नई दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से अलग होने के बाद पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला के इस्तीफे को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। इनमें सबसे बड़ी चर्चा यह थी कि क्या शहजाद ने अमित मालवीय की जगह बीजेपी आईटी सेल और सोशल मीडिया का प्रमुख न बनाए जाने से नाराज होकर पार्टी छोड़ी है? अब खुद शहजाद पूनावाला ने इन सभी कयासों पर विराम लगाते हुए तारीखों का ऐसा हिसाब सामने रखा है, जिसने सारी तस्वीर साफ कर दी है। वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त के ‘मोजो स्टोरी’ पॉडकास्ट में एक खास बातचीत के दौरान पूनावाला ने इन सवालों का खुलकर जवाब दिया। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या यह कोई ‘सल्क रेजिग्नेशन’ यानी नाराजगी भरा इस्तीफा था और क्या वे अमित मालवीय के पद या किसी बड़ी भूमिका की उम्मीद कर रहे थे, तो शहजाद ने इस थ्योरी को सिरे से खारिज कर दिया।
मुझे कैसे पता होगा कि… पूनावाला ने रखी अपनी बात
पॉडकास्ट में तारीखों का हिसाब देते हुए शहजाद ने सस्पेंस खत्म किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपना पहला इस्तीफा 30 जुलाई को ही पार्टी नेतृत्व को सौंप दिया था, जबकि बीजेपी ने अपने संगठन (आईटी और सोशल मीडिया टीम) में बदलावों की आधिकारिक घोषणा 17 अगस्त को दोपहर करीब 3-4 बजे की थी। पूनावाला ने कहा, “मुझे 30 जुलाई को कैसे पता होगा कि 17 अगस्त को क्या होने वाला है? जब तक कि कोई यह न मान ले कि मैं उस लीग का हिस्सा हूं जिसे पहले से पता होता है कि संगठन में क्या बदलाव हो रहे हैं और उसमें मेरा नाम है या नहीं।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे कभी पद के पीछे नहीं भागते। उनका कहना था, “मैं पदों के पीछे नहीं, बल्कि विजन, मिशन और महत्वाकांक्षा के लिए काम करता हूं।”
जीवनयापन और किराए के लिए छोड़ी भाजपा
शहजाद ने साफ किया कि उनके इस्तीफे का कारण कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा या पद न मिलना नहीं था, बल्कि इसके पीछे उनके सामने खड़ी गंभीर आर्थिक और व्यक्तिगत चुनौतियां थीं। जीवनयापन और किराए जैसी बुनियादी जरूरतों के संघर्ष के कारण उन्हें राजनीति से ब्रेक लेकर अपना करियर निजी क्षेत्र (प्राइवेट सेक्टर) में दोबारा शुरू करने का कठिन फैसला लेना पड़ा।
पर्सनल इनकम टैक्स खत्म करना चाहते हैं शहजाद पूनावाला
पॉडकास्ट में अपनी बात रखते हुए शहजाद ने केवल अपने इस्तीफे की वजहों पर ही सफाई नहीं दी, बल्कि मिडिल क्लास से जुड़े एक बेहद अहम मुद्दे पर भी बेबाकी से अपनी राय रखी। पद छोड़ने के बाद उनके वायरल हुए “ऐक्स द टैक्स” अभियान का जिक्र करते हुए उन्होंने व्यक्तिगत आयकर को पूरी तरह से खत्म करने की जोरदार वकालत की। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में सबसे ज्यादा नुकसान एक ईमानदार करदाता को उठाना पड़ता है, जबकि अमीर लोग कॉर्पोरेट टैक्स और अन्य माध्यमों का सहारा लेकर अपना पैसा बचा लेते हैं।
शहजाद पूनावाला ने बयां किया दर्द
पूनावाला ने कहा कि देश को व्यक्तिगत आयकर से लगभग 14-15 लाख करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है, जो हमारी जीडीपी का बमुश्किल 2.5 से 3 प्रतिशत है। उनका मानना है कि यह एक अकुशल प्रणाली है जो काले धन को बढ़ावा देती है। शहजाद ने दर्द बयां करते हुए कहा कि एक आम ईमानदार व्यक्ति कई तरह के अप्रत्यक्ष कर (GST, राज्य और स्थानीय कर) देने के बावजूद व्यक्तिगत आयकर का बोझ भी उठाता है, लेकिन बदले में उसे उस स्तर का बुनियादी ढांचा या सुविधाएं नहीं मिलतीं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका यह अभियान केवल मौजूदा बीजेपी सरकार की आलोचना नहीं है, बल्कि पूरी कर व्यवस्था में एक बड़े सुधार की मांग है। शहजाद का दावा है कि अगर सरकार व्यक्तिगत आयकर हटा देती है, तो लोगों के हाथ में खर्च करने के लिए ज्यादा पैसा बचेगा। इससे बाजार में भारी मांग पैदा होगी, जो अर्थव्यवस्था और जीडीपी को इतना विस्तार देगी कि करों के रूप में छोड़े गए राजस्व की भरपाई पहले ही साल में हो जाएगी। उनका यह बेबाक आर्थिक नजरिया सोशल मीडिया पर वेतनभोगी वर्ग के बीच काफी चर्चा बटोर रहा है।



