बाढ़ जैसी आपदा से निपटने की तैयारियों का हुआ व्यापक परीक्षण

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झालावाड़। मानसून के दौरान संभावित बाढ़ एवं अतिवृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने तथा राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों को परखने के उद्देश्य से मंगलवार को झालरापाटन स्थित गोमती सागर तालाब पर एसडीआरएफ, एनडीआरएफ एवं भारतीय सेना के संयुक्त तत्वावधान में जिला प्रशासन एवं स्थानीय पुलिस के सहयोग से व्यापक मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस दौरान विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता, आधुनिक रेस्क्यू तकनीकों तथा राहत कार्यों की प्रभावशीलता का व्यवहारिक परीक्षण किया गया।

मॉक ड्रिल के दौरान पूरे घटनाक्रम को वास्तविक आपदा की तरह प्रस्तुत किया गया, जिससे बचाव दलों की तत्परता और कार्य प्रणाली का सजीव प्रदर्शन देखने को मिला।

काल्पनिक परिदृश्य में बनाया गया आपदा का माहौल

मॉक ड्रिल के तहत यह काल्पनिक परिदृश्य तैयार किया गया कि जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण गोमती सागर तालाब का जलस्तर अचानक बढ़ गया है। तेज बहाव के चलते तालाब के किनारे मौजूद लगभग 30 लोग चारों ओर से पानी से घिरकर फंस गए हैं तथा उनमें अफरा-तफरी का माहौल बन गया है। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन द्वारा आपदा प्रबंधन तंत्र को सक्रिय किया गया तथा एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, भारतीय सेना और स्थानीय पुलिस को तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए रवाना किया गया।

कुछ ही मिनटों में शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन

सूचना प्राप्त होते ही सभी बचाव एजेंसियों ने निर्धारित आपदा प्रबंधन प्रोटोकॉल के अनुसार घटनास्थल पर पहुंचकर मोर्चा संभाल लिया। रेस्क्यू टीमों ने आधुनिक लाइफ सेविंग उपकरणों, मोटर बोट, लाइफ जैकेट, रिमोट कन्ट्रोल लाइफ बॉय, रेस्क्यू रोप तथा अन्य सुरक्षा संसाधनों का उपयोग करते हुए पानी में फंसे लोगों तक पहुंच बनाई। जवानों ने अत्यंत संयम और दक्षता के साथ सभी 30 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। पूरे अभियान के दौरान किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

घायल व्यक्तियों को तत्काल मिला उपचार

रेस्क्यू के बाद घटनास्थल पर स्थापित अस्थायी राहत शिविर में चिकित्सा विभाग की टीम ने घायलों की प्राथमिक जांच एवं उपचार किया। गंभीर रूप से घायल दर्शाए गए व्यक्तियों को तत्काल एम्बुलेंस के माध्यम से अस्पताल रवाना किया गया। साथ ही राहत शिविर में पेयजल, प्राथमिक उपचार, आवश्यक दवाइयों तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का भी प्रदर्शन किया गया।

समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का हुआ मूल्यांकन

मॉक ड्रिल के दौरान विभिन्न विभागों के बीच संचार व्यवस्था, नियंत्रण कक्ष की कार्यप्रणाली, राहत एवं बचाव दलों के समन्वय, चिकित्सा सहायता, पुलिस व्यवस्था तथा आपदा प्रबंधन की समग्र तैयारियों का व्यवहारिक परीक्षण किया गया। अभ्यास के दौरान सभी एजेंसियों ने निर्धारित समय सीमा में अपनी जिम्मेदारियों का सफल निर्वहन करते हुए आपसी समन्वय का प्रभावी प्रदर्शन किया।

146 जवानों ने निभाई अहम भूमिका

इस संयुक्त मॉक ड्रिल में एसडीआरएफ के 34, एनडीआरएफ के 31 तथा भारतीय सेना के 81 जवानों सहित कुल 146 प्रशिक्षित जवानों ने भाग लेकर राहत एवं बचाव कार्यों का सफल प्रदर्शन किया। विभिन्न एजेंसियों द्वारा अपनाई गई आधुनिक रेस्क्यू तकनीकों एवं त्वरित कार्रवाई ने उपस्थित अधिकारियों एवं आमजन को आपदा प्रबंधन की प्रभावी तैयारियों से अवगत कराया।

आपदा से पहले तैयारी ही सबसे बड़ा बचाव

एसडीआरएफ, एनडीआरएफ एवं भारतीय सेना के अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार की मॉक ड्रिल का उद्देश्य किसी भी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों को परखना, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत बनाना तथा त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को और अधिक प्रभावी बनाना है। ऐसे अभ्यास वास्तविक आपदा की स्थिति में जनहानि एवं संपत्ति के नुकसान को न्यूनतम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

ये रहे उपस्थित

मॉक ड्रिल के दौरान भारतीय सेना के ब्रिगेडियर संजय रावत, कमांडिंग ऑफिसर रोहित ढोबाल, मेजर निखिल, सेकंड इन कमांड एनडीआरएफ निशांत कुमार, डिप्टी कमाण्डेन्ट नरेश कुमार शर्मा, कंपनी कमांडर एसडीआरएफ एकता हाड़ा, पुलिस अधीक्षक अमित कुमार, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शंभु दयाल मीणा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भागचंद मीणा, उपखण्ड अधिकारी कमल सिंह यादव, पुलिस उपाधीक्षक हर्षराज सिंह खरेड़ा, पुलिस उपाधीक्षक खानपुर गरिमा जिंदल सहित सिविल डिफेंस के स्वयंसेवक, पुलिस के जवान तथा संबंधित विभागों एवं एजेंसियों के अधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित रहे।

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