Category Archives: लेख

क्या स्वच्छता अभियान ने बदली है गांव की तस्वीर?...

-रागिनी कुमारी स्वच्छता किसी भी समाज की बुनियादी पहचान होती है। यह केवल स्वास्थ्य से नहीं बल्कि सामाजिक विकास और सम्मान से भी जुड़ी होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता का स्तर किसी जिले के समग्र विकास का आईना होता है। बिहार का ...

बंगाल में रक्तरंजित चुनाव की आहट...

प.बंगाल में चुनाव की रणभेरी बज उठी है। पश्चिम बंगाल की कुल 294 विधानसभा सीटों के लिए होने वाला यह महासंग्राम दो चरणों में संपन्न होगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को संपन्न होगा, जबकि दूसरे चरण की वो...

चांद की ओर मानव वापसी: नासा का आर्टेमिस-II मिशन...

-सुनील कुमार महला अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का आर्टेमिस II मिशन चंद्रमा की ओर अग्रसर है। उल्लेखनीय है कि नासा ने 1 अप्रैल 2026 को (भारतीय समयानुसार 2 अप्रैल सुबह 3:54 बजे) इस मिशन का सफल प्रक्षेपण किया। यहां पाठकों को बताता चलू...

कोरियन ड्रामा से भारतीय सीरियल तक : मनोरंजन की दिशा पर पुनर्विचार...

– ललित गर्ग विश्व के मनोरंजन जगत में पिछले कुछ वर्षों में यदि किसी देश ने टेलीविजन और वेब सीरीज के माध्यम से पूरी दुनिया को सबसे अधिक प्रभावित किया है तो वह दक्षिण कोरिया है। कोरियन ड्रामा आज केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सांस्कृ...

नमक सत्याग्रह ने बदल दी देश की तकदीर और तदबीर...

-बाल मुकुन्द ओझा देश और दुनिया के इतिहास में 6 अप्रैल 1930 का दिन बेहद खास है। आज ही के दिन महात्मा गांधी ने दांडी पहुंचकर समुद्रतट पर अंग्रेजों द्वारा बनाया नमक कानून को तोड़ा। इसी कारण यह दिन इतिहास में अमर हो गया। स्वतंत्रता आंद...

बेमौसम बारिश का कहर: किसानों की मेहनत पर प्रकृति की मार...

-सुनील कुमार महला भारत विश्व का एक प्रमुख कृषि प्रधान देश है, जहाँ आज भी बड़ी आबादी की आजीविका कृषि पर निर्भर है। दूसरे शब्दों में, भारत की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा खेती-किसानी से जुड़ा हुआ है। यहाँ कृषि मुख्यतः प्रकृति, विश...

विवाह संस्था और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच नई खाई...

-ललित गर्ग- आधुनिकता के संक्रमणकालीन दौर में सबसे अधिक यदि कोई संस्था प्रश्नों के घेरे में है, तो वह विवाह और रिश्तों की पारंपरिक अवधारणा है। बदलती जीवनशैली, आर्थिक आत्मनिर्भरता, तकनीक, वैश्वीकरण और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बढ़ती चे...

समुद्र है तो जीव जंतुओं का अस्तित्व है...

बाल मुकुन्द ओझा भारत में हर साल 5 अप्रैल को राष्ट्रीय समुद्री दिवस मनाया जाता है। यह दिवस भारत के समुद्री इतिहास और विरासत को याद करने और भारतीय समुद्री क्षेत्र के महत्व को उजागर करने के लिए मनाया जाता है। आर्थिक दृष्टि से देखें त...

साहित्यिक पत्रकारिता के कालजयी रचनाकार माखन लाल चतुर्वेदी...

बाल मुकुन्द ओझा हिन्दी जगत् के ख्यात और नामधारी कवि, लेखक, पत्रकार पंडित माखन लाल चतुर्वेदी का जन्म 4 अप्रैल, 1889 ई. में बावई, मध्य प्रदेश में हुआ था। वे बोलचाल की सरल भाषा और ओजपूर्ण भावनाओं के अनूठे रचनाकार थे। आजादी से पूर्व क...

पश्चिम बंगाल बढ़ती अराजकताः लोकतंत्र के लिए चुनौती...

-ललित गर्ग पश्चिम बंगाल, जो कभी सांस्कृतिक चेतना, बौद्धिकता और राजनीतिक परिपक्वता का प्रतीक माना जाता था, आज एक ऐसे संक्रमणकाल से गुजर रहा है, जहां लोकतांत्रिक मूल्यों की जड़ें लगातार कमजोर होती प्रतीत हो रही हैं। जैसे-जैसे चुनाव क...

अपने भीतर के हनुमान को जगाने का पर्व...

-ललित गर्ग हनुमान जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानव जीवन के चरित्र-निर्माण, आत्मबल, संयम, सेवा और समर्पण की प्रेरणा देने वाला महान दिवस है। यह दिन हमें मंदिरों में दीप जलाने से अधिक अपने भीतर के अंधकार को दूर करने का संद...

आटिज्‍म का खतरा : मानसिक विकास हो रहा प्रभावित...

बाल मुकुन्द ओझा देश और दुनिया की अनेक शोध रिपोर्टों में बताया गया है कि कम उम्र में बच्चों को फोन थमाने से उनका मानसिक विकास प्रभावित होता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों की मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की आदत उनमें वर्चुअल ऑटि...

बुजुर्गों के भरण-पोषण के लिये एक सराहनीय पहल...

-ललित गर्ग भारतीय संस्कृति में माता-पिता को देवतुल्य माना गया है-“मातृदेवो भव, पितृदेवो भव” केवल शास्त्रों की पंक्ति नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक संरचना की आत्मा रही है। इसलिए यह किसी भी सभ्य समाज के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है कि ज...

हनुमान जयंती: भक्ति, शक्ति और समर्पण का अद्भुत संगम...

– महेन्द्र तिवारी हनुमान जयन्ती का पावन पर्व हिंदू धर्मानुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी उत्सव है। यह दिन भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जो शक्ति, भक्ति, निष्ठा और...

नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई: आंकड़े, वास्तविकता और भविष्य...

नक्सलवाद भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए लंबे समय से एक गंभीर चुनौती रहा है। यह केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि गहरे सामाजिक-आर्थिक असंतुलन से जुड़ी समस्या भी है। पाठकों को बताता चलूं कि नक्सलवाद मूलतः माओवाद की विचारधा...

