विकसित राजस्थान : गुप्ता द्वारा दिए गए सुझावों को विकास योजनाओं में शामिल करेंगे-मुख्य सचिव

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भरतपुर विकसित राजस्थान विषय पर उच्च स्तरीय सम्मेलन राज्य के मुख्य सचिव टी श्रीनिवास की अध्यक्षता में आयोजित हुआ। जिसमें समृद्ध भारत अभियान के निदेशक सीताराम गुप्ता ने राज्य के विकास एव समग्र रणनीति के सम्बध में सुझाव प्रस्तुत किए। जिस पर मुख्य सचिव ने गुप्ता द्वारा दिये गये सुझावों को विकसित राजस्थान की योजनाओं एवं दस्ता‌वेजों में शामिल करने का विश्वास दिलाया। मुख्य सचिव को सीता राम गुप्ता द्वारा लिखित इंडिया @ 100 : रिसर्जेंट भारत पुस्तक भेंट की! सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों—आर्थिक विकास, औद्योगिक निवेश, कृषि उन्नयन, ऊर्जा आत्मनिर्भरता, कौशल विकास, रोजगार सृजन, जल प्रबंधन एवं क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने जैसे विषयों—पर गंभीर चर्चा हुई। गुप्ता ने अपने प्रस्तुतीकरण में वर्ष 2047 तक राजस्थान को “विकसित राज्य” बनाने हेतु एक समग्र रणनीति प्रस्तुत की, जिसमें राज्य की अर्थव्यवस्था को बहु-ट्रिलियन डॉलर स्तर तक पहुंचाने हेतु चरणबद्ध विकास मॉडल, कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई एवं वैल्यू एडिशन को बढ़ावा, MSME एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम को सुदृढ़ करना, जल संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए नवाचार आधारित योजनाएं, शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार, क्षेत्रीय असंतुलन को दूर कर संतुलित विकास सुनिश्चित करने पर विस्तृत प्रकाश डाला! मुख्य सचिव टी श्रीनिवास ने गुप्ता द्वारा प्रस्तुत रोडमैप एवं सुझावों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के व्यावहारिक एवं दूरदर्शी विचार राज्य की नीतियों के निर्माण में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे। उन्होंने आश्वस्त किया कि “राजस्थान @2047” पर एक विस्तृत एवं समग्र दस्तावेज तैयार किया जाएगा, जिसमें सीताराम गुप्ता के सुझावों एवं योगदान को शामिल किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, मुख्य सचिव ने यह भी कहाँ कि “राजस्थान @2047” पर एक विशेष सम्मेलन शीघ्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें सीताराम गुप्ता की सक्रिय भागीदारी एवं उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी, ताकि उनके अनुभव एवं विचारों का लाभ व्यापक स्तर पर मिल सके। सम्मेलन में उपस्थित अधिकारियों, नीति-निर्माताओं एवं विशेषज्ञों ने भी इस पहल का स्वागत किया और इसे राजस्थान के दीर्घकालीन एवं समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। यह सम्मेलन “विकसित राजस्थान” के विज़न को साकार करने की दिशा में एक सशक्त पहल के रूप में उभरा है, जो राज्य को वर्ष 2047 तक देश के अग्रणी एवं समृद्ध राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगा।

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