंगामे की भेंट चढ़े प्रश्नकाल और शून्यकाल
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