जयपुर। मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने प्रदेश में तृतीयक स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने के लिए सभी संबंधित चिकित्सा संस्थानों में ऑपरेशन थियेटरों को चरणबद्ध रूप से मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मरीजों को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध करवाने के लिए चिकित्सा संस्थानों में उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग और आवश्यक सुविधाओं की क्रियाशीलता सुनिश्चित करना जरूरी है। मुख्य सचिव सोमवार को स्वास्थ्य भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित समीक्षा बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन, आरजीएचएस सहित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं एवं कार्यक्रमों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों सहित अन्य चिकित्सा संस्थानों में स्थापित नवजात शिशु देखभाल इकाइयों की शत-प्रतिशत क्रियाशीलता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को इन इकाइयों की नियमित मॉनिटरिंग कर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा। श्री श्रीनिवास ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए कहा की स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार मॉनिटरिंग करने से मातृ मृत्यु दर में सुधार हुआ है,उन्होंने कहा कि इस संबंध में जारी गाइडलाइन की प्रभावी पालना के साथ इसकी नियमित एवं गहन मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने प्रसव सुविधा वाले सभी चिकित्सा संस्थानों में ऑटोक्लेव मशीन की उपलब्धता के साथ उसकी नियमित क्रियाशीलता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अस्पताल अधीक्षकों को उपलब्ध सेवाओं के अनुरूप बेड ऑक्यूपेंसी रेट की नियमित समीक्षा करने के लिए भी कहा। मुख्य सचिव ने परिवार कल्याण, स्तनपान एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर आमजन को जागरूक करने के लिए अस्पतालों में प्रभावी प्रचार-प्रसार सामग्री प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। उन्होंने चिकित्सा संस्थानों में प्रसव भार के अनुरूप स्त्री रोग विशेषज्ञों एवं शिशु रोग विशेषज्ञों की उपलब्धता एवं अनुपात की भी समीक्षा करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा संस्थानों में स्थापित प्रत्येक यूनिट का स्पष्ट रोस्टर तैयार किया जाए और उसकी सख्ती से पालना सुनिश्चित की जाए, ताकि सेवाओं के संचालन में किसी तरह की कमी न रहे। मुख्य सचिव ने अस्पतालों में प्रसूताओं की सुविधा के लिए शुरू किए गए प्रसव सखी हेल्प डेस्क कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रसूताओं एवं उनके परिजनों को बेहतर मार्गदर्शन उपलब्ध करवाने के लिए इस व्यवस्था में आवश्यक सुधार किए जाएं। उन्होंने उप स्वास्थ्य केन्द्र से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र स्तर तक आने वाले मरीजों को आवश्यकता होने पर विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध करवाने के लिए टेली-कंसल्टेशन का अधिक प्रभावी उपयोग करने के निर्देश दिए। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी एवं पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी यूनिट्स को पूर्ण रूप से क्रियाशील करने पर जोर दिया। उन्होंने एनेस्थीसियोलॉजी, स्त्री एवं प्रसूति रोग तथा शिशु रोग विभागों के संगठनात्मक ढांचे की समीक्षा कर आवश्यकतानुसार रिक्त पदों को भरने के निर्देश दिए। प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती गायत्री राठौड़ ने बताया कि आरजीएचएस योजना में पारदर्शिता एवं वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम लगातार किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि आरजीएचएस के तहत स्वयं का फार्मेसी बिलिंग सिस्टम विकसित किया जा रहा है, जिसका पायलट उपयोग शुरू हो चुका है और इसे अगले माह तक पूर्ण रूप से लागू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि दवाइयों पर होने वाले अतिरिक्त व्यय को नियंत्रित करने के लिए प्राइस बेंचमार्क भी स्थापित किया गया है। इससे दवाइयों की खरीद एवं भुगतान प्रक्रिया में बेहतर वित्तीय नियंत्रण सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। बैठक में मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. जोगाराम, प्रबंध निदेशक आरएमएससीएल श्री पुखराज सैन, मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजस्थान हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी श्री हरजीलाल अटल, निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर सहित संबंधित अधिकारीगण मौजूद रहे।

चिकित्सा संस्थानों में ओटी को मॉड्यूलर ओटी के रूप में विकसित करें —सभी नवजात शिशु देखभाल इकाइयों की क्रियाशीलता सुनिश्चित करने के निर्देश
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