प्रकृति से खिलवाड़ यानि आपदाओं को आमंत्रण...

प्रकृति व पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक हैं। प्राकृतिक संपदाओं के महत्व को समझना, उनका किफायती उपयोग करना, उनके संरक्षण को प्राथमिकता देना हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है। जल, जंगल और जमीन प्रकृति के तीन प्रमुख तत्व हैं जिनके बगैर हमा...

डिजिटलीकरण की रफ्तार और ‘डिजिटल जहर’ का खतरा...

-सुनील कुमार महला आज हमारा देश भारत तेजी से डिजिटाइजेशन की ओर अग्रसर है, और कहना ग़लत नहीं होगा कि इसमें स्मार्टफोन विशेषकर एंड्रॉयड का सबसे बड़ा योगदान है। यहां पाठकों को जानकारी देना चाहूंगा कि वैश्विक स्तर पर जहां एंड्रॉयड उपयो...

युद्ध के माहौल में याद आये भगवान महावीर...

बाल मुकुंद ओझा भगवान महावीर जयंती का पर्व इस वर्ष 31 मार्च को देश में मनाया जा रहा है। आज देश और दुनिया में सर्वत्र युद्ध, हिंसा, मारकाट, धार्मिक असहिष्णुता तथा नफरत का माहौल व्याप्त हो रहा है। लोग एक दूसरे के खिलाफ लड़ – मरन...

जलवायु परिवर्तनः भविष्य नहीं, वर्तमान का महाविनाशकारी संकट...

-ः ललित गर्ग आज मानव सभ्यता जिस सबसे बड़े संकट के सामने खड़ी है, वह युद्ध, महामारी या आर्थिक मंदी नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन है। दुनिया आज जलवायु संकट के ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां हर नया आंकड़ा खतरे की घंटी बनकर सामने आ रहा है। विश्व ...

विश्व के पक्ष में बढ़ता खर्च और गहराता संकट ईरान इजराइल संघर्ष से...

पश्चिम एशिया में चल रहा ईरान और इजराइल के बीच संघर्ष अब एक सीमित युद्ध नहीं रहा बल्कि यह धीरे धीरे एक व्यापक क्षेत्रीय टकराव का रूप लेता जा रहा है। लगभग एक महीने से जारी इस संघर्ष में अब यमन के हूती विद्रोहियों के शामिल होने से हा...

थिएटर : कला, अभिव्यक्ति और बदलाव का माध्यम...

-सुनील कुमार महला हर वर्ष 27 मार्च को विश्व रंगमंच दिवस (वर्ल्ड थिएटर डे) मनाया जाता है। वास्तव में,इसकी शुरुआत वर्ष 1961 में इंटरनेशनल थिएटर इंस्टीट्यूट (आइटीआइ) द्वारा की गई थी, जो यूनेस्को से जुड़ा एक प्रमुख सांस्कृतिक संगठन है...

दुनिया के सबसे धाकड़ और लोकप्रिय नेता बने नरेंद्र मोदी...

बाल मुकुंद ओझा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर वैश्विक स्तर पर सबसे लोकप्रिय नेता बनकर उभरे हैं। मोदी ने अमेरिका और ब्रिटेन जैसे शक्तिशाली देशों के राष्ट्रपतियों को लोकप्रियता के मामले में काफी पीछे छोड़ दिया है। समूची दुनिया...

मर्यादा, सुशासन और शांति के विश्वनायक श्रीराम...

-ललित गर्ग रामनवमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के नैतिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का पुण्य और पवित्र अवसर है। आज जब दुनिया युद्ध, हिंसा, आतंक, असहिष्णुता, पारिवारिक विघटन, राजनीतिक अविश्वास और नैतिक पतन जैसी अनेक स...

धर्म, जाति और धर्मांतरण: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय...

-ललित गर्ग धर्म, जाति और धर्मांतरण का प्रश्न भारत के सामाजिक, संवैधानिक और राष्ट्रीय जीवन से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील और जटिल विषय है। हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिया गया यह निर्णय कि यदि अनुसूचित जाति का कोई व्यक्ति हिन्दू,...

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में गणेश शंकर विद्यार्थी की पत्रकारिता...

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास केवल राजनीतिक आंदोलनों और सशस्त्र क्रांतियों का इतिहास नहीं है, बल्कि यह उस ‘चौथे स्तंभ’ के जागरण की भी गाथा है, जिसने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ जनमत बनाने में अभूतपूर्व भूमिका न...

कानून बनाम हकीकत: आखिर क्यों नहीं रुक रहीं सीवर मौतें ?...

-सुनील कुमार महला हमारे देश में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान होने वाली मौतें एक अत्यंत गंभीर, संवेदनशील और शर्मनाक सच्चाई हैं। वास्तव में, यह समस्या केवल और केवल तकनीकी नहीं, बल्कि यह सामाजिक, प्रशासनिक और मानवाधिकारों से...

बिहार में मजदूरों का लिंक्डइन?...

– महेन्द्र तिवारी क्या मजदूरों का भी लिंक्डइन हो सकता है? ये सवाल सुनकर कई लोग आश्चर्य से भौहें चढ़ा लेंगे। लेकिन बिहार के दरभंगा जिले के चंद्रशेखर मंडल ने न सिर्फ ये सवाल उठाया, बल्कि इसे हकीकत में बदल दिया। हर सुबह शहरों क...

जागरूकता से मिटेगी टीबी से मुक्ति...

विश्व क्षय रोग दिवस हर साल 24 मार्च को दुनियाभर में मनाया जाता है। इस दिवस के आयोजन का मुख्य उद्देश्य क्षय यानि टीबी के रोग के बारे में जनसाधारण में सतर्कता जागरूकता बढ़ाना और लोगों को इसके इलाज के लिए सजग करना है। क्षय रोग अथवा ट...

लोहिया जयंती : कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी...

मशहूर कवि अल्लामा इकबाल की कविता की ये पंक्तियाँ ”कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी” डॉ राम मनोहर लोहिया पर एकदम सटीक बैठती है। लोहिया के कहे गए एक एक शब्द आज भी लोगों की जुबान पर है। भारत में गैर कांग्रेसवाद के जन्...

क्यों धुरंधर 2 ने रचे नए कीर्तिमान...

आदित्य धर के निर्देशन में बनी और रणवीर सिंह अभिनीत ‘धुरंधर 2’ ने भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक ऐसा अध्याय लिख दिया है जिसे आने वाले कई दशकों तक याद रखा जाएगा। बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म ने जो सुनामी पैदा की है, उसने न केव...

