आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर कदम : सोना बचत और वर्क फ्रॉम होम का संदेश

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-सुनील कुमार महला
हाल ही में हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की बचत करने, अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचने, ‘वर्क फ्रॉम होम'(जैसा कि हमने कोविड काल के दौरान इसे अमल में लाया था) जैसे उपाय अपनाने तथा एक वर्ष तक गैर-जरूरी सोना नहीं खरीदने की अपील की है। वास्तव में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह अपील पश्चिम एशिया संकट, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव के संदर्भ में की गई है। पिछले कुछ समय से हमारे देश के साथ ही साथ पूरे विश्व ने पश्चिम एशिया संकट का सामना किया। मसलन, युद्ध के कारण पूरे विश्व में खाद्य पदार्थों में जहां एक ओर महंगाई का सामना करना पड़ा, वहीं दूसरी ओर तेल-गैस संकट के बादल भी मंडराए। गैस के लिए लंबी-लंबी कतारें हमें हर कहीं पर देखने को मिलीं,कई स्थानों पर तो तेल के लिए भी कमोबेश यही स्थिति देखने को मिली। इस क्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल और बड़ी मात्रा में सोना आयात करता है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल और सोने पर अधिक खर्च से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है तथा व्यापार घाटा भी बढ़ सकता है। इसलिए हमें यह चाहिए कि हम हर क्षेत्र में बचत को महत्व दें। वास्तव में मनुष्य के जीवन में बचत का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। बचत केवल हमारे अर्थ(धन) को ही सुरक्षित रखने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हमारे भविष्य की सुरक्षा, हमारी आत्मनिर्भरता और संतुलित जीवन का आधार भी बनता है। हमें यह याद रखना चाहिए कि मनुष्य के जीवन में कभी भी अचानक बीमारी, आर्थिक संकट, बेरोजगारी या अन्य कठिन परिस्थितियाँ आ सकती हैं। ऐसे समय में बचत ही मनुष्य का सबसे बड़ा सहारा बनती है। यही कारण है कि कहा जाता है- ‘बूंद-बूंद से घड़ा भरता है।’ छोटी-छोटी बचतें भविष्य में बड़ी शक्ति बन जाती हैं।हमारी सनातन भारतीय संस्कृति में बचत की परंपरा प्राचीन काल से रही है। कहना ग़लत नहीं होगा कि हमारे यहां तो लोग सदैव सादा जीवन, उच्च विचार और विवेकपूर्ण खर्च को महत्व देते आए हैं। प्राचीन काल गांवों में लोग अनाज, घी, धन और अन्य आवश्यक वस्तुओं का संग्रह करके रखते थे, ताकि कठिन समय में परिवार सुरक्षित रह सके। गृहिणियाँ भी घर के खर्च से थोड़ा-थोड़ा बचाकर भविष्य के लिए संचित करती थीं। यही पारिवारिक बचत भारतीय समाज की आर्थिक मजबूती का आधार रही है।हमारे बुजुर्ग हमेशा यह शिक्षा देते थे कि आय से कम खर्च करना चाहिए और अनावश्यक दिखावे से बचना चाहिए। भारतीय परिवारों में बच्चों को भी छोटी उम्र से ही गुल्लक में पैसे जमा करने की आदत डाली जाती रही है। यह केवल आर्थिक शिक्षा नहीं, बल्कि संयम और दूरदर्शिता का संस्कार भी है। बहरहाल, यहां यह कहना चाहूंगा कि बचत की प्रेरणा हमें चींटियों से लेनी चाहिए। वास्तव में, चींटियां हमें बचत, परिश्रम और दूरदर्शिता की अद्भुत प्रेरणा देती हैं। छोटी-सी दिखाई देने वाली चींटी अपने भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए निरंतर मेहनत करती रहती है। वह अनुकूल समय में भोजन के छोटे-छोटे कण इकट्ठा करके अपने बिल में जमा करती है, ताकि विपरीत परिस्थितियों में उसे कठिनाई न हो। यही कारण भी है कि चींटी को बचत और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है। कहना ग़लत नहीं होगा कि थोड़ी-थोड़ी बचत भविष्य में बड़े संकटों से बचा सकती है। जिस प्रकार चींटी कभी आलस्य नहीं करती और लगातार अपने लक्ष्य में लगी रहती है, उसी प्रकार हमें भी अपने जीवन में परिश्रम, संयम और बचत की आदत अपनानी चाहिए। चींटियां यह संदेश देती हैं कि भविष्य की चिंता केवल सोचने से नहीं, बल्कि आज से तैयारी करने से दूर होती है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि छोटी कोशिशें और छोटी बचतें ही आगे चलकर बड़ी ताकत बनती हैं। इसलिए कहा जा सकता है कि चींटियां केवल प्रकृति का जीव नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन की एक महान शिक्षक भी हैं।