महिलाओं में बढ़ता तंबाकू सेवन नई पीढ़ी और समाज के लिए गंभीर चेतावनी

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देश में तंबाकू सेवन को लेकर सामने आए ताजा आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। विशेष रूप से महिलाओं में तंबाकू सेवन की बढ़ती प्रवृत्ति समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार देश के 13 राज्यों में महिलाओं द्वारा तंबाकू सेवन में वृद्धि दर्ज की गई है। यह स्थिति केवल महिलाओं के स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है बल्कि इसका प्रभाव परिवार बच्चों और आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ता है। जिस समाज में महिलाएं परिवार की आधारशिला मानी जाती हैं वहां उनका किसी भी प्रकार के नशे की ओर बढ़ना सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी कई नई समस्याओं को जन्म देता है।
तंबाकू चाहे किसी भी रूप में लिया जाए वह शरीर के लिए अत्यंत हानिकारक होता है। बीड़ी सिगरेट गुटखा खैनी जर्दा हुक्का और अन्य धूम्रपान या चबाने वाले उत्पादों में मौजूद निकोटिन व्यक्ति को धीरे धीरे इसकी लत का शिकार बना देता है। शुरुआत में यह केवल एक आदत लगती है लेकिन समय के साथ यह व्यसन का रूप ले लेती है और व्यक्ति इसके बिना सामान्य महसूस नहीं कर पाता। महिलाओं में यह समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है क्योंकि उनके शरीर की संरचना और जैविक आवश्यकताएं पुरुषों से अलग होती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि तंबाकू सेवन महिलाओं में कई प्रकार की गंभीर बीमारियों का कारण बनता है। इससे मुंह का कैंसर गले का कैंसर फेफड़ों का कैंसर हृदय रोग उच्च रक्तचाप और श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। लगातार तंबाकू सेवन करने वाली महिलाओं में दांतों और मसूड़ों की समस्याएं भी तेजी से बढ़ती हैं। त्वचा समय से पहले बूढ़ी दिखाई देने लगती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। कई शोधों में यह भी पाया गया है कि तंबाकू का सेवन महिलाओं के हार्मोन संतुलन को प्रभावित करता है जिससे अनेक स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
गर्भवती महिलाओं के लिए तंबाकू का सेवन और भी खतरनाक माना जाता है। यदि गर्भावस्था के दौरान महिला तंबाकू का सेवन करती है तो इसका सीधा असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है। इससे समय से पहले प्रसव कम वजन वाले बच्चों का जन्म और शिशु के शारीरिक तथा मानसिक विकास में बाधा जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। कई मामलों में गर्भपात और नवजात शिशु की मृत्यु का जोखिम भी बढ़ जाता है। इसलिए महिलाओं को यह समझना होगा कि उनका स्वास्थ्य केवल उनका व्यक्तिगत विषय नहीं बल्कि पूरे परिवार और भविष्य की पीढ़ी से जुड़ा हुआ है।
महिलाओं में बढ़ते तंबाकू सेवन का एक बड़ा सामाजिक प्रभाव भी दिखाई देता है। बच्चे अपने माता पिता विशेष रूप से मां के व्यवहार से सबसे अधिक सीखते हैं। यदि घर में मां तंबाकू का सेवन करती है तो बच्चों के मन में यह संदेश जाता है कि यह एक सामान्य और स्वीकार्य व्यवहार है। परिणामस्वरूप किशोरावस्था में बच्चे भी ऐसी आदतों को अपनाने लगते हैं। इस प्रकार एक व्यक्ति की बुरी आदत धीरे धीरे पूरे परिवार और समाज में फैल सकती है।
आज का युवा वर्ग पहले ही अनेक प्रकार के नशों और डिजिटल प्रभावों के बीच घिरा हुआ है। ऐसे में यदि परिवार के भीतर से ही तंबाकू सेवन का उदाहरण मिलता है तो नई पीढ़ी के लिए इससे दूर रहना और कठिन हो जाता है। युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति शिक्षा रोजगार और सामाजिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। इसलिए महिलाओं की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे अपने बच्चों और परिवार के लिए सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करें।
ग्रामीण क्षेत्रों में तंबाकू सेवन की स्थिति अधिक चिंताजनक दिखाई देती है। आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण महिलाओं में तंबाकू सेवन की दर शहरी महिलाओं की तुलना में अधिक है। इसका एक कारण जागरूकता की कमी भी है। कई स्थानों पर आज भी तंबाकू को सामान्य जीवन शैली का हिस्सा माना जाता है और इसके दुष्परिणामों के बारे में पर्याप्त जानकारी लोगों तक नहीं पहुंच पाती। शिक्षा और स्वास्थ्य जागरूकता के माध्यम से इस सोच को बदलना आवश्यक है।
सरकार और स्वास्थ्य संस्थाएं लगातार तंबाकू नियंत्रण के लिए अभियान चला रही हैं। सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर प्रतिबंध चेतावनी संदेश और जनजागरूकता कार्यक्रम इसके उदाहरण हैं। इसके बावजूद यदि महिलाओं में तंबाकू सेवन बढ़ रहा है तो यह संकेत है कि समाज को और अधिक गंभीरता से इस दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है। परिवार विद्यालय सामाजिक संगठन और स्वास्थ्य विभाग मिलकर ही इस चुनौती का सामना कर सकते हैं।
महिलाओं को यह समझना होगा कि तंबाकू किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। तनाव चिंता या सामाजिक दबाव से बचने के लिए यदि कोई तंबाकू का सहारा लेता है तो वह वास्तव में अपने स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहा होता है। स्वस्थ जीवनशैली नियमित व्यायाम संतुलित आहार योग और सकारात्मक सामाजिक संबंध तनाव को दूर करने के कहीं बेहतर और सुरक्षित उपाय हैं।
आज आवश्यकता इस बात की है कि हर महिला अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे और तंबाकू जैसे घातक व्यसन से पूरी तरह दूरी बनाए। जो महिलाएं पहले से इसका सेवन कर रही हैं उन्हें इसे छोड़ने का संकल्प लेना चाहिए। परिवार के सदस्य भी उन्हें सहयोग और प्रोत्साहन दें ताकि वे इस आदत से बाहर निकल सकें। तंबाकू छोड़ना कठिन अवश्य हो सकता है लेकिन असंभव नहीं है। दृढ़ इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन से इस लत पर विजय पाई जा सकती है।
महिलाएं परिवार की धुरी होती हैं। उनका स्वस्थ रहना पूरे समाज के स्वस्थ भविष्य की गारंटी है। यदि महिलाएं तंबाकू से दूर रहेंगी तो न केवल उनका जीवन सुरक्षित होगा बल्कि आने वाली पीढ़ियां भी बेहतर स्वास्थ्य और सकारात्मक संस्कारों के साथ आगे बढ़ सकेंगी। बढ़ते तंबाकू सेवन के आंकड़े एक चेतावनी हैं जिन्हें गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। यह केवल स्वास्थ्य का नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य का भी प्रश्न है। इसलिए हर महिला को स्वयं जागरूक बनना होगा और अपने परिवार तथा समाज को भी तंबाकू मुक्त बनाने की दिशा में आगे आना होगा। तभी एक स्वस्थ सशक्त और जागरूक भारत का निर्माण संभव हो सकेगा।

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