DUM 2026 में विद्युत वितरण में बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के अनुप्रयोगों पर हुआ मंथन

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जयपुर। DUM-2026 के दूसरे दिन सत्र-7 ‘विद्युत वितरण में बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (BESS) के अनुप्रयोग—चयनित केस स्टडीज’ में विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। सत्र में TERI के विद्युत एवं नवीकरणीय ऊर्जा प्रभाग के निदेशक श्री अलेख्य दत्ता, GIZ India की ऊर्जा सलाहकार सुश्री भाग्यश्री नायर, BRPL के सहायक उपाध्यक्ष श्री अविनाश कुमार, PuVVNL के निदेशक (तकनीकी) श्री जितेंद्र नलवाया, ग्लोबल एनर्जी अलायंस फॉर पीपल एंड प्लैनेट के मैनेजर श्री निर्मल शाजू, IESA के निदेशक श्री चेतन पाठक, तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड के श्री सी. नल्लाशिवन तथा SECI के जनरल मैनेजर श्री रतन सिंह ने वक्ता के रूप में भाग लिया। सत्र का संचालन TERI के वरिष्ठ निदेशक श्री ए. के. सक्सेना ने किया। अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया तथा इंडिया स्मार्ट ग्रिड फोरम की मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुश्री रीना सूरी ने अतिथियों एवं विशेषज्ञों को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।

BESS से विद्युत वितरण प्रणाली होगी अधिक सक्षम एवं विश्वसनीय—
सत्र में बताया गया कि बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियां दिन में अतिरिक्त सौर ऊर्जा का भंडारण कर शाम के समय अधिक मांग के दौरान उसका उपयोग सुनिश्चित कर सकती हैं। इससे पीक डिमांड प्रबंधन, विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार, नेटवर्क विस्तार की आवश्यकता में कमी तथा रूफटॉप सोलर और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के बेहतर एकीकरण में मदद मिलेगी। राष्ट्रीय विद्युत योजना-2023 के अनुसार, देश की कुल ऊर्जा भंडारण आवश्यकता वर्ष 2026-27 में 82.37 गीगावाट-घंटा से बढ़कर वर्ष 2031-32 तक 411.4 गीगावाट-घंटा होने का अनुमान है। वर्ष 2047 तक यह आवश्यकता लगभग 1,840 गीगावाट-घंटा तक पहुंच सकती है। सत्र में टाटा पावर-DDL, BRPL, गुजरात और महाराष्ट्र की चयनित परियोजनाओं के माध्यम से तकनीकी समाधानों, लागत, संचालन और व्यावसायिक मॉडल पर भी चर्चा की गई।

ऊर्जा भंडारण के व्यापक क्रियान्वयन पर जोर—
विशेषज्ञों ने कहा कि बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को विद्युत वितरण की दीर्घकालिक योजना और ग्रिड आधुनिकीकरण का अभिन्न हिस्सा बनाना आवश्यक है। इस दिशा में GIZ द्वारा भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सहयोग से संचालित ‘स्टोरेज फॉर रिन्यूएबल एनर्जी इंटीग्रेशन इन इंडिया’ (StoREin) परियोजना के अंतर्गत TERI सहित विभिन्न संस्थान विद्युत वितरण कंपनियों की क्षमता निर्माण और नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण के लिए कार्य कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने उपयुक्त तकनीकी विन्यास, परियोजनाओं के आकार एवं स्थान, वित्तपोषण, नियामकीय व्यवस्थाओं और प्रभावी व्यावसायिक मॉडल विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा भंडारण से विद्युत ग्रिड की स्थिरता बढ़ाने के साथ अस्पतालों, जलापूर्ति प्रणालियों और अन्य आवश्यक सेवाओं को बिजली बाधित होने की स्थिति में सहायता मिल सकती है।

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