हवन-पूजन व गणपति स्थापना के साथ भगवान श्री अग्रसेन जन्मोत्सव का शुभारंभ

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चित्तौड़गढ़। अग्रवंश के प्रवर्तक एवं समाज के आराध्य भगवान श्री महाराजा अग्रसेन जी के 5150वें जन्मोत्सव का शुभारंभ रविवार को श्री अग्रसेन जन्मोत्सव समिति के तत्वावधान में श्रद्धा एवं उल्लास के साथ हुआ। जन्मोत्सव के शुभारंभ अवसर पर अग्रसेन भवन, अग्रसेन नगर में प्रातः गणपति स्थापना एवं हवन-पूजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुए हवन-पूजन में समाजबंधुओं ने भाग लेकर भगवान श्री अग्रसेन जी से समाज की सुख-समृद्धि एवं मंगल की कामना की। इसके साथ ही सात दिवसीय जन्मोत्सव कार्यक्रमों का विधिवत आगाज हुआ। शुभारंभ अवसर पर आयोजित खेलकूद प्रतियोगिताओं में बच्चों, महिलाओं एवं पुरुषों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

भजन संध्या में गूंजेंगे भक्ति के स्वर

जन्मोत्सव कार्यक्रम के तहत 9 अक्टूबर शुक्रवार को प्रातः 9 बजे अग्रसेन मांगलिक भवन गांधीनगर में गणपति स्थापना सायं 7 बजे से श्याम भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। भजन संध्या में भक्ति और आराधना के साथ भजनों की प्रस्तुतियां दी जाएंगी।

गो-पूजन एवं सांस्कृतिक संध्या

10 अक्टूबर शनिवार को प्रातः 9 बजे गांधी नगर स्थित गौशाला में गो-पूजन एवं गो-सेवा का आयोजन होगा। वहीं शाम 6 बजे अग्रसेन मांगलिक भवन गांधीनगर में सांस्कृतिक संध्या आयोजित की जाएगी। इसमें नर्सरी से कॉलेज स्तर तक विभिन्न आयु वर्गों के लिए फैंसी ड्रेस एवं एकल नृत्य प्रतियोगिताएं होंगी। महिलाओं के लिए एकल एवं युगल नृत्य प्रतियोगिता के साथ महिला मंडल की ओर से रंगारंग सामूहिक नृत्य की प्रस्तुति भी दी जाएगी।

विशाल शोभायात्रा के साथ होगा समापन

11 अक्टूबर रविवार को प्रातः 11 बजे हवन, पूजन, आरती एवं ध्वजारोहण का आयोजन होगा। इसके बाद दोपहर 3 बजे से विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा अग्रवाल पंचायत भवन, उपरला पाड़ा से प्रारंभ होकर गांधी चौक होते हुए सांवलिया विश्रांति गृह, किला रोड तक पहुंचेगी। शाम 6 बजे अग्रसेन मांगलिक भवन गांधीनगर में पारितोषिक वितरण तथा रात 8 बजे से स्नेहभोज का आयोजन होगा।

जन्मोत्सव समिति की ओर से अग्रवंश बंधुओं से समाज की गौरवशाली परंपराओं, संस्कारों एवं सामाजिक एकता को सुदृढ़ करने वाले इस आयोजन में अधिकाधिक संख्या में सहभागिता करने का आह्वान किया गया है। समिति ने कहा कि जन्मोत्सव के विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से सेवा, संस्कार, सामाजिक समरसता एवं अपनी समृद्ध परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

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