शीर्ष उद्योगपतियों ने पीएम मोदी की अपील का किया समर्थन, कहा- इससे मजबूत होगा भारत

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नई दिल्ली। शीर्ष उद्योगपतियों ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने ईंधन का उपयोग कम करने और विदेशी मुद्रा को बचाने की अपील की थी। उद्योगपतियों ने कहा कि प्रधानमंत्री की इस अपील से भारत को मजबूती मिलेगी और विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षा रखा जा सकेगा। टीवीएस मोटर कंपनी के चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन ने वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा आत्मनिर्भरता और विवेकपूर्ण उपभोग पर दिए गए बयान का समर्थन किया।
वहीं, भारती एंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने भी प्रधानमंत्री की इस अपील का समर्थन करते हुए वर्तमान दौर को भारत के लिए आर्थिक अनुशासन और घरेलू शक्ति पर और अधिक ध्यान केंद्रित करने का अवसर बताया।
इसके अलावा, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि पीएम मोदी की अपील किसी भी प्रकार की राशनिंग लागू करने के बजाय भारत के विदेशी मुद्रा भंडार की रक्षा पर केंद्रित थी।
ये प्रतिक्रियाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रविवार को सिकंदराबाद के परेड ग्राउंड में भाजपा की जनसभा को संबोधित करने के बाद आईं, जिसमें उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनावों से उत्पन्न आर्थिक चुनौतियों से निपटने में भारत की मदद करने के लिए नागरिकों से ईंधन बचाने, वर्क फ्रॉम होम को फिर से शुरू करने, गैर-जरूरी खरीदारी सीमित करने और विदेश यात्रा से बचने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “वर्तमान परिस्थितियों में, विदेशी मुद्रा बचाना देश के लिए महत्वपूर्ण हो गया है।”
आयातित ईंधन पर भारत की निर्भरता का जिक्र करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ईंधन की खपत कम करने से बहुमूल्य विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान अपनाई गई डिजिटल कार्य पद्धतियों, जैसे कि वर्क फ्रॉम होम, वर्चुअल कॉन्फ्रेंस और ऑनलाइन बैठकों को फिर से शुरू करने की भी वकालत की।
प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों से गैर-जरूरी विदेश यात्रा, डेस्टिनेशन वेडिंग और विदेश में छुट्टियां मनाने से बचने की अपील की, साथ ही घरेलू पर्यटन और देश के भीतर होने वाले समारोहों को प्रोत्साहित किया।
उन्होंने विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने के लिए अगले वर्ष तक गैर-जरूरी सोने की खरीदारी टालने का आग्रह किया और परिवारों को खाद्य तेल की खपत कम करने की सलाह दी, क्योंकि इससे आर्थिक स्थिरता और व्यक्तिगत स्वास्थ्य दोनों को लाभ होगा।

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