सोशल मीडिया और घटती खुशियां: क्या कहती है वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्...

फिनलैंड एकबार फिर से विश्व का सबसे खुशहाल देश बन गया है। पाठकों को बताता चलूं कि फिनलैंड लगातार 9वीं बार दुनिया का सबसे खुशहाल देश बना है। 19 मार्च 2026 नवसंवत्सर के दिन (गुरुवार को) जारी वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट-2026 में भारत 116...

बढ़ता जंगल खुशियों का मंगल...

अंतरराष्ट्रीय वन दिवस प्रतिवर्ष 21 मार्च को मनाया जाता है। अपनी मातृभूमि की मिट्टी और वन सम्पदा का महत्व समझने तथा वनों और जंगलों का संरक्षण करने के उद्देश्य से यह दिवस मनाया जाता है। वैश्विक स्तर पर कुल वन क्षेत्र लगभग 4.14 अरब ह...

एक चिड़िया, अनेक चिड़िया, घर में क्यों नहीं आती चिड़िया...

भला किसने गौरैया को अपने आंगन, घर, खिड़की पर चहचहाते नहीं देखा होगा? अभी इसका जवाब हाँ है, लेकिन जिस तरह के हालात बन रहे हैं उसमें आने वाली पीढ़ी के लिए इसका जवाब न भी हो सकता है। साथ ही हममें से लगभग पुराने दौर के सभी लोगों ने 19...

नकली उत्पादों का बाजार : हर तीसरा व्यक्ति हुआ शिकार...

नकली सामान की समस्या से इस समय पूरी दुनिया जूझ रही है। एक अनुमान के मुताबिक, वैश्विक बाजार में नकली सामान की हिस्सेदारी 5 प्रतिशत तक है। भारत में हालात ज्यादा चिंताजनक है। देश में नकली उत्पादों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है, यहां 30...

राजस्थान दिवस का उत्सवी आगाज...

राज्य की भजनलाल सरकार ने हिन्दू नववर्ष (वर्ष प्रतिपदा) पर राजस्थान स्थापना दिवस मनाने का उत्सवी आगाज किया है। राज्य सरकार जनभागीदारी के साथ राजस्थान दिवस मनाने जा रही है। 30 मार्च को मनाया जाने वाला राजस्थान दिवस इस बार 19 मार्च क...

प्रकृति की नन्ही दूत है चिड़िया...

रमेश सर्राफ धमोरा विश्व गौरैया दिवस नन्ही घरेलू गौरैया और अन्य पक्षियों को समर्पित है। गौरैया की संख्या में हो रही तीव्र गिरावट के बारे में जागरूकता पैदा करने और लोगों को इन परिचित पक्षियों की रक्षा करने के लिए प्रोत्साहित करने हे...

फास्टैग एनुअल पास हुआ अब महंगा...

– महेन्द्र तिवारी भारत में सड़क परिवहन व्यवस्था पिछले एक दशक में जिस तेजी से बदली है, वह देश के बुनियादी ढांचे के विकास की कहानी को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। पहले राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करना कई बार थकाऊ अनुभव बन जाता...

विलुप्त होते जा रहे है जीव जंतु और वनस्पतियां...

बाल मुकुन्द ओझा जलवायु परिवर्तन से दुर्लभ प्रजाति वाले जीव-जंतु और वनस्पतियां लुप्त होती जा रही हैं। जमीन, वायु और समुद्री जीव जंतुओं और वहां की वनस्पतियां इस संकट से जूझ रही हैं। जलवायु परिवर्तन ने प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक द...

घातक और जानलेवा बीमारियों का रक्षा कवच है टीकाकरण...

देश में 16 मार्च को राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस आमजन में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम सभी के लिए टीकाकरण मानवीय रूप से संभव है रखी गई है। इस थीम का मुख्य संदेश है कि यदि सामूहिक प्रयास और मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था...

सोनम वांगचुक और लद्दाख के स्वायत्तता का भविष्य...

– महेन्द्र तिवारी केंद्र सरकार ने हाल ही में लद्दाख के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक पर लगे राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। जोधपुर जेल में 170 दिनों की हिरासत के बाद ...

ट्रंप के दावे और टूटता तिलस्म...

डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति और उनके आक्रामक व्यापारिक दृष्टिकोण ने वैश्विक भू-राजनीति में भारत और अमेरिका के संबंधों को एक जटिल धरातल पर लाकर खड़ा कर दिया है। हाल के घटनाक्रम और ट्रंप के बयानों से यह आभास हो...

डिजिटल ठगी का बढ़ता जाल : हर 24 घंटे में हो रही 38 करोड़ रुपये की...

इस वर्ष हम उपभोक्ता दिवस ऐसे माहौल में मना रहे है जब उपभोक्ता साइबर ठगी के आगे बेबस नज़र आ रहे है। उपभोक्ता ठगी के नए नए तरीके इस्तेमाल में लिए जा रहे है। हालांकि डिजिटल दुनिया ने बेशक हमारी जिंदगी को आसान बना दिया है, लेकिन इसके स...

दुनिया उठा रही है तीन देशों के युद्ध का खामियाजा...

बाल मुकुंद ओझा तीन देशों के युद्ध में इस समय समूची दुनिया प्रभावित हो रही है। अर्थव्यवस्था चौपट हो रही है और तेल गैस का संकट खड़ा हो गया है। भारत अपनी गुट निरपेक्षता के लिए जाना जाता है और इस समय भारत भी कई प्रकार के संकट झेलने को ...

इच्छा मृत्यु केवल कानून ही नहीं, मानवीय गरिमा का प्रश्न...

-ः ललित गर्ग भारतीय समाज में यह गहरी धारणा रही है कि परिवार के किसी सदस्य की सेवा तब तक की जाए, जब तक उसके प्राण स्वाभाविक रूप से समाप्त न हो जाएं। जीवन की रक्षा और उसकी देखभाल को एक नैतिक कर्तव्य के रूप में देखा जाता रहा है। यही ...

जलियांवाला बाग से कैक्सटन हॉल तक : शहीद-ए-आजम ऊधम सिंह की अमर गाथ...

-सुनील कुमार महला शहीद-ए-आजम सरदार उधम सिंह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन दीपस्तंभों में से एक हैं, जिनका नाम साहस और अटूट संकल्प का प्रतीक है। दूसरे शब्दों में कहें तो उधम सिंह (राम मोहम्मद सिंह आज़ाद) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम...

