जयपुर। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने राज्य सरकार के बजट-2025 पर प्रतिक्रया देते हुए इसे विकासोन्मुखी और समावेशी विकास का आधार बताते हुए ऐतिहासिक बजट बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विकसित भारत-2047 की परिकल्पना को मूर्तरूप देने की दिशा में यह बजट बड़ा कदम साबित होगा। गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में वित्त मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी द्वारा प्रस्तुत बजट में अल्प आय वर्ग के बुजुर्ग व्यक्तियों, विधवाओं, एकल नारियों, दिव्यांग व्यक्तियों तथा लघु एवं सीमान्त कृषकों को देय पेंशन को बढ़ाकर एक हजार 250 रुपये प्रतिमाह किए जाने का स्वागत किया।
उन्होने स्वयंसिद्धा आश्रमों का दायरा बढ़ाकर 10 जिलों में 50 बेड क्षमता के आश्रम विकसित करने, एक लाख दिव्यांगजनों को 20 हजार रुपये तक के कृत्रिम अंग और उपकरणों के लिए 150 करोड़ रुपये का व्यय करने, विमुक्त, घुमंतू और अर्द्ध-घुमंतू समुदायों के लिए दादूदयाल घुमन्तू सशक्तीकरण योजना’ को भी समाज के लिए अभूतपूर्व योजना बताया। गहलोत ने राजकीय, अनुदानित, निजी जनसहभागिता योजनान्तर्गत वंचित वर्गों, महिलाओं, बुजुर्गों एवं दिव्यांगों के लिए संचालित आवासीय संस्थानों का मैस भत्ता बढ़ाकर 3 हजार 250 (तीन हजार दो सौ पचास) रुपये प्रति आवासी प्रतिमाह करने का भी स्वागत किया।
गहलोत ने कहा कि बजट में सामाजिक न्याय, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, पानी, उद्योग, कृषि, आधारभूत ढांचे, पर्यटन सहित सभी क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं, जो न केवल प्रदेश के विकास को गति देंगी, बल्कि विकसित राजस्थान के हमारे संकल्प को भी साकार करेंगी। उन्होंने कहा कि विरासत और विकास के बेहतर समन्वय की सोच के साथ लाया गया यह बजट जन उम्मीदों को पूरा करने वाला है।सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने कहा कि समाज के हर वर्ग को ध्यान में रखते हुए पेश किए गए इस बजट से राजस्थान विकसित राज्य की श्रेणी में अग्रसर होगा। राज्य सरकार का बजट अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान लाने वाला है।


