1893 में महज एक छोटी रेल लाइन से शुरू हुआ विशाखापट्टनम का सफर आज भारतीय रेलवे के सबसे लाभदायक और तकनीकी रूप से उन्नत अध्यायों में से एक बन चुका है। हाल ही में पीआईबी (PIB) जयपुर के मीडिया प्रतिनिधिमंडल से बात करते हुए डीआरएम ललित बोहरा ने मंडल के ऐतिहासिक पुनर्गठन और भावी योजनाओं की जानकारी दी। वर्ष 2019 में घोषित दक्षिण तट रेलवे के तहत 1 जून 2026 से प्रभावी हुए पुनर्गठन के बाद, विशाखापट्टनम मंडल अब नए रूप में आधुनिक रेल सेवाओं का नेतृत्व कर रहा है। सालाना ₹11,000 करोड़ से अधिक का राजस्व और 50 मिलियन टन माल ढुलाई दर्ज करने वाला यह क्षेत्र हमेशा से रेल अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहा है।
स्टेशन के ₹800 करोड़ के महाकाय पुनर्विकास प्रोजेक्ट के तहत जुलाई 2026 में स्वीकृत ₹299 करोड़ की कोचिंग यार्ड रिमॉडलिंग योजना पर काम तेजी से जारी है। तटीय चक्रवातों (Type-3 Cyclone) को सहने में सक्षम यह नई इमारत पूरी तरह से पर्यावरण अनुकूल होगी, जिसमें सोलर पैनल और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट शामिल हैं। यहाँ 72 मीटर चौड़ा विशाल फुट ओवरब्रिज बनाया जा रहा है, जिसमें 60 हजार वर्गफुट का कमर्शियल एरिया, मॉल और वेटिंग एरिया होगा। यात्रियों की सुविधा के लिए बहुभाषी AI पूछताछ प्रणाली और खान-पान वेंडरों के लिए हाइजीनिक टी-केन शुरू किए गए हैं। साथ ही, ट्रैक पर तैनात महिला कर्मचारियों के लिए बॉडी कैमरा और विश्राम गृह जैसी कर्मचारी- केंद्रित पहल भी की गई है।