स्वास्थ्य के लिए खतरे की घंटी है परिवहन प्रदूषण...

दुनिया भर के बहुत से देशों में सड़कों पर वाहनों की निरंतर बढ़ती संख्या परिवहन प्रदूषण का एक प्रमुख स्रोत है। हमारा देश भारत भी इस समय परिवहन प्रदूषण की विभीषिका से जूझ रहा है। सड़कों का आधारभूत ढांचा हमारी अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ आधार...

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का स्वर्णिम अध्याय : दांडी मार्च...

-सुनील कुमार महला भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की दृष्टि से 12 मार्च 1930 का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक है। जैसा कि इसी दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने गुजरात के साबरमती आश्रम से दांडी नामक स्थान तक लगभग 390 किलोमीटर (241 मील...

सामाजिक ताने बाने को नष्ट भ्रष्ट कर रही वेब सीरीज...

बालमुकुंद ओझा आजकल वेब सीरीज की चर्चा ज्यादा हो रही है। क्या आप जानते है वेब सीरीज क्या होती है और इसका मतलब क्या होता है। वेब सीरीज दरअसल इंटरनेट पर जारी धारावाहिक या वीडियो एपिसोड की एक श्रृंखला होती है और इसे वेब शो के नाम से भ...

कच्चे तेल से बढ़ा दुनिया में आर्थिक हाहाकार...

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक दिन में पूरी दुनिया लगभग 16 अरब लीटर गैस या तेल फूंक देती है। इनमें से एक चौथाई यानी करीब 4 अरब लीटर तेल और गैस दुनिया भर के देशों में जिस एक रास्ते से हो पहुंचता है वो यही रास्ता है, द स्ट्रैट ऑफ ह...

वर-वधु के माता-पिता की सहमति के बाद ही मान्य हो विवाह...

दुनिया में भारत एक ऐसा देश है जहाँ संविधान द्वारा हर वर्ग, हर धर्म, हर जाति और हर समाज के व्यक्ति को स्वतंत्र रूप से जीवन जीने का अधिकार प्राप्त है। भारतीय संविधान में नागरिकों को अनेक मौलिक अधिकार दिए हैं। इन्हीं में से अनुच्छेद ...

आभासी दुनिया से बचपन को सुरक्षित रखने की पहल...

-ललित गर्ग डिजिटल युग में मानव जीवन की गति और स्वरूप तेजी से बदल रहा है। संचार, शिक्षा, मनोरंजन और सामाजिक संबंधों का बड़ा हिस्सा अब आभासी माध्यमों के सहारे संचालित होने लगा है। इस परिवर्तन ने जहां अनेक सुविधाएं प्रदान की हैं, वहीं...

ज्ञान की जननी सावित्रीबाई फुले : जिन्होंने समाज की बेड़ियाँ काटकर ...

-सुनील कुमार महला सावित्रीबाई फुले भारत की प्रथम महिला शिक्षिका (महिला शिक्षा की अग्रदूत) ही नहीं, बल्कि एक प्रखर विचारक, महिला सशक्तीकरण की प्रेरणा, सामाजिक न्याय के संघर्ष की प्रतीक और महान समाज सुधारक थीं। प्रत्येक वर्ष 10 मार्...

नीतीश कुमार होना आसान नहीं है...

– महेन्द्र तिवारी भारतीय राजनीति के फलक पर नीतीश कुमार एक ऐसी पहेली हैं, जिसे सुलझाने का दावा हर कोई करता है, लेकिन पूरी तरह कोई समझ नहीं पाता। एक ऐसा नेता, जिसके पास लालू प्रसाद यादव जैसा नैसर्गिक करिश्मा नहीं है, न ही उनके...

तेल संकट की आहट : महंगाई की मार से लोग भयभीत...

– बाल मुकुन्द ओझा अमेरिका इजरायल और ईरान युद्ध ने महंगाई की मार से देशवासियों को डरा दिया है। आम लोगों को महंगाई का जबरिया झटका लगा है। घरेलू एलपीजी गैस सिलिंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है। 19 किलो वाले कॉमर्...

भविष्य की युद्ध प्रणाली और भारत की रणनीति...

– महेन्द्र तिवारी भारत की सुरक्षा व्यवस्था आज एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहाँ केवल सैनिकों की संख्या या पारंपरिक हथियार पर्याप्त नहीं रह गए हैं। आधुनिक युद्ध अब अत्याधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धि, दूर से संचालित प्रणालियों और त...

भारत में महिलाओं के प्रति बदलने लगा है नज़रिया...

रमेश सर्राफ धमोरा अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक उपलब्धियों का जश्न मनाने और लैंगिक समानता की वकालत करने के लिए मनाया जाता है। यह जागरूकता बढ़ाने, बाधाओं को तोड़ने और सभी के लिए समान अव...

बिहार की राजनीति में सत्ता परिवर्तन से जुड़े सवाल...

– ललित गर्ग – बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मोड़ उस समय सामने आया जब राज्य के लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतिश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जाने का निर्णय स्वीकार किया और इसके लिए नामांकन भी ...

अन्न से आत्मनिर्भरता तक : विश्व अनाज दिवस का संदेश...

-सुनील कुमार महला अनाजों के महत्व, पोषण और खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 7 मार्च को विश्व अनाज दिवस (वर्ल्ड सीरियल डे) मनाया जाता है। यहां पाठकों को बताता चलूं कि ‘सीरियल’ शब्द की उत्पत्ति प्राचीन...

इजराइल-अमेरिका-ईरान संघर्ष और भारत के सामने नई चुनौतियाँ...

– महेन्द्र तिवारी इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव आज की विश्व राजनीति की सबसे जटिल और चिंताजनक घटनाओं में से एक बन गया है। दशकों से चले आ रहे वैचारिक मतभेद, क्षेत्रीय प्रभुत्व की प्रतिस्पर्धा और परमाणु कार्यक्रम को...

कटता पेड़, बढ़ता प्रदूषण और टूटती सांसे...

दुनिया में जनसंख्या वृद्धि, औद्योगिक विकास और आधुनिक जीवन शैली की वजह से प्राकृतिक वनों पर मानव समाज का दबाव बढ़ता जा रहा है। इसे ध्यान में रखकर मानव जीवन की आवश्यकताओं के हिसाब से वनों के संतुलित दोहन तथा नये जंगल लगाने के लिए भी ...

