नीले समंदर की लहरों के बीच मेहनत करने वाले मछुआरों की जिंदगी आसान बनाने और समुद्री संसाधनों के सही इस्तेमाल के लिए ICAR-केंद्रीय मात्स्यिकी प्रौद्योगिकी संस्थान (CIFT) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। विशाखापट्टनम में स्थित यह संस्थान अब सिर्फ मछली पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘लैब से लेकर सीधे समंदर’ तक तकनीक की नई लहर चला रहा है। CIFT के वैज्ञानिक ऐसी आधुनिक बोट, जालों की डिजाइनिंग और ट्रॉलिंग सिस्टम तैयार कर रहे हैं, जो कम ईंधन और कम मेहनत में ज्यादा से ज्यादा मछली पकड़ने में मदद करते हैं।
मछली पकड़ने के बाद उसकी ताजगी बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है। इसके लिए संस्थान में माइक्रोबायोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी और बायोकैमिस्ट्री के जरिए एडवांस प्रिजर्वेशन व प्रोसेसिंग तकनीक विकसित की जा रही है। इससे न केवल सी-फूड की शेल्फ लाइफ बढ़ती है, बल्कि जलीय जीवों से मिलने वाले पोषक तत्वों और ‘बायोएक्टिव कंपाउंड्स’ से हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स भी तैयार किए जा रहे हैं। CIFT की इस पहल से मछुआरों को अपनी उपज के बेहतर दाम मिल रहे हैं और तटीय इलाकों में रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं।



