1.75 लाख से ज्यादा मरीजों को राहत, जटिल ऑपरेशन में आगे पीजीएमईआर

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-स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान ने रचा नया इतिहास

-आयुष्मान भारत के तहत 1.75 लाख से अधिक मरीजों का निःशुल्क उपचार, जटिल सर्जरी में बना राष्ट्रीय मॉडल

चंडीगढ़। देश के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में शुमार पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ ने आयुष्मान भारत योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए जटिल और उच्चस्तरीय उपचार उपलब्ध कराने में राष्ट्रीय स्तर पर एक नई मिसाल कायम की है। वर्ष 2019 से अब तक संस्थान में आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत 1,75,676 मरीजों का उपचार किया जा चुका है। यह आंकड़ा न केवल योजना की सफलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के माध्यम से विश्वस्तरीय इलाज समान रूप से उपलब्ध कराया जा सकता है।

संस्थान के निदेशक Prof. Vivek Lal का कहना है कि आयुष्मान भारत देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लेकर आया है। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल आर्थिक सुरक्षा का माध्यम नहीं है, बल्कि इसने स्वास्थ्य सेवाओं की पूरी प्रणाली को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और मरीज-केंद्रित बनाया है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि पीजीआईएमईआर इस परिवर्तन को धरातल पर उतारने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

प्रो. लाल ने बताया कि पीजीआईएमईआर सामान्य मामलों का अस्पताल नहीं है, बल्कि यहां देशभर से गंभीर और जटिल मरीज रेफर होकर आते हैं। किडनी ट्रांसप्लांट, स्पाइन सर्जरी, जॉइंट रिप्लेसमेंट, न्यूरोसर्जरी और कैंसर उपचार जैसी उच्चस्तरीय सर्जरियां बड़ी संख्या में आयुष्मान भारत के तहत की जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्थान में उपयोग होने वाले स्वदेशी और आयुष्मान-अनुमोदित इम्प्लांट अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरते हैं और यहां उपचार की गुणवत्ता में किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाता।

आंकड़ों के अनुसार योजना के अंतर्गत उपचारित मरीजों