बदलते दौर में होली : परंपरा से आधुनिकता तक का सफर...

-सुनील कुमार महला हर वर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन का पर्व मनाया जाता है और उसके अगले दिन चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को रंगों की होली खेली जाती है। किंतु इस वर्ष पूर्णिमा तिथि पर वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण पड़न...

युद्ध नहीं, शांति ही बदलती दुनिया की अनिवार्य अपेक्षा...

-ः ललित गर्ग नई बनती दुनिया का चेहरा जितनी तेजी से बदल रहा है, उतनी ही तेजी से वैश्विक असुरक्षा की भावना भी गहराती जा रही है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता टकराव केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं है, बल्कि वह एक ऐसे वैश्विक असंतुलन...

होली दहन : बुराई पर अच्छाई की विजय और सामाजिक चेतना का पर्व...

होली केवल रंगों का उत्सव नहीं है, बल्कि वह आत्मचिंतन, सामाजिक चेतना और नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना का पर्व भी है। धुलेंडी से एक दिन पूर्व होने वाला होली दहन इसी गहरे सांस्कृतिक और दार्शनिक भाव का प्रतिनिधित्व करता है। यह परंपरा ...

नया बीज बिल 2026 : किसानों के हक और बीज की क्वालिटी के लिए नई दिश...

-सुनील कुमार महला भारत दुनिया के खेती-बाड़ी वाले देशों में से एक है। यह कहना गलत नहीं होगा कि देश की एक बड़ी आबादी अभी भी सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से खेती पर निर्भर है। अनुकूल मौसम, उपजाऊ मिट्टी और अलग-अलग भौगोलिक हालात कई तरह की फस...

विज्ञान में महिलाओं की भागीदारी : विकास का सशक्त सूत्र...

28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है। वास्तव में, यह दिवस वैज्ञानिक सोच, नवाचार (इनोवेशन) और सतत विकास (सस्टेनेबल डेवलपमेंट) में विज्ञान की भूमिका को प्रोत्साहित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। कहना ग़लत नहीं होगा कि यह दि...

दुर्लभ रोगों के इलाज में चुनौतियां...

दुर्लभ रोग दिवस हर साल फरवरी के आखिरी दिन को मनाया जाता है। दुर्लभ रोग दिवस एक वार्षिक वैश्विक दिवस है। इस वर्ष यह दिवस 28 फरवरी को मनाया जा रहा है। यह दिवस हमें सिखाता है कि बीमारी दुर्लभ हो सकती है, लेकिन मरीज नहीं। हर व्यक्ति क...

पैक्स सिलिका में भारत का होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि...

-ललित गर्ग इक्कीसवीं सदी का यह दौर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर और तकनीकी आपूर्ति शृंकखलाओं की वैश्विक प्रतिस्पर्धा का दौर बन चुका है। ऐसे समय में भारत द्वारा एआई शिखर सम्मेलन का सफल आयोजन और उसके तुरंत बाद अमेरिका के नेतृत्व ...

वीर सावरकर की पुण्यतिथि : भारत रत्न की मांग उठी...

आज वीर सावरकर की 60वीं पुण्यतिथि हैं। 26 फरवरी, 1966 को मुंबई (तब बॉम्बे) में वीर सावरकर का निधन हो गया। हिंदुत्व के प्रबल पैरोकार वीर सावरकर एक बार फिर चर्चा में है। सावरकर कभी संघ के स्वयंसेवक नहीं रहे है। वे हिंदू महासभा के नेत...

डीपफेक का धोखा और डिजिटल सख्त नियमों की अनिवार्यता...

-ः ललित गर्ग डिजिटल युग में सूचना की गति जितनी तीव्र हुई है, उतनी ही तेजी से भ्रम, छल और दुष्प्रचार की संभावनाएँ भी बढ़ी हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डीपफेक तकनीक ने इस चुनौती को और जटिल बना दिया है। अब केवल शब्दों से नहीं, बल्कि चे...

बंगाल चुनाव में हिंदी भाषी मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण...

प. बंगाल विधानसभा के चुनाव शीघ्र होने जा रहे है। यहां चुनाव प्रचार की शुरुआत अभी से हो चुकी है। दीवारों पर पार्टियों के चुनाव चिह्न और स्लोगन लिखे जा रहे है। इन चुनावों में हिंदी भाषी मतदाताओं की भी प्रभावी भूमिका है जिनकी संख्या ...

कांग्रेस का चुनावी ब्रह्मास्त्र है प्रियंका गांधी...

बाल मुकुन्द ओझा असम, बंगाल और केरल सहित पांच राज्यों में शीघ्र विधानसभा चुनाव होने जा रहे है। कांग्रेस पार्टी इन चुनावों में गाँधी परिवार की बेटी प्रियंका में चुनावी संभावनाएं तलाश रही है। लोकसभा में अपने पॉजिटिव रवैये के चलते उन्...

कचरे पर कड़ा रुख: न्यायपालिका के निर्देश और ज़मीनी सच्चाई...

-सुनील कुमार महला ठोस कचरे का प्रबंधन आज के समय की एक बहुत बड़ी आवश्यकता बन चुका है। कहना ग़लत नहीं होगा कि आज लगातार बढ़ती जनसंख्या, बढ़ते शहरीकरण, औधोगिकीकरण और उपभोग की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण धरती पर ठोस कचरे की मात्रा लगातार ...

भारत का एआई नेतृत्व तकनीक एवं मानवीय मूल्यों का संगम बने...

दिल्ली इन दिनों केवल भारत की राजनीतिक राजधानी भर नहीं, बल्कि उभरती तकनीकी चेतना का वैश्विक केंद्र बनी हुई है। ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब प्रयोगशालाओं या कॉरपोरेट दफ्तरों तक...

बढ़ता ही जा रहा है बंजरपन का रकबा...

भूमि के बंजर होने की समस्या ने आज दुनिया के सामने एक बड़ी चुनौती पैदा कर दी है। भारत की बात करें तो यहां उपजाऊ भूमि के बंजर होने का खतरा निरंतर बढ़ता ही जा रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में मात्र 11 प्रतिशत जमीन ही उपजाऊ है। ...

बंगाल का भविष्यः धर्म की लहर या प्रगति की राह?...

