बाल मुकुन्द ओझा
लिव इन रिलेशनशिप का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ रहा है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में रविवार को एक शादीशुदा व्यक्ति के साथ लिव इन में रह रही महिला का शव बरामद होने और लिव इन पार्टनर के फरार होने जैसी घटनाएं देशभर में घटित हो रही है। पुलिस को आशंका है कि महिला की हत्या की गई है। इसी भांति लखनऊ के बहुचर्चित शिवा शर्मा मौत के प्रकरण में भी मां रंजना शर्मा ने आरोप लगाया है कि उनका बेटा श्रद्धा दुबे के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में था और श्रद्धा व उसके साथियों द्वारा उसे लगातार शारीरिक हिंसा, धमकियों और ब्लैककमेल का शिकार बनाया जा रहा था। शिवा शर्मा की मौत के चर्चित मामले में हाल ही मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे, उनकी बहन रश्मि और ड्राइवर दानिश को महाराष्ट्र के नागपुर से गिरफ्तार किया गया है। लिव इन पर मीडिया में तरह तरह की खबरे लगातार छपती रहती है। इस सम्बन्ध में विभिन्न सर्वे रिपोर्ट और अध्ययन के आंकड़े बेबाकी से जाहिर कर रहे है सावधानी हटी तो दुर्घटना घटी। ऐसा लगता है जैसे लिव इन रिलेशनशिप की कहानी शारीरिक शोषण से बलात्कार पर जाकर खत्म हो रही है। यहां हम बात कर रहे है इसी साल इलाहाबाद हाई कोर्ट के लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर दिए एक अहम फैसले की जिसमें कहा गया कि बालिगों का सहमति से लिव-इन में रहना अपराध नहीं है और वे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हकदार सुरक्षा के हकदार हैं। हालांकि, बिना तलाक लिए शादीशुदा व्यक्ति का दूसरे साथी के साथ लिव-इन में रहना और सुरक्षा मांगना, इस पर कोर्ट का रुख़ सख्त है। लिव-इन रिलेशनशिप में सबसे बड़ा सवाल महिलाओं की सुरक्षा को लेकर उठता है। भारत में घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं को भी सुरक्षा दी गई है। लेकिन महिला को यह साबित करना होगा कि रिश्ता marriage-like था। यही कारण है कि कई मामलों में महिलाओं को अपने अधिकार साबित करने में मुश्किल आती है।
लिव इन रिलेशन के कई प्रकरणों में न्यायालय ने भी अपनी राय व्यक्त की है। कई साल लिव इन में रहने के बाद कोर्ट का दरवाज़ा भी खटखटाया जा रहा है। कहीं लड़की द्वारा लड़के पर रेप के आरोप भी लगाए जा रहे है। लिव इन रिलेशनशिप का मतलब है जहां एक लड़का और लड़की बिना शादी के एक-दूसरे के साथ एक ही घर में रहते हैं। दोनों बिना शादी के किसी पति-पत्नी के तरह ही रहते हों। इस मुद्दे को लेकर पिछले कुछ सालों से देश में बहस भी छिड़ी हुई है। कुछ लोग इसे जायज कहते हैं, तो कुछ इसे नाजायज। लिव-इन रिलेशनशिप का चलन भले ही शुरू हो चुका है। लेकिन भारत जैसे देश में लिव-इन रिलेशनशिप को अभी अच्छी नजर से नहीं देखा जाता हैं। हम खुद को कितना ही आधुनिक समझे मगर आज भी हमारे देश में लिव-इन रिलेशनशिप को बुरी नजर से देखा जाता हैं। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के अनुसार, दो बालिग लड़का व लड़की शादी किए बगैर भी अपनी मर्जी से पारिवारिक-वैवाहिक जीवन जी सकते हैं। लिव इन रिश्ते की कानूनी मान्यता के अनुसार दोनों पार्टनर के बीच यौन संबंध की पूरी आजादी है। अगर रिश्ते में रहने के दौरान बच्चा पैदा होता है, तो रिश्ते को लिव इन माना जाएगा। यौन संबंध बनाने और बच्चे पैदा करना दोनों की इच्छा पर निर्भर करता है। लिव इन विवादों से भरा एक अनूठा रिश्ता है जिसमे शादी की पुरानी मान्यता को दरकिनार करते हुए जोड़े साथ रहते है और ठीक उसी तरह से अपनी जिम्मेदारी एक दूसरे के लिए निभाते है।
पाश्चात्य कल्चर को फॉलो करते हुए भारत में भी लिव-इन रिलेशनशपि आम हो गया है महानगरों में कई लोग शादी से पहले लिव-इन में रहते हैं। बड़े शहरों में लिव इन रिलेशन का कॉन्सेप्ट युवाओं को बहुत भा रहा है, मगर ऐसे रिश्तों का अंत सुखद ही हो जरूरी नहीं है। पाश्चात्य देशों की नकल पर बना एक विवादास्पद लेकिन आधुनिक लाइफ जीने के लिए यह एक अनूठा और दिलचस्प रिश्ता है जिसमें शादी की पुरानी मान्यता को दरकिनार करते हुए जोड़े साथ रहते है। लिव-इन रिलेशनशिप की शुरुआत महानगरों के शिक्षित और आर्थिक तौर पर स्वतंत्र ऐसे लोगों ने की थी जो विवाह संस्था की जकड़ से छुटकारा चाहते थे और उसी तरह से अपनी जिम्मेदारी एक दूसरे के लिए निभाते है जैसे वो शादी करने के बाद करते। इन संबंधों में खास बात यह है की वे किसी नैतिक दवाब का सामना नहीं करते। ऐसे लोग जब चाहे तभी एक दुसरे से अलग हो सकते है।
विवाह को हमारे देश भारत में धार्मिक भावना से जोड़कर देखते है जिसमे अपने जीवनसाथी के साथ जीवनभर के लिए वफादार रहने का प्रण लेते है और इसे इतना पवित्र और खास समझे जाने के पीछे महिला की सुरक्षा निहित है। लिव इन की खिलाफत करने वाले कहते है ज्यादातर लिविंग रिलेशन उन युवाओं में पाए गए हैं जो घर से दूर रह रहे हैं। उनके परिवार वालों को इस रिश्ते की कोई खबर नहीं होती। लिविंग रिलेशन में रह रहे लड़के-लड़कियां अपने मां-बाप या घरवालों से अपने रिश्ते को छुपाकर रखते हैं। जब रिश्ता बिगाड़ की श्रेणी में आ जाता है तब इसका भांडा फूटता है।

लिव इन रिलेशन खुशियों का खजाना या जोखिम भरा फैसला
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