भारत की ग्रोथ मजबूत, लेकिन महंगी ऊर्जा बन सकती है खतरा: आईएमएफ

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वॉशिंगटन। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा क‍ि भारत की आर्थिक बढ़त का नजरिया अभी भी काफी मजबूत बना हुआ है, लेकिन अगर वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतें लंबे समय तक बढ़ती रहीं तो इससे अर्थव्यवस्था के लिए खतरा पैदा हो सकता है।

आईएमएफ के एशिया और पैसिफिक विभाग के निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन ने स्प्रिंग मीटिंग्स के दौरान एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा क‍ि हमने अपने अनुमान में 0.1 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी की है।
उन्होंने बताया कि यह सुधार 2026 की शुरुआत में मजबूत आर्थिक गति और टैरिफ में कमी की वजह से किया गया है। उन्होंने कहा क‍ि 2026 में प्रवेश करते समय अर्थव्यवस्था में अच्छा मोमेंटम था। टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिए गए, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला।
आईएमएफ ने यह भी कहा कि भारत को पहले किए गए टैक्स सुधारों का फायदा मिला है, जिसने घरेलू मांग के साथ मिलकर विकास को सहारा दिया है।
हालांकि, श्रीनिवासन ने चेतावनी दी कि मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष से जुड़े खतरे अभी भी बड़े हैं। उन्होंने कहा क‍ि अगर यह संकट लंबा खिंचता है और सिर्फ तेल-गैस तक सीमित न रहकर और फैलता है, तो यह भारत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
भारत, एशिया के कई अन्य देशों की तरह, ऊर्जा के लिए आयात पर काफी निर्भर है। ऐसे में तेल और गैस की बढ़ती कीमतें महंगाई बढ़ा सकती हैं और बाहरी आर्थिक संतुलन बिगाड़ सकती हैं।
नीतियों को लेकर आईएमएफ ने कहा कि भारत ने अब तक समझदारी से वित्तीय नीति अपनाई है। श्रीनिवासन ने कहा कि उन्होंने अपनी फिस्कल पॉलिसी को बहुत संतुलित रखा है। पिछले कुछ सालों में उन्होंने अच्छे बफर बनाए हैं और जरूरत पड़ने पर सहारा देने में सक्षम रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अगर वैश्विक हालात बिगड़ते हैं, तो ये बफर बहुत काम आएंगे। अगर स्थिति और खराब होती है, तो इसका असर सभी देशों पर पड़ेगा, भारत पर भी।
आईएमएफ ने क्षेत्र के लिए अपनी सामान्य सलाह दोहराते हुए कहा कि सरकारों को बाजार के संकेतों को काम करने देना चाहिए, लेकिन कमजोर वर्गों की सुरक्षा भी करनी चाहिए। देशों को कीमतों के संकेतों को काम करने देना चाहिए और जरूरतमंदों को सीमित समय के लिए और सही तरीके से मदद देनी चाहिए।
रेमिटेंस (विदेश से आने वाला पैसा), जो भारत के लिए एक बड़ा सहारा है, उस पर आईएमएफ ने कहा कि यह अभी भी मजबूत बना हुआ है। श्रीनिवासन ने कहा क‍ि रेमिटेंस काफी स्थिर और मजबूत बना हुआ है, और बताया कि भारत और एशिया के दूसरे देशों के ज्यादातर कामगार अभी भी मिडिल ईस्ट में काम कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि वहां पुनर्निर्माण (रीकंस्ट्रक्शन) का काम आगे चलकर रेमिटेंस को बनाए रखने में मदद कर सकता है। मुझे लगता है कि रेमिटेंस आगे भी मजबूत रह सकता है।

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