लगातार कई वर्षों से नहरों -नदियों में लोगों ख़ासकर बालकों और नौजवानों की ओर से नहाने का सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है उसी प्रकिया में नहाते समय इन के डूबने की घटनाएँ और मरने वालों की संख्या भी बढ़ रही हैं । समय – समय की सरकारें ,नहर विभाग , स्थानीय प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की तरफ़ से नहरों-नदियों में न नहाने के लिए चेतावनी कम सलाह के बोर्ड लगाए जाते है और कई स्थानों पर तो नहाने से रोकने के लिए सीधे सीधे चेतावनी बोर्ड भी लगाए जाते हैं मगर फिर भी बालक बुद्धि वाली परिवृत्ति मानने को तैयार नहीं होती । इस प्रकार के कई लोग ख़ुद तो ज़िंदगी को अलविदा कह जाते हैं मगर पिछे बिलखते परिवारजनों का क्या हाल होता हैं,वह ज़िंदगी कैसे बसर करते हैं ,यह तो वही जानते हैं । बहुत लोग आस्था की प्रतीक पवित्र नदियों में डुबकी लगाने आते हैं,उन में से कुछ लोग नियमों के कई बार ताक पर रखकर डूबकी लगाते हैं, जो कि ठीक नहीं लगता ।इस प्रकार के जो कुछ लोग होते हैं,उनको चाहिए कि वह प्रशासन के क़ानूनों का पालन करें ताकि आने वाली पीढ़ी को सही मार्ग दर्शन मिल सके और अनहोनी घटनाओं से बचा जा सके ।
गत दिवस चंडीगढ़ के रहने वाले चार नाबालिग़ दोस्त हरिद्वार में नहाते समय डूब कर मौत को प्यारे हो गए । इस प्रकार की घटना सब को सोचने को मजबूर करती हैं । चाहे हर एक माता-पिता अपने बच्चों को पाबंदी वाले स्थानों पर नहाने से मना करते हैं मगर बहुत से बच्चे नहीं मानते हैं । कुछ बच्चे तो तेज़ बहाव वाली नहरों में पुल के उपर से नहरों में कूदते हैं । जो छोटी नहरें (सूएं) खेतों की सिंचाई के लिए बनाई गई होती हैं ,गर्मी के समय और धान के सीज़न में उन में तेज बहाव का पानी विभाग की तरफ़ से छोड़ा जाता हैं तो उस में बहुत बच्चे नहाते हैं जिस कारण अनहोनी घटना का डर बना रहता
हैं ।
इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए बच्चों को जागरूक करने की ज़िम्मेदारी सर्वप्रथम पूरी तरह से माता-पिता की बनती हैं क्यों कि बच्चे नहाने के लिए घर से माता-पिता के सामने जाते है और नहाकर भी घर उन्हीं के पास आते हैं । बहुत से बच्चे तो गरमियों में शिक्षणसंस्थानों से छुट्टी के बाद सीधे नदी -नहरों में नहाने जाते हैं और माता-पिता बेचारे बने रहते हैं । कई बार छुट्टियों में बच्चे टूर पर जाते हैं,पता होने के बावजूद भी सूखी या कम पानी वाली नदियों के अंदर चले जाते है जहां पर दलदल गाद भी होती हैं वहा जाकर वह फँस जाते हैं और अचानक पीछे से तेज बहाव से पानी आ जाता हैं और अनहोनी घटना घटित हो जाती हैं । कई घटनाएं तो ऐसी भी सामने आई हैं कि कई बच्चे नहाने के लिए पानी में आगे और आगे बढ़ते हुए डूब रहे होते हैं तो साथ वाले दोस्त उनको बचाते -बचाते खुद भी डूब जाते हैं ।कई बार थोड़ी सी लापरवाही पीछे परिवार के लिए मंहगी पड़ जाती हैं । नहरों-नदियों में नहाने वाले बच्चों को इन स्थानों पर नहाने से बचना चाहिए ।कुछ लोग आस्था की प्रतीक पवित्र नदियों में डुबकी लगाने जाते हैं को प्रशासन की तरफ़ से मान्यता प्राप्त घाटों (साईटस )पर ही लगाए । इस लिए इस प्रकार नहाने वालों को अपना और अपने परिवार का ख़याल रहना चाहिए ।

नहरों-नदियों में डूब कर मरने की बढ़ रहीं घटनाएँ: चिंता का विषय
ram


