जयपुर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा कि कोटा में प्रसूताओं की मौत एवं स्वास्थ्य बिगड़ने के प्रकरण में राज्य सरकार बेहद गंभीर है और पूरी संवेदनशीलता, तत्परता एवं निष्पक्षता के साथ मामले की गहन—जांच पड़ताल की जा रही है। दिल्ली एम्स की टीम भी शनिवार को कोटा आकर इस प्रकरण में जांच एवं अनुसंधान करेगी। अंतिम रिपोर्ट प्राप्त होने पर ही इस घटना के सही कारणों तक पहुंचा जा सकेगा। रिपोर्ट के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चिकित्सा मंत्री ने गुरूवार को कोटा में न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल एवं जेके लोन अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लेने, प्रसूताओं एवं उनके परिजनों मुलाकात करने तथा कलेक्ट्रेट सभागार में अधिकारियों के साथ प्रकरण की समीक्षा करने के उपरांत मीडिया के प्रतिनिधियों से संवाद के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह घटना बेहद दु:खुद और दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन राज्य सरकार हर पहलू पर बारीकी से जांच करवा रही है, ताकि वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके, क्योंकि एक साथ इतनी प्रसूताओं को लगभग समान जटिलताएं होना जांच की दृष्टि से एक चुनौतीपूर्ण विषय है। खींवसर ने कहा कि इस प्रकरण में दवाओं की जांच, ओपरेशन थियेटर एवं उपकरणों में संक्रमण तथा इलाज एवं मॉनिटरिंग में लापरवाही तीनों ही दृष्टिकोण से जांच—पड़ताल की जा रही है। दवाओं एवं उपकरणों आदि में संक्रमण की जांच रिपोर्ट प्राप्त होने में दो से तीन सप्ताह का समय लगेगा। इसी दौरान एम्स की टीम भी यहां आकर जांच करेगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रथम दृष्टया प्रसूताओं के इलाज एवं मॉनिटरिंग की प्रक्रिया से जुड़े चिकित्सकों एवं नर्सिंगकर्मियों को निलंबित किया गया है, लेकिन किसी भी निर्दोष को सजा नहीं दी जाएगी और जांच के बाद जो दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा।
जेके लोन एवं एनएमसीएच में हर वर्ष 18 हजार प्रसव, मातृ मृत्यु दर मात्र 0.2
चिकित्सा मंत्री ने कहा कि कोटा के जेके लोन एवं न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल दोनों ही प्रतिष्ठित अस्पताल हैं और यहां हर साल लगभग 14 लाख रोगी ओपीडी में उपचार प्राप्त करते हैं तथा करीब डेढ़ लाख लोग आईपीडी में उपचार लेते हैं। साथ ही, करीब 18 हजार प्रसव हर वर्ष इन दोनों अस्पतालों में होते हैं, जिनमें से करीब 10 हजार प्रसव सिजेरियन होते हैं, लेकिन इलाज की गुणवत्ता और बेहतर प्रबंधन के चलते यहां मातृ मृत्यु दर 0.1 से 0.2 तक रहती है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। इसी प्रकार आरएमएससीएल से आपूर्तित दवाओं की विभिन्न स्तरों पर क्वालिटी टेस्टिंग की जाती है और एक ही प्रकार की दवाएं प्रदेशभर के विभिन्न अस्पतालों में आपूर्ति की जाती है। ऐसे में इन दोनों अस्पतालों में एक साथ कई प्रसूताओं का स्वास्थ्य बिगड़ना चिंता का कारण है और गहन जांच का विषय है। हम इसकी तह तक जाएंगे।
त्वरित एवं बेहतर उपचार से बचाया गया प्रसूताओं का जीवन
खींवसर ने कहा कि राज्य सरकार के संज्ञान में जैसे ही यह प्रकरण आया, पूरी गंभीरता एवं तत्परता दिखाते हुए जयपुर से विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम को उपचार के लिए कोटा भेजा गया। त्वरित एवं बेहतर उपचार मिलने से कई प्रसूताओं का जीवन बचाना संभव हो सका। विभाग ने सभी चिकित्सा अधिकारियों को चिकित्सा संस्थानों में इलाज के सभी प्रोटोकॉल्स एवं एसओपी की सख्ती से पालना करवाने के निर्देश दिए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं हो। साथ ही, अस्पतालों में नियमित स्टरलाइजेशन, दवाओं का प्रोटोकॉल के अनुसार भण्डारण करने तथा सतत मॉनिटरिंग किए जाने के निर्देश दिए हैं।
परिजनों को दिलाया विश्वास — इलाज में नहीं रहेगी कोई कमी
इससे पहले चिकित्सा मंत्री ने न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचकर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया और वहां भर्ती प्रसूताओं एवं उनके परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने परिजनों को विश्वास दिलाया कि राज्य सरकार इलाज को लेकर किसी तरह की कमी नहीं रखेगी। खींवसर ने इसके बाद जेके लोन अस्पताल में भी स्वास्थ्य सेवाओं का निरीक्षण किया और वहां भर्ती प्रसूताओं एवं उनके परिजनों से मिले। इस दौरान कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा, लाडपुरा विधायक मती कल्पना देवी, संभागीय आयुक्त अनिल कुमार अग्रवाल, जिला कलक्टर पीयूष समारिया, कोटा मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. नीलेश जैन, जेके लोन अस्पताल की अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा, न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

चिकित्सा मंत्री कोटा पहुंचकर प्रसूताओं और उनके परिजनों से मिले, अधिकारियों एवं चिकित्सकों के साथ की प्रकरण की विस्तृत समीक्षा
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