-ः ललित गर्ग:- पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की औपचारिक घोषणा भले अभी बाकी हो, पर राजनीतिक रणभेरी बज चुकी है। इस बार संकेत साफ हैं-चुनाव विकास बनाम विकास के दावे पर नहीं, बल्कि पहचान, अस्मिता और धर्म की ध्वजा के इर्द-गिर्द घूम स...

केरल में गाली और दिल्ली में गलबहियां...

– बाल मुकुन्द ओझा केरल विधानसभा चुनाव के मुहाने पर खड़ा है। कम्युनिष्टों ने इसी राज्य से अपनी पार्टी की नीवं खड़ी की थी। केरल से शुरू हुई यात्रा बंगाल और त्रिपुरा तक फेल गई। कभी देश के एक दर्ज़न से अधिक राज्यों में कम्युनिष्टो...

विकास का संकल्प : ट्रिपल इंजन से बदलेगी दिल्ली की तस्वीर...

-ः ललित गर्ग वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में दिल्ली के लिए 70 हजार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि का प्रावधान केवल एक आर्थिक घोषणा नहीं, बल्कि राजधानी के भविष्य की रूपरेखा है। सड़क, रेल परिवहन, मेट्रो विस्तार, जल आपूर्ति, स्वास्थ्य,...

मातृभाषा का संरक्षण : पहचान और अस्तित्व की रक्षा...

-सुनील कुमार महला 21 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में मनाया जाता है। वास्तव में यह दिवस दुनिया भर में भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देने के साथ ही साथ विभिन्न मातृभाषाओं के संरक्षण के महत्व को समझाने के लिए ...

रोबोडॉग विवाद : तकनीक, पारदर्शिता और प्रतिष्ठा का टकराव...

– महेन्द्र तिवारी तकनीकी उपलब्धियों के इस युग में जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता को भविष्य की दिशा तय करने वाली शक्ति माना जा रहा है, तब सार्वजनिक मंचों पर प्रस्तुत किए जाने वाले दावों की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पहले से कहीं अधिक ...

सामाजिक न्याय का सन्देश : रोटी, कपड़ा और मकान...

बाल मुकुन्द ओझा हमारे देश में आज़ादी के 77 साल बाद भी लोग रोटी, कपड़ा और मकान की बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे है। इस विषम स्थिति में सामाजिक न्याय की बात करना जले पर नमक छिड़कने के बराबर है। फिर भी देश और दुनिया सामाजिक न्याय दिव...

एग्जाम स्ट्रेस से सफलता तक : परीक्षा फोबिया को हराने के आसान उपाय...

-सुनील कुमार महला इन दिनों हमारे देश में परीक्षाओं का दौर चल रहा है और ऐसे समय में बच्चे अक्सर तनाव, अवसाद और डर(एक्जाम फोबिया) का अनुभव करते हैं। परीक्षा को लेकर उनके मन में अनेक प्रश्न उठते हैं-क्या होगा, कैसे होगा, कितने अंक आए...

न्यूज़ चैनलों पर हेट स्पीच का भोकाल...

बाल मुकुन्द ओझा देश की सर्वोच्च अदालत ने एक बार फिर हेट स्पीच कर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने कहा, सियासी दलों को अपने नेताओं पर लगाम लगानी चाहिए और मीडिया को भी ऐसे नफरती भाषणों को बार-बार दिखाने से बचना चाहिए। देश के बहुत से लोगो...

बंगाल का भविष्य : धर्म की लहर या प्रगति की राह?...

-ललित गर्ग पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की औपचारिक घोषणा भले अभी बाकी हो, पर राजनीतिक रणभेरी बज चुकी है। इस बार संकेत साफ हैं-चुनाव विकास बनाम विकास के दावे पर नहीं, बल्कि पहचान, अस्मिता और धर्म की ध्वजा के इर्द-गिर्द घूम सकता ...

यूपी जहां चौबीसों घंटे राजनीतिक पार्टियां चुनावी मोड में रहती है...

बाल मुकुन्द ओझा देश में यूपी एक मात्र ऐसा राज्य है जहां चौबीसो घंटे राजनीतिक पार्टिया चुनावी मोड़ में रहती है। हालाँकि यूपी विधान सभा के चुनाव अगले साल होने है मगर चुनावी दुंदुभि अभी से बजने लगी है। सियासी पार्टियों ने अपनी अपनी कम...

शिवजी को अत्यंत प्रिय है बेलपत्र...

बाल मुकुन्द ओझा महाशिवरात्रि हिन्दुओं के सबसे बड़े पर्वों में से एक है। महाशिवरात्रि का दिन मांगलिक कार्यों के लिए बहुत शुभ माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार महाशिवरात्रि 15 फरवरी को पड़ रही है। मान्‍यता है कि इसी दिन शि...

बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन की वैचारिक क्रांति...

– ललित गर्ग बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर इतिहास के मोड़ पर खड़ी है। लगभग दो दशकों के लंबे अंतराल के बाद यदि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में लौटती है और तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद की दावे...

धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण त्यौहार है महाशिवरात्रि...

रमेश सर्राफ धमोरा भगवान शिव का त्यौहार है महाशिवरात्रि । भारत के सभी प्रदेशो में महाशिव रात्रि का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। भारत के साथ नेपाल, मारिशस सहित दुनिया के कई अन्य देशों में भी महाशिवरात्रि मनाते है। हर साल फाल्गुन मा...

नारी ही परिवार की खुशी, राष्ट्र का गौरव और सुख की धुरी है...

-सुनील कुमार महला स्त्री की गरिमा और उसका सम्मान भारतीय संस्कृति की मूल आत्मा रहे हैं। हमारे यहां नारी को शक्ति, करुणा और सृजन का प्रतीक माना गया है तथा शास्त्रों में कहा गया है-‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता।&...

मन की बात ने बढ़ाया रेडियो का मान सम्मान...

विश्व रेडियो दिवस प्रतिवर्ष 13 फरवरी को मनाया जाता है। कोई माने या न माने मगर यह बिलकुल सच है की भारत में अपनी पहचान खोते जा रहे रेडियो को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक कार्यक्रम ने पुनर्जीवित कर नया जीवनदान दिया है। मोदी के लोक...

सुरक्षित डिजिटल भविष्य: सावधानी, शिक्षा और सशक्त निगरानी की जरूरत...

-सुनील कुमार महला आज एआई का दौर है, सूचना क्रांति का युग है,जहाँ मशीनें मनुष्य सोच को नई उड़ान देती हैं।सच तो यह है कि आज के समय में ज्ञान, काम और रचनात्मकता सब बदल रहे हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो मानव और तकनीक मिलकर भविष्य गढ़ ...

