स्वास्थ्य, सौन्दर्य और सेहत का अनमोल स्रोत है नारियल

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-बाल मुकुंद ओझा
विश्व नारियल दिवस हर साल 2 सितंबर को मनाया जाता है। इस वर्ष इसकी थीम “अनिश्चितता के समय में नारियल: भोजन, ऊर्जा और आजीविका की सुरक्षा” रखी गई है। इस दिवस का उद्देश्य लोगों को नारियल के महत्व और उपयोग के बारे में जागरूक करना और नारियल के उद्योग को कच्चे माल के रूप में उपयोग किए जाने को प्रोत्साहन देना है। इस दिवस को एशियाई प्रशांत नारियल समुदाय के गठन की याद में मनाया जाता है। यह एक संगठन है, जिसमें 18 सदस्य हैं। भारत इसका संस्थापक सदस्य है।
नारियल हर तरह से हमारे लिए उपयोगी है। भारत के घर घर में नारियल मिल जायेगा। नारियल का महत्व केवल पूजा पाठ ही नहीं बल्कि पौष्टिकता के साथ ही स्वास्थय लाभ के लिए होता है। नारियल के पेड़ को कल्पवृक्ष भी कहा जाता है। इसका पौधा एक बार लगाने के बाद 80 साल से भी ज़्यादा समय तक फल देता है। इसके पेड़ की ख़ासियत है कि इसका हर हिस्सा उपयोगी है। नारियल की खेती किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसका फल जब कच्चा होता है तो उसे नारियल पानी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। पक जाने पर पूजा-पाठ से लेकर मिठाई और कई व्यंजनों में इसका इस्तेमाल होता है। नारियल एक ऐसा फल है जिसके प्रत्येक भाग को हम अलग-अलग तरह से उपयोग कर सकते हैं। नारियल या नारियल का तेल सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है। नारियल खाने से जहां आप कई रोगों से बचे रहते हैं, तो वहीं नारियल तेल बालों और स्किन की खूबसूरती बढ़ाने में काफी मददगार होता है। नारियल की चटनी, नारियल की बर्फी हमारे यहाँ बहुतायत से बनती है। यह एक ऐसा फल है जो कि न केवल सारे वर्ष उपलब्ध रहता है बल्कि जरूरत पड़ने पर हमारी भूख-प्यास भी मिटा देता है। यह श्रीफल के रूप में प्रयोग किया जाता है। देवी देवताओं और प्रत्येक शुभ कार्यों में हम नारियल का उपयोग करते है, इसी से पत्ता चलता है हमारे जीवन में नारियल का कितना महत्त्व है। पॉलिथीन का विकल्प नारियल हो सकता है। पॉलिथीन को हटाकर हम नारियल की जटा से बने थैलों का उपयोग कर सकते हैं। इससे प्लास्टिक कचरे से हम मुक्त हो सकते है।
भारत विश्व में नारियल गरी के उत्पादन और उत्पादकता में नंबर एक स्थान पर है। यह मुख्य रूप से 12 तटीय राज्यों में उगाया जाता है। देश के दक्षिणी राज्यों केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में देश के 90 फीसद नारियल की सघन खेती की जाती है। भारत वैश्विक स्तर पर नारियल उत्पादन में 31.24 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर है वहीं, नारियल की खेती के कुल क्षेत्रफल के मामले में भारत 17.90 प्रतिशत भागीदारी के साथ दुनिया में तीसरे स्थान पर है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने 2024-25 में करीब 2.19 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र से 20,301 मिलियन से अधिक नारियल का उत्पादन किया। वर्ष 2024-25 के दौरान करीब 209.24 लाख रुपये की सहायता का इस्तेमाल 2,979 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र को नारियल की खेती के तहत लाने के लिए किया गया। भारत का नारियल निर्यात अब पारंपरिक उत्पादों तक सीमित नहीं है। देश के निर्यात पोर्टफोलियो में वर्जिन नारियल तेल, नारियल दूध और एक्टिवेटेड कार्बन जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ रही है । एक्टिवेटेड कार्बन का 2025-26 में करीब 1.8 लाख टन निर्यात हुआ और इसका मूल्य लगभग ₹4,688.89 करोड़ रहा। नारियल जटा को छोड़कर नारियल उत्पादों के कुल निर्यात मूल्य में इसकी हिस्सेदारी करीब 67 प्रतिशत रही। यानी जिस नारियल के खोल को अक्सर बेकार समझ लिया जाता है, वही विदेशों में एक महत्वपूर्ण औद्योगिक उत्पाद बनकर भारत के लिए बड़ी कमाई का ज़रिया बन रहा है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत का नारियल उत्पादन अब सिर्फ खेत खलिहान तक सीमित नहीं रह गया है। यह प्रोसेसिंग और निर्यात के क्षेत्र में भी तेजी से विकसित हो रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में इसके निर्यात का अनुमान ₹7,038.35 करोड़ तक पहुँचने का लगाया जा रहा है। यह 2024-25 के ₹4,349.03 करोड़ के मुकाबले करीब 62 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।
नारियल विकास बोर्ड के मुताबिक, भारत में करीब 3 करोड़ लोग, जिनमें लगभग 1 करोड़ किसान शामिल हैं, नारियल क्षेत्र पर निर्भर हैं। यह नमकीन मिट्टी में समुद्र के किनारे उगाया जाता है। नारियल-पानी पौष्टिक एवं स्वास्थ्यवर्द्धक होता है। गर्मी के मौसम में नारियल-पानी पीकर हम अपनी प्यास बुझाते हैं। जब नारियल पकता है, तो इसमें अंदर से सफेद नारियल का फल प्राप्त होता है। यह पूजा में काम आता है। सफेद नारियल हम कच्चा भी खाते हैं। मिठाई और कई पकवान बनाने में भी इस्तेमाल करते हैं। नारियल के रेशों से गद्दे, थैले तथा और भी कई प्रकार की उपयोगी चीजें बनाई जाती हैं। नारियल का उपयोग धार्मिक कर्मकांडों में भी किया जाता हैं। भारत में इस लिए यह पवित्र माना गया है।
स्वास्थ्य की दृष्टि से नारियल को बहु उपयोगी माना जाता है। विभिन्न बीमारियों के उपचार में नारियल का अहम् योगदान है। नारियल के पानी को पीने से डायरिया, डेंगू, चिकुनगुनिया, जैसी बीमारियों में राहत मिलती है। नारियल पानी पीना काफी लाभदायक होता है। ब्लड प्रेसर सहित कई बीमारियों में नारियल पानी का उपयोग लाभकारी बताया जाता है। नारियल का तेल आपकी सेहत और बालों के लिए फायदेमंद है। इसके तेल में नींबू का रस और गिल्सरीन को मिलाकर लगाने से स्किन की परेशानी दूर हो जाती है।

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