जयपुर। कोटा में प्रसूताओं की मौत, बीकानेर में गंभीर चिकित्सीय लापरवाही और अब जोधपुर में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद 8 महिलाओं की तबीयत बिगड़ना तथा दो की हालत गंभीर होना कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि प्रदेश की जर्जर स्वास्थ्य व्यवस्था पर लगा एक और काला धब्बा है।कभी कोटा, कभी बीकानेर और अब जोधपुर में लगातार सामने आ रही घटनाएं दर्शाती हैं कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। माताओं-बहनों की जान संकट में है और सरकार जवाबदेही तय करने के बजाय अपनी विफलताओं पर पर्दा डालने में जुटी है। प्रदेश की जनता इलाज मांग रही है, जबकि भाजपा सरकार केवल प्रचार और आत्मप्रशंसा में व्यस्त है। जब मरीज अस्पताल जाने से डरने लगें, तब समझ लेना चाहिए कि सरकार अपनी सबसे बुनियादी जिम्मेदारी निभाने में असफल हो चुकी है। रोजाना प्रदेश की जनता आज पूछ रही है “मुख्यमंत्री जी, आखिर क्या-क्या सहेगा यह राजस्थान?” मुख्यमंत्री जी को बताना चाहिए कि अस्पतालों में ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों हो रही हैं? दोषियों पर कार्रवाई कब होगी? और प्रदेश की जनता को सुरक्षित एवं भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं आखिर कब मिलेंगी ?

राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था आईसीयू में, भाजपा सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने में व्यस्त: जूली
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