आज उपभोक्तावाद और दिखावे की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण बचत की आदत कमजोर होती जा रही है, जबकि वर्तमान समय में इसकी आवश्यकता और भी अधिक बढ़ गई है। बचत व्यक्ति को आत्मविश्वास देती है और देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाती है। इसलिए हमें अपनी पुरानी परंपराओं से प्रेरणा लेते हुए बचत को जीवन का अनिवार्य हिस्सा बनाना चाहिए। हाल फिलहाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से सार्वजनिक परिवहन, कारपूलिंग, इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग और ‘लोकल फॉर वोकल’ को बढ़ावा देने की भी अपील की। साथ ही विदेश यात्राओं, डेस्टिनेशन वेडिंग और गैर-जरूरी खर्चों को टालने का आग्रह किया।’लोकल फॉर वोकल’ से देश का पैसा देश में ही रहेगा और देश और अधिक आर्थिक तरक्की तथा आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर होगा। हाल फिलहाल, प्रधानमंत्री की यह अपील आर्थिक अनुशासन, विदेशी मुद्रा संरक्षण और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच देश की आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। आज हम अनावश्यक खर्च करते हैं। हम संसाधनों का सही व विवेकपूर्ण इस्तेमाल करें और जहां तक हो सके बचत को जीवन में अपनाएं। वास्तव में प्रधानमंत्री की यह कटौती की नहीं, बल्कि स्मार्ट लाइफ स्टाइल की सलाह है, और हम मिलकर ये सब आसानी से कर सकते हैं। कहना ग़लत नहीं होगा कि समझदारी से खर्च बनेगा देश के लिए आर्थिक रूप से बहुत ही सहायक सिद्ध हो सकता है। वास्तव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार यह नहीं कह रहे कि कोई संकट है, जिसमें हमें खर्च घटाने हैं, बल्कि उन्होंने तो यह अपील की हैं कि युद्ध के इस दौर में हमें ऐसे खर्च कम करने हैं, जिससे देश की विदेशी मुद्रा की बचत हो सके। हम स्मार्ट लाइफ स्टाइल अपनाकर इस बर्बादी को रोक सकते हैं, ताकि देश के सामने आर्थिक संकट न आए।कोविड काल में हमने बचत के बड़े उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। मसलन, घर से कामकाज किया, तेल की बचत हुई, पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिली।हमारी उत्पादकता (प्रोडेक्टिविटी) में अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी देखने को मिली। जब संकट आए तब ही हम बचत क्यों करें, जीवन के हर पलों में हमें बचत करनी चाहिए, ताकि कभी कोई संटक आए ही नहीं।पीएम ने वर्क फ्रॉम होम की सलाह दी है, जो संसाधनों की बचत के साथ आर्थिक नजरिये से भी फायदेमंद है। ऐसे ऑर्गनाइजेशन जहां, 100-200 या ज्यादा स्टाफ है, वहां लोगों को वर्क फ्रॉम होम या हाइब्रिड मॉडल में काम की सुविधा दी गई तो तेल का खर्च बचेगा। यात्रा की थकान कम होगी और प्रोडक्टिविटी भी बढ़ेगी। प्रधानमंत्री ने विदेश में डेस्टिनेशन वेडिंग से बचने और गैर-जरूरी विदेश यात्रा टालने को कहा है। आंकड़े बताते हैं कि देश की तुलना में विदेश में डेस्टिनेशन वेडिंग में 30-36% तक ज्यादा खर्च होता है। इसमें देश का बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा भंडार खर्च होता है। एक उपलब्ध जानकारी के अनुसार अभी भारत की हर 100 डेस्टिनेशन वेडिंग में 15 विदेश में होती है। भारत में डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए राजस्थान, उत्तराखंड, गुजरात, गोवा, हिमाचल और कश्मीर जैसी कई जगहें हैं, जिनका चुनाव किया जा सकता है। आज इलेक्ट्रिक गाड़ी सबसे प्रभावी विकल्प है,बचत का। इससे पाल्यूशन भी नहीं होता,तेल की भी बचत होती है।