लोकसभा-अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वासः लोकतंत्र की अग्निपरीक्षा...

-ः ललित गर्ग लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी लोकतंत्र के लिये एक चिन्ताजनक घटना है। क्योंकि लोकतंत्र केवल शासन की एक प्रणाली नहीं, बल्कि निरंतर संवाद, असहमति के सम्मान और संस्थागत विश्वास पर टिक...

महान चिंतक, समाज-सुधारक और देशभक्त स्वामी दयानन्द सरस्वती...

बाल मुकुन्द ओझा उन्नीसवीं शताब्दी के महान समाज-सुधारकों में स्वामी दयानंद सरस्वती का नाम अत्यंत श्रध्दा के साथ लिया जाता है। स्वामी दयानंद सरस्वती आर्य समाज के संस्थापक, महान चिंतक, समाज-सुधारक और देशभक्त थे। स्वामी जी का जन्म 12 ...

लोकतंत्र के मंदिर में सियासी बवंडर...

बाल मुकुन्द ओझा संसद का बजट सत्र भारत के लोकतंत्र के लिए काफी शर्मनाक साबित हो रहा है। लोकतंत्र के इस पावन पवित्र मंदिर में जनता के मुद्दे उठाने की बजाय कार्यवाही ठप्प करना ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। संसद का बजट सत्र भी पिछले सत...

… ताकि दुबारा न हो सूरजकुंड जैसे हादसे !...

-सुनील कुमार महला फरीदाबाद में आयोजित 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव 2026 के दौरान शनिवार, 7 फरवरी 2025 की शाम एक गंभीर हादसा हुआ, जब मेले में लगे एक झूले के टूटने से 13 लोग घायल हो गए। इस दुर्घटना में झूला ...

भारत ने दलहन आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाये कदम...

बाल मुकुन्द ओझा अंतर्राष्ट्रीय दलहन दिवस हर साल 10 फरवरी को मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम विश्व की दलहन: सादगी से उत्कृष्टता की ओर रखी गई है। यह दिवस पहली बार वर्ष 2016 में मनाया गया था। बाद में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 10 फरवरी ...

जहाँ सुरों में बसता है सुकून: मनुष्य जीवन में संगीत...

-सुनील कुमार महला आज की जीवनशैली भागम-भाग भरी है। मनुष्य हर कहीं तनाव और अवसाद की बेड़ियों में बंधा नज़र आता है। उसके पास न स्वयं के लिए समय बचा है और न ही परिवार व दूसरों के लिए। पदार्थ में वह रम-बस सा गया है।ऐसे में संगीत मनुष्य...

थाली से प्याली तक मिलावट ही मिलावट...

बाल मुकुन्द ओझा देश में कुछ भी सुरक्षित नहीं है। अब दूध भी नकली मिल रहा है। गुजरात के साबरकांठा जिले के सलाल इलाके में जहरीले केमिकल से दूध बनाने वाली एक फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने सलाल में रेलवे क्रॉसिंग के पास श्री सत...

आखिर क्यों चर्चा में है ‘खेजड़ी बचाओ जन-आंदोलन’...

-सुनील कुमार महला इन दिनों राजस्थान में खेजड़ी बचाओ जन-आंदोलन खास चर्चा में है। दरअसल, खेजड़ी बचाओ जन-आंदोलन राजस्थान के राज्य वृक्ष ‘खेजड़ी’ के संरक्षण के लिए चलाया जा रहा एक जन-आंदोलन है। वास्तव में यह आंदोलन सोलर कंपनियों द्वार...

मोबाइल बच्चों का दोस्त है या दुश्मन...

-बाल मुकुन्द ओझा भारत में भी कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के बेज़ा इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग अब जोर शोर से उठने लगी है। भारत सरकार ने भी देर आये दुरस्त आये अब सोशल मीडिया के बेज़ा इस्तेमाल से बच्चों को बचाने पर गंभीरता स...

गड्ढों वाली व्यवस्था और खतरे में पड़ता जीवन...

गड्ढों में गिरी व्यवस्था में समाप्त होता जीवन आज के भारत की एक ऐसी विडंबना बन चुका है, जिसे देखकर मन भीतर तक सिहर उठता है। नोएडा में कार सवार युवा इंजीनियर की गड्ढे में गिरकर मौत का दर्द अभी समाज के मन से उतरा भी नहीं था कि दिल्ली...

डराने लगी है ऑनलाइन गेमिंग की लत एवं आभासी दुनिया...

-ः ललित गर्ग ऑनलाइन गेमिंग की लत एवं आभासी दुनिया कितनी भयावह एवं घातक हो सकती है, इसकी एक ही दिन में दो अलग-अलग जगह घटी घटनाओं ने न केवल झकझोरा है, बल्कि यह हमारे समय, हमारी सामाजिक संरचना और हमारी सामूहिक असावधानी पर लगा हुआ एक ...

राजस्थान में साहित्य अकादमियों का नहीं है कोई धणी धोरी...

बाल मुकुन्द ओझा लगता है सरकारों ने साहित्य, संस्कृति और कला से अपना मुंह मोड़ लाया है। इसका एक ताज़ा उदहारण राजस्थान है। पिछली गहलोत सरकार का अनुसरण करते हुए वर्तमान भजन लाल सरकार ने भी इस दिशा में अपनी कोई रूचि प्रदर्शित नहीं की है...

सोशल मीडिया : संवाद का माध्यम या निजता का संकट ?...

-सुनील कुमार महला आज संचार क्रांति का युग है।हर कोई सोशल मीडिया,एआइ का प्रयोग कर रहा है। आधुनिक दौर में सोशल मीडिया ने हमारे अनेक कार्यों को आसान और सरल बनाया है। दूसरे शब्दों में कहें तो सोशल मीडिया ने संवाद को जितना सरल और व्याप...

दम तोड़ रही हैं जीवनदायी नदियां...

-बाल मुकुन्द ओझा नदियां कभी हमारी पहचान थी। आदिकाल से जीवनदायिनी रही हमारी पवित्र नदियां आज दम तोड़ रही हैं। नदियों और झीलों के रूप में पानी के प्रचुर प्राकृतिक स्रोतों पर विचार करते हुए देखे तो भारत एक समृद्ध देश है। नदियां न केवल...

प्रकृति संरक्षित तो मानव जीवन भी सुरक्षित...

