मौसमी बीमारियों को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट—जिलों में 24×7 कंट्रोल रूम सक्रिय रखने के निर्देश

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जयपुर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के निर्देशन में प्रदेश में मौसमी बीमारियों की स्थिति पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा निरंतर निगरानी रखी जा रही है। प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती गायत्री राठौड़ ने कहा कि प्रदेश में मौसमी बीमारियों की प्रभावी रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए विभाग पूरी तरह अलर्ट है। मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया एवं स्क्रब टाइफस सहित स्वाइन फ्लू पर विशेष निगरानी रखते हुए सभी जिलों में 24×7 कंट्रोल रूम सक्रिय एवं क्रियाशील रखने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि मौसमी बीमारियों की रोकथाम, त्वरित पहचान और समय पर उपचार के लिए फील्ड स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। प्रत्येक स्तर पर रेपिड रेस्पॉन्स टीमों का गठन कर उनकी नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि किसी भी आउटब्रेक की स्थिति में तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जा सके। इस संबंध में निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने मंगलवार को स्वास्थ्य भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित समीक्षा बैठक में मौसमी बीमारियों, टीबी मुक्त भारत अभियान, सेल्फ मॉनिटरिंग एवं चिकित्सा संस्थानों की संचालन प्रक्रिया सहित विभिन्न बिन्दुओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्वाइन फ्लू को देखते हुए विशेष सतर्कता बरती जाए और आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता उपस्वास्थ्य केन्द्र स्तर तक सुनिश्चित की जाए। डॉ. शर्मा ने कहा कि मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए घर-घर सर्वे, एंटी लार्वा, एंटी एडल्ट एवं सोर्स रिडक्शन जैसी गतिविधियां लगातार संचालित की जाएं। इन गतिविधियों की नियमित मॉनिटरिंग के साथ संवेदनशील एवं अधिक प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि अत्यधिक प्रभावित क्षेत्रों में मरीजों के उपचार के लिए अस्पतालों में अलग से बेड आरक्षित रखे जाएं। आवश्यकता के अनुसार मरीजों को आइसोलेट करने तथा व्यक्तिगत सुरक्षा एवं बचाव के उपायों की जानकारी देने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता के लिए आवश्यकतानुसार क्लोरीनेशन की व्यवस्था प्रभावी रखने के निर्देश दिए गए। निदेशक जनस्वास्थ्य ने जिला एवं ब्लॉक स्तर के अधिकारियों के मुख्यालय पर ठहराव को भी महत्वपूर्ण बताते हुए निर्देश दिए कि अधिकारी अपने मुख्यालय पर उपलब्ध रहें, ताकि बीमारी की स्थिति में तत्काल रिस्पॉन्स और फील्ड मॉनिटरिंग सुनिश्चित हो सके। बैठक में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जिलों में संचालित गतिविधियों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। डॉ. शर्मा ने जिलावार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों तथा जिला टीबी अधिकारियों से फीडबैक लिया और एक्स-रे एवं सीबी नॉट मशीनों की उपयोगिता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि उपलब्ध मशीनों एवं अन्य संसाधनों का अधिकतम उपयोग करते हुए टीबी की जल्द पहचान, जांच एवं उपचार सुनिश्चित किया जाए। साथ ही चिकित्सा संस्थानों के संचालन में निर्धारित सभी स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल की प्रभावी पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर, निदेशक एड्स डॉ. सुशील कुमार परमार, ओएसडी एनएचएम श्री संतोष गोयल, अतिरिक्त निदेशक अस्पताल प्रशासन डॉ. नरोत्तम शर्मा सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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