सरल शब्दों में कहें तो इलैक्ट्रिक व्हीकल (ई-व्हीकल) पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। ये वाहन पेट्रोल-डीजल की तुलना में कम प्रदूषण फैलाते हैं, जिससे वायु गुणवत्ता बेहतर होती है। ई-व्हीकल चलाने में खर्च भी कम आता है, क्योंकि बिजली की लागत ईंधन से सस्ती होती है। इसके अलावा, ध्वनि प्रदूषण भी कम होता है और देश की तेल पर निर्भरता घटती है। आधुनिक तकनीक से लैस ये वाहन ऊर्जा संरक्षण और स्वच्छ भविष्य के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं। आज केमिकल खाद के स्थान पर जैविक खाद का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद सिद्ध हो सकता है। इससे धन की भी बचत होगी तथा स्वास्थ्य के भी फायदे होंगे। वास्तव में केमिकल खाद का कम उपयोग करने के लिए सॉइल मैपिंग और सॉइल हेल्थ कार्ड बहुत उपयोगी हो सकते हैं। इससे यह पता चल सकेगा कि किस क्षेत्र की मिट्टी में कौन-से पोषक तत्व की कमी है। उसी अनुसार वहां जरूरत जितनी ही रासायनिक खाद भेजी जाए। ड्रिप और फर्टि-इरिगेशन तकनीक से खाद और पानी की बर्बादी भी रुकेगी। सरकार कंपनियों के लिए यह नियम बना सकती है कि वे जितनी रासायनिक खाद बनाएं, उसका 26 प्रतिशत बायोफर्टिलाइजर भी तैयार करें। जैविक खाद पर सब्सिडी मिलने से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा। इन उपायों से रासायनिक खाद के आयात पर होने वाला खर्च काफी कम हो सकता है। प्रधानमंत्री ने सोना नहीं खरीदने या जरूरत होने पर ही सोना खरीदने की सलाह दी है। दरअसल, आज भारत दुनिया में सबसे ज्यादा सोना खरीदने वाले देशों में शामिल है।पाठक जानते होंगे कि हमारा देश बड़ी मात्रा में सोना विदेशों से आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा का बहुत खर्च होता है। यदि लोग गैर जरूरी सोने की खरीद कम करें, तो देश का आयात बिल घटेगा और विदेशी मुद्रा की बचत होगी। इससे सरकार के पास पेट्रोल, गैस, तकनीक और जरूरी वस्तुओं के आयात के लिए अधिक पैसा बचेगा।कम सोना खरीदने से लोग अपनी बचत बैंक, शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या उद्योगों में निवेश कर सकते हैं, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार को मजबूती मिलेगी। साथ ही, व्यापार घाटा कम होगा और रुपये की स्थिति भी मजबूत हो सकती है।इसके अलावा, पीएम ने खाने में तेल के कम इस्तेमाल की भी सलाह दी है। वास्तव में इसके पीछे का मकसद तेल आयात में होने वाले बड़े खर्च को कम करना है। अच्छी सेहत के लिए भी यह जरूरी है। ज्यादा तेल वाला खाना अनेक बीमारियों का कारण बनता है। कम तेल का खाना शरीर स्वस्थ रखता है। घर खर्च भी कम होता है। कहना ग़लत नहीं होगा कि नॉन-स्टिक बर्तनों और एयर फ्रायर के इस्तेमाल से भी कम तेल में अच्छा खाना बना सकते हैं।अंत में यही कहूंगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों को बचत बढ़ाने, गैर-जरूरी खर्चों से बचने और संसाधनों का संयमित उपयोग करने की दी गई सलाह केवल व्यक्तिगत आर्थिक अनुशासन का संदेश नहीं है, बल्कि देशहित से जुड़ा व्यापक दृष्टिकोण भी है। वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, बढ़ती महंगाई, ऊर्जा संकट और अंतरराष्ट्रीय तनावों के दौर में बचत की आदत परिवार और राष्ट्र दोनों को आर्थिक मजबूती देती है। जब लोग अनावश्यक खर्च कम करते हैं, ईंधन और संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करते हैं तथा घरेलू बचत बढ़ाते हैं, तो देश की अर्थव्यवस्था अधिक स्थिर और आत्मनिर्भर बनती है।सच तो यह है कि प्रधानमंत्री की बचत की सलाह कोविड काल की तरह सामूहिक जिम्मेदारी, आत्मसंयम और राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देने का संदेश देती है। यह केवल आर्थिक बचत नहीं, बल्कि भविष्य के प्रति सजग और जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा भी है।

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