-बाल मुकुन्द ओझा प्रकृति पर्यावरण और प्रदूषण एक दूसरे के पूरक हैं। प्रकृति में कोई विकृति आएगी तो पर्यावरण बिगड़ेगा जिसका खामियाज़ा हमें प्रदूषण के रूप में उठाना होगा। इन तीनों में सामंजस्य हुआ तो मनुष्य को बेहतर जीवन जीने का अवसर म...

मीर तकी मीर : दर्द को शायरी बनाने वाला शायर...

-सुनील कुमार महला 3 फरवरी को साहित्यकार, उर्दू साहित्य के महानतम शायर मीर तकी मीर (1723–1810) का जन्मदिन मनाया जाता है।मीर तकी मीर सिर्फ़ ग़ज़ल के शायर नहीं थे, वे अपने समय की टूटी हुई रूह की आवाज़ थे।मीर उर्दू ग़ज़ल को शिखर तक पह...

शिक्षा खौफनाक नहीं, बल्कि स्नेह एवं हौसलों का माध्यम बने...

-ललित गर्ग जीवन को दिशा देने वाली शिक्षा यदि भय, हिंसा और दमन का पर्याय बन जाए तो वह सभ्यता की सबसे बड़ी विडंबना कही जाएगी। हाल के वर्षों में पढ़ाई के नाम पर बच्चों पर बढ़ते दबाव, घर और स्कूल में हिंसक व्यवहार तथा प्रतिस्पर्धा की अंध...

मासिक धर्म गरिमा का अधिकार है...

देश की सर्वोच्च अदालत ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और गरिमा के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए कहा है, मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है। फैसले में ...

आर्थिक सर्वेक्षण से बजट तक : भविष्य के भारत की तलाश...

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद के पटल पर प्रस्तुत किया जाने वाला बजट केवल आय-व्यय का वार्षिक लेखा-जोखा नहीं होता, बल्कि वह देश की आर्थिक दिशा, सामाजिक प्राथमिकताओं और भविष्य की संभावनाओं का दर्पण होता है। आज जब ...

मन चंगा तो कठौती में गंगा

सामाजिक समरसता के प्रेरक संत रविदास जयंती माघ महीने की पूर्णिमा को मनाई जाती है। इस साल ये दिन एक फरवरी को है। इस वर्ष उनका 649 वां जन्मदिवस मनाया जा रहा है। रविदास को रैदास नाम से भी जाना जाता है। रविदास का जन्म वाराणसी के पास के...

अजित पवार : आरोपों से ऊपर उठे राजनीति के ‘दादा-पुरुष’...

यह खबर केवल एक व्यक्ति के निधन की नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति के एक पूरे युग के अचानक थम जाने की सूचना है। 28 जनवरी 2026 की सुबह जब बारामती में हुए विमान हादसे में उपमुख्यमंत्री अजित अनंतराव पवार के असामयिक निधन की पुष्टि...

यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक...

सुप्रीम कोर्ट द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने से जुड़े नए नियमों पर अंतरिम रोक लगाना केवल एक कानूनी आदेश नहीं है, बल्कि यह भारतीय समाज, संविधान और शिक्षा व्यवस्था के भविष्य से जुड़ा एक गहरा संकेत है। यह फैसल...

आज के दौर में गांधी की प्रासंगिकता...

महात्मा गांधी की 78 वीं पुण्यतिथि को आज देश और दुनिया में शहीद दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। महात्मा गांधी की 30 जनवरी 1948 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हर साल इस दिन राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और...

एविएशन सेक्टर को दुर्घटना-शून्य बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने क...

हवाई यात्रा को लंबे समय तक सबसे सुरक्षित यात्रा माध्यम माना जाता रहा है। आँकड़े भी यही गवाही देते हैं कि सड़क, रेल और जलमार्ग की तुलना में विमान दुर्घटनाएँ कहीं कम होती हैं। आधुनिक तकनीक, कड़े सुरक्षा मानक, प्रशिक्षित पायलट और अत्...

आम आदमी की नजर से नौवां बजट...

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को लगातार नौवां आम बजट पेश करने जा रही हैं। यह केवल एक औपचारिक आर्थिक दस्तावेज नहीं होगा, बल्कि उस दौर का आईना होगा जिसमें आम आदमी महंगाई, रोजगार, स्वास्थ्य और भविष्य की अनिश्चितताओं के बी...

खबर की सच्चाई जानने के लिए अखबार सर्वोत्तम माध्यम...

भारतीय समाचार पत्र दिवस प्रतिवर्ष 29 जनवरी को मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य नागरिकों को समाचार पत्र पढ़ने की आदत को प्रोत्साहित करना और उन्हें सामाजिक-राजनीतिक मामलों से अवगत कराना है। यह दिन भारतीय पत्रकारिता की समृ...

जिस लाठी ने साम्राज्य को हिला दिया: पंजाब केसरी लाला लाजपत राय...

28 जनवरी को महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, आर्य समाज के प्रमुख विचारक तथा प्रखर राष्ट्रवादी नेता लाला लाजपत राय की जयंती मनाई जाती है। अपनी ओजस्वी वाणी, निर्भीक तेवर और अंग्रेजी हुकूमत के सामने कभी न झुकने वाले व्यक्तित्व के...

सड़कें बन रहीं सुरक्षित कम, जानलेवा ज़्यादा...

हाल ही में जारी वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू की रिपोर्ट बताती है कि दुनिया में हर साल लाखों लोग सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवा रहे हैं और इनमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी कार दुर्घटनाओं की है। तेज़ रफ्तार, नियमों की अनदेखी और लापरवाह ड्राइविंग ...

भारत का 77वाँ गणतंत्र दिवस : संविधान, उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ...

26 जनवरी 1950 वह दिन है जब भारत का संविधान लागू हुआ था और इसी दिन भारत एक गणतंत्र राष्ट्र बना। इससे पूर्व 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा भारतीय संविधान को अंगीकार किया गया था। इस बार अर्थात् वर्ष 2026 में भारत अपना 77वाँ गणतं...

राष्ट्रीय गौरव राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान सर्वोपरि है...

आज गणतंत्र दिवस है। गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस हमारे राष्ट्रीय पर्व हैं। गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर देखते हैं लोगों का तिरंगे के प्रति विशेष सम्मान झलकता है और होना भी चाहिए क्योंकि यह हमारा राष्ट्रीय गौरव है। राष्ट्र...