इतिहास के सबसे बड़े पुनर्गठन की तैयारी में वोक्सवैगन, करीब 1 लाख नौकरियों पर मंडरा रहा खतरा

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नई दिल्ली। जर्मनी की दिग्गज वाहन निर्माता कंपनी वोक्सवैगन ग्रुप अपने इतिहास के सबसे बड़े पुनर्गठन की तैयारी कर रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) ओलिवर ब्लूम ऐसी योजना पर विचार कर रहे हैं, जिसके तहत करीब 1 लाख कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं, जर्मनी में कई फैक्ट्रियां बंद की जा सकती हैं और निवेश खर्च में भी बड़ी कटौती की जा सकती है।
मैनेजर मैगजीन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रस्तावित योजना को अभी कंपनी के बोर्ड की मंजूरी मिलनी बाकी है। योजना के तहत अगले पांच वर्षों के लिए वोक्सवैगन के निवेश में 15 प्रतिशत तक कटौती की जा सकती है, जिससे कंपनी का कुल पूंजीगत निवेश घटकर 130 अरब यूरो से थोड़ा अधिक रह जाएगा।
पुनर्गठन के तहत वोक्सवैगन अपने मुख्य पैसेंजर कार कारोबार और पार्ट्स बिजनेस को अलग-अलग स्वतंत्र इकाइयों के रूप में संचालित करने की संभावना भी तलाश रही है। कंपनी का मानना है कि इससे परिचालन सरल होगा और कार्यक्षमता बढ़ेगी।
यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है, जब वैश्विक ऑटोमोबाइल बाजार में कंपनी को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
वोक्सवैगन पर इस समय कई तरह का दबाव है। अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्क, चीन की इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा और इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बदलाव में बढ़ती लागत ने कंपनी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
कंपनी के सीईओ ओलिवर ब्लूम पहले भी कई बार कह चुके हैं कि वोक्सवैगन को अपने मुख्य ऑटोमोबाइल कारोबार पर ज्यादा ध्यान देना होगा और मुनाफा बढ़ाने के लिए बड़े बदलाव करने होंगे। रिपोर्ट्स के अनुसार, मौजूदा वाहन कार्यक्रमों के पूरा होने के बाद कंपनी हैनोवर, ज्विकाऊ और एम्डेन स्थित वोक्सवैगन के संयंत्रों के साथ-साथ ऑडी के नेकार्सुल्म प्लांट में भी उत्पादन बंद करने पर विचार कर सकती है।
नई योजना कंपनी की पहले घोषित करीब 50,000 नौकरियां कम करने की योजना से भी कहीं आगे जा सकती है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो वोक्सवैगन के वैश्विक कर्मचारियों का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित होगा, जिसे कंपनी के इतिहास के सबसे बड़े पुनर्गठन अभियानों में से एक माना जा रहा है।
वोक्सवैगन ने रिपोर्ट में सामने आए आंतरिक प्रस्तावों पर सीधे टिप्पणी करने से इनकार किया है। हालांकि कंपनी ने माना कि प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए पूरे समूह में व्यापक बदलाव करना जरूरी है।
वहीं, कंपनी की वर्क्स काउंसिल और जर्मनी की शक्तिशाली श्रमिक यूनियन आईजी मेटल ने फैक्ट्रियां बंद करने या बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की किसी भी कोशिश का कड़ा विरोध करने की चेतावनी दी है। यदि कंपनी इस योजना को आगे बढ़ाती है, तो उसे श्रमिक संगठनों के साथ बड़े विवाद का सामना करना पड़ सकता है।

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