चित्रकूट का वो दिव्य शक्तिपीठ, जहां वनवास में भगवान राम ने की थी पूजा, जानिए रहस्य

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उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में रामगिरी शक्तिपीठ स्थित है। जिसको रामगिरी शिवानी शक्तिपीठ के नाम से भी जाना जाता है। बता दें कि यह हिंदू धर्म के पवित्र 51 शक्तिपीठों में से एक है। यह स्थान सिर्फ देवी मां की शक्ति का केंद्र नहीं बल्कि भगवान श्रीराम से भी इस स्थान का गहरा नाता जुड़ा है। भगवान शिव का मोह भंग करने के लिए श्रीहरि ने अपने सुदर्शन चक्र से मां सती के शरीर के कई टुकड़े कर दिए थे। जोकि धरती पर अलग-अलग स्थानों पर गिरे थे। वर्तमान में इन स्थानों पर देवी मां के 51 शक्तिपीठ स्थापित हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको चित्रकूट में स्थित इस चमत्कारी शक्तिपीठ के बारे में बताने जा रहे हैं।

भगवान राम ने की थी पूजा
हिंदू धर्म में देवी सती को समर्पित शक्तिपीठों की विशेष मान्यता होती है। कई धर्म ग्रंथों में इन शक्तिपीठों की संख्या अलग-अलग बताई जाती है। माना जाता है कि जो भी भक्त इन सभी शक्तिपीठों के दर्शन कर लेता है, उनके जीवन के सभी दुख-दर्द दूर हो सकते हैं। चित्रकूट में रामगिरी शक्तिपीठों के संबंध में माना जाता है कि श्रीराम ने अपने वनवास के दौरान इस स्थान पर पूजा-अर्चना की थी। जिस कारण इस स्थान का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है।

रामगिरि शक्तिपीठ
बता दें कि वाल्मीकि रामायण में इस बात का उल्लेख मिलता है कि भगवान श्रीराम, मां सीता और लक्ष्मण जी ने वनवास के साढ़े 11 साल उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में बिताए थे। चित्रकूट में भगवान राम द्वारा स्थित इस शक्तिपीठ की पूजा-अर्चना करने की वजह से इस शक्तिपीठ को रामगिरी शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है। यही वजह है कि यहां पर रामनवमी का पर्व विशेष रूप से मनाया जाता है।हिंदू धर्म वहीं कुछ मान्यताओं के मुताबिक मध्य प्रदेश के मैहर में स्थित शारदा देवी मंदिर को शक्तिपीठ माना जाता है। वहीं कुछ लोग यूपी के चित्रकूट में स्थित शारदा मंदिर को शक्तिपीठ मानते हैं। इसको लेकर अलग-अलग मत देखने को मिलते हैं।

पूरी होती हैं मनोकामनाएं
माना जाता है कि यूपी में मंदाकिनी नदी के पास मां सती का दायां स्तन गिरा था। जिसको शिव पुराण में शिवानी शक्तिपीठ के रूप में वर्णित किया गया है। इस शक्तिपीठ में स्थापित देवी को ‘शिवानी’ के रूप में पूजा जाता है। देवी के साथ भगवान शिव यहां पर भैरव रूप में विराजमान हैं, जिनको ‘चंड’ कहा जाता है। इस शक्तिपीठ को लेकर यह मान्यता चली आ रही है कि इस स्थान के दर्शन मात्र से भक्तों को अपनी विपत्तियों से मुक्ति मिल जाती है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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