झालावाड़। जिले में रबी फसलों की बुवाई को देखते हुए किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हैं। जिले में आज दिनांक तक 23,076 मेट्रिक टन यूरिया, 5,764 मेट्रिक टन डीएपी, 5,197 मेट्रिक टन एनपीके कॉम्प्लेक्स तथा 27,907 मेट्रिक टन सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त चम्बल फर्टिलाइजर्स एवं केमिकल्स लिमिटेड द्वारा प्रतिदिन 300 से 400 मेट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति भी की जा रही है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को निर्धारित दरों पर गुणवत्तायुक्त उर्वरक उपलब्ध कराने तथा खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए प्रभावी निगरानी की जा रही है।
संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) डॉ. नरेश कुमार शर्मा ने बताया कि जिले में रबी फसलों की बुवाई प्रारम्भ हो गई है। इस वर्ष जिले में लगभग 3.35 लाख से 3.40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों की बुवाई होने की संभावना है। जिले में सरसों, लहसुन, धनिया, चना एवं अन्य फसलों की अच्छी पैदावार के लिए संतुलित उर्वरक प्रबंधन आवश्यक है।
सरसों, लहसुन, धनिया एवं चना के लिए सिंगल सुपर फॉस्फेट उपयोगी
संयुक्त निदेशक कृषि डॉ. नरेश कुमार शर्मा ने बताया कि सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) सरसों, लहसुन, धनिया एवं चना जैसी फसलों के लिए अत्यंत उपयोगी है। यह बहुपोषकीय उर्वरक है, जिसमें लगभग 16 प्रतिशत फॉस्फोरस, 11 प्रतिशत सल्फर तथा 18 से 21 प्रतिशत कैल्शियम पाया जाता है। इसके उपयोग से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं तथा दाल वाली फसलों में तेल की मात्रा, विशेष गुणों एवं उत्पादन गुणवत्ता में सुधार में सहायता मिलती है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष जिले में लगभग 60 हजार हेक्टेयर में सरसों, 31 हजार हेक्टेयर में चना, 20 हजार हेक्टेयर में लहसुन तथा 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धनिया की बुवाई संभावित है। इन फसलों में सल्फर, कैल्शियम, जिंक एवं बोरॉन जैसे पोषक तत्वों की आवश्यकता अधिक होती है। संतुलित उर्वरक उपयोग से उत्पादन एवं गुणवत्ता में वृद्धि होती है।
लंबे समय तक डीएपी के असंतुलित उपयोग से मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन प्रभावित
डॉ. शर्मा ने बताया कि लंबे समय तक केवल डीएपी का अत्यधिक उपयोग करने से मिट्टी में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस एवं पोटाश का संतुलन प्रभावित हो सकता है। साथ ही कैल्शियम, मैग्नीशियम, सल्फर, जिंक एवं बोरॉन जैसे आवश्यक सूक्ष्म एवं द्वितीयक पोषक तत्वों की कमी भी बढ़ सकती है। इससे मृदा स्वास्थ्य, फसल उत्पादन एवं उपज की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे मिट्टी की आवश्यकता एवं फसल के अनुरूप संतुलित उर्वरकों का उपयोग करें। सिंगल सुपर फॉस्फेट के प्रयोग से फसलों को फॉस्फोरस के साथ सल्फर एवं कैल्शियम जैसे पोषक तत्व भी प्राप्त होते हैं।
खाद की कालाबाजारी पर डिजिटल निगरानी, निर्धारित दर से अधिक वसूली पर होगी कार्रवाई
कृषि विभाग द्वारा उर्वरकों की उपलब्धता एवं बिक्री व्यवस्था पर डिजिटल निगरानी की जा रही है। इसके लिए राज किसान सुविधा मोबाइल एप के माध्यम से उर्वरक, बीज एवं कीटनाशक विक्रेताओं के यहां ऑनलाइन निरीक्षण की कार्रवाई की जा रही है। जिले की सभी तहसीलों में लगभग 349 उर्वरक एवं कीटनाशक विक्रेताओं के पास यूरिया, डीएपी सहित अन्य उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
डिजिटल निगरानी का उद्देश्य दुकानों पर उर्वरकों की वास्तविक उपलब्धता सुनिश्चित करना, किसानों को निर्धारित दरों पर उर्वरक उपलब्ध कराना तथा खाद की कालाबाजारी पर रोक लगाना है। किसानों को उर्वरक खरीदते समय निर्धारित मूल्य पर ही भुगतान करने तथा अनियमितता की स्थिति में संबंधित अधिकारियों को शिकायत करने की सलाह दी गई है।
जिले से बाहर उर्वरक बिक्री पर प्रतिबंध, अनियमितता पर होगी कार्रवाई
जिले के किसानों को पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आदान विक्रेताओं को जिले से बाहर उर्वरक विक्रय नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी विक्रेता द्वारा जिले से बाहर उर्वरक की बिक्री की जाती है अथवा उर्वरक मूवमेंट आदेश, 1973 के प्रावधानों का उल्लंघन किया जाता है, तो संबंधित विक्रेता के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के तहत कार्रवाई के साथ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी।
राजस्थान में सिंगल सुपर फॉस्फेट की खपत में झालावाड़ अग्रणी
संयुक्त निदेशक कृषि ने बताया कि राजस्थान में सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) के उपयोग में झालावाड़ जिला अग्रणी जिलों में शामिल है। राज्य में प्रतिवर्ष औसतन 65 हजार से 75 हजार मेट्रिक टन एसएसपी का उपयोग किया जाता है। जिले में इसकी उपलब्धता एवं उपयोग किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। एसएसपी के संतुलित उपयोग से मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने तथा फसलों की उत्पादकता एवं गुणवत्ता बढ़ाने में सहायता मिलती है।
किसानों की सुविधा के लिए जिला स्तरीय कंट्रोल रूम स्थापित
किसानों को गुणवत्तायुक्त उर्वरक निर्धारित दरों पर उपलब्ध कराने, उर्वरकों की अनावश्यक टैगिंग रोकने तथा शिकायतों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग द्वारा जिला स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। किसानों से अपील की गई है कि उर्वरक संबंधी किसी भी समस्या की सूचना कंट्रोल रूम को दें, ताकि शिकायतों का शीघ्र निस्तारण किया जा सके। जिले में उर्वरकों की उपलब्धता पर लगातार निगरानी रखी जा रही है तथा पारदर्शी व्यवस्था के तहत गुणवत्तायुक्त उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उर्वरक संबंधी शिकायत हेतु कृषि अधिकारी घनश्याम शर्मा मोबाइल नंबर 8949958294 एवं महेंद्र शर्मा मोबाइल नंबर 9929044344 पर सम्पर्क किया जा सकता है।


