‘जीवन की रक्षा से बढ़कर कोई मूल्यवान उपहार नहीं’, पीएम मोदी ने शेयर किया सुभाषित

ram

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बुधवार को सुभाषित शेयर किया गया। उन्होंने एक्स पर संस्कृत श्लोक, अभयस्यैव यो दाता तस्यैव सुमहत्फलम् । न हि प्राणसमं दानं त्रिषु लोकेषु विद्यते ॥ साझा किया है।

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा साझा किए गए श्लोक का हिंदी अर्थ है, “जो व्यक्ति लोगों के भय को दूर करता है, वह विशेष पुण्य प्राप्त करता है। तीनों लोकों में जीवन की रक्षा से बढ़कर कोई मूल्यवान उपहार नहीं।”

इसके पहले मंगलवार को पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया था, “यस्य कृत्यं न जानन्ति मन्त्रं वा मन्त्रितं परे। कृतमेवास्य जानन्ति स वै पण्डित उच्यते॥” साझा किया है, जिसका हिंदी अर्थ है कि जिस व्यक्ति के कार्यों, योजनाओं, गोपनीय विचारों और रणनीतियों का ज्ञान दूसरों को तब तक नहीं होता, जब तक कि वे सफलतापूर्वक पूर्ण न हो जाएं, ऐसे संयमी, विवेकी और गंभीर व्यक्ति को ही वास्तव में बुद्धिमान कहा जाता है।

बीते दिन सोमवार को प्रधानमंत्री की ओर से सुभाषित शेयर करते हुए लिखा गया था, “यद् यदेव प्रसक्तं हि वितर्कयति मानवः। अभ्यासात् तेन तेनास्य नतिर्भवति चेतसः।।” इस श्लोक का हिंदी अर्थ है कि मनुष्य जिस विषय या वस्तु के बारे में बार-बार सोचता है, उसका मन धीरे-धीरे उसी ओर आकर्षित होने लगता है। इसलिए हमें हमेशा अच्छे, शुभ और कल्याणकारी विचारों का ही चिंतन करना चाहिए।

इससे पहले प्रधानमंत्री की ओर से 28 अगस्त को सोशल मीडिया पर सुभाषित शेयर किया गया था। तब पीएम ने ‘एक्स’ पर “एष प्रभावो रक्षायाः कथितस्ते युधिष्ठिर। जयदः सुखदश्चैव पुत्रारोग्यधनप्रदः॥” संस्कृत श्लोक लिखा था, जिसका हिंदी अर्थ है कि रक्षा सूत्र के प्रभावों का वर्णन करते हुए कहा गया है कि यह जय, सुख, संतति, आरोग्य एवं ऐश्वर्य प्रदान करने वाला है।

27 अगस्त को पीएम ने संस्कृत श्लोक शेयर करते हुए लिखा था, “मनुष्य को अपनी परम्पराओं और ज्ञान को आगे बढ़ाते हुए श्रेष्ठ कर्म करने चाहिए। उसे बुद्धि से निर्मित न्यायपूर्ण और प्रकाशमय मार्ग का अनुसरण करना चाहिए। श्रेष्ठ जनों के सदाचार को जीवन में अपनाकर निरन्तर विचारशील रहना चाहिए और दिव्य गुणों से सम्पन्न जनों का निर्माण करना चाहिए।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *