विकसित भारत–जन सेवा अभियान–2026: सेखाला में कसुंबी कंवर को पेंशन का भरोसा, तो भौम राम को प्राकृतिक खेती के नए अवसर की आस

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जयपुर। जोधपुर के सेखाला में विकसित भारत जन-सेवा अभियान के तहत आयोजित शिविर में आने वाले हर व्यक्ति की अपनी जरूरत थी। किसी के लिए पेंशन की स्वीकृति जरूरी थी, किसी के लिए खेती से जुड़ी मदद। बावड़ी की कसुंबी कंवर और सेखाला के किसान भौम राम भी इसी उम्मीद के साथ शिविर का हिस्सा बने। शिविर समाप्त होने से पहले दोनों के पास अपनी-अपनी जरूरत से जुड़ी सरकारी सहायता थी। कसुंबी कंवर पत्नी बाबू सिंह के लिए यह दिन विशेष रहा। शिविर में उनकी वृद्धावस्था पेंशन स्वीकृत हुई और हाथों-हाथ उन्हें पेंशन भुगतान आदेश प्रदान किया गया। कुसुंबी कंवर ने मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा को धन्यवाद देते हुए कहा कि उम्र के इस पड़ाव पर नियमित आर्थिक सहायता उनके लिए रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में एक महत्वपूर्ण सहारा बनेगी। पेंशन का आदेश उनके हाथों में था, लेकिन उसके साथ जुड़ा भरोसा इससे कहीं बड़ा था। इसी शिविर में भौम राम पुत्र मोड़ा राम के प्रयासों को भी सफलता का रंग मिला। वे बताते हैं कि खेती ही उनके जीवन और आजीविका का आधार है। वे चाहते थे कि अपनी खेती के तरीके को बदलकर आर्थिक रूप से अधिक सक्षम हो सकें। उसके पास विकल्प था कि वे बदलती कृषि परिस्थितियों के बीच प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाएं। कैम्प में आवेदन करने पर कृषि विभाग ने उन्हें राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत 4 हजार रूपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की। ये 4 हजार रूपये बहुत छोटी राशि है लेकिन बड़े उद्देश्य की ओर सार्थक छलांग के लिए सरकार और समाज की स्वीकृति, समर्थन का संकेत है। राज्य सरकार की इस सहायता से भौम राम के प्राकृतिक खेती अपनाने के प्रयासों को आर्थिक आधार मिला। साथ ही गांव के अन्य किसानों को भी इस पद्धति की ओर आगे बढ़ने का प्रोत्साहन मिलेगा। विकसित भारत-जन सेवा अभियान 2026 इसी सोच के साथ राजस्थान के गाँवों और शहरों में योजनाओं एवं नागरिक सेवाओं की पहुँच को मजबूत करने का माध्यम बन रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में अभियान के दौरान विभिन्न विभागों के समन्वय से पात्र लोगों को योजनाओं से जोड़ने तथा सेवाओं को अधिक सुगम बनाने पर जोर दिया जा रहा है। सेखाला में आयोजित विकसित भारत-जन सेवा अभियान शिविर को केवल दो स्वीकृतियों से नहीं देखा जा सकता। एक तरफ सामाजिक सुरक्षा की जरूरत थी, दूसरी तरफ आजीविका को नए तरीके से आगे बढ़ाने की कोशिश। सरकारी व्यवस्था ने दोनों परिस्थितियों को उनकी जरूरत के अनुसार संबोधित किया।

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