कांग्रेस कभी नहीं करती सामाजिक क्रांति का समर्थन : ललन सिंह

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नई दिल्ली। महिला आरक्षण विधेयक को लेकर संसद में शुक्रवार को चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा कि महिलाओं के साथ न्याय करना बेहद जरूरी है। देश की करीब 50 प्रतिशत आबादी महिलाएं हैं और यदि उनके साथ न्याय नहीं किया गया, तो यह सही नहीं होगा। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए यह विधेयक लाया गया है। ललन सिंह ने कहा कि पंचायत स्तर पर महिलाओं की भागीदारी लंबे समय से सुनिश्चित की गई है, लेकिन अब समय आ गया है कि उन्हें कानून बनाने की प्रक्रिया में भी समान अवसर दिया जाए। उन्होंने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़े, ताकि वे नीतिगत फैसलों में भी अपनी भूमिका निभा सकें। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2023 में लाए गए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार की मंशा साफ है कि संसद में महिलाओं की 33 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित की जाए। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव के बाद जब सदन में 33 प्रतिशत महिला सांसद होंगी, तो वह दृश्य बेहद प्रेरणादायक होगा।
इस दौरान ललन सिंह ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस किसी भी सामाजिक बदलाव का समर्थन नहीं करती। उन्होंने कहा, “आपकी मंशा देश समझ चुका है। कांग्रेस की शीर्ष नेतृत्व यह कहती है कि हम इसे लागू नहीं होने देंगे। यह एक सोची-समझी साजिश है। सामाजिक क्रांति लाने वाले कदमों का कांग्रेस कभी समर्थन नहीं करती।”
वहीं, अपना दल (सोनेलाल) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने भी सरकार के कदमों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जो काम विपक्ष नहीं कर पाया, वह वर्तमान सरकार ने करके दिखाया है। उन्होंने ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा देने समेत सरकार के कई फैसलों का जिक्र किया।
अनुप्रिया पटेल ने विपक्ष से अपील करते हुए कहा कि जब चुनाव हों, तो ओबीसी महिलाओं को टिकट देने में कंजूसी न करें। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी में ओबीसी महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और अन्य दलों को भी ऐसा करना चाहिए। उन्होंने सभी दलों से मिलकर इस विधेयक को पारित करने की अपील करते हुए इसे पुण्य का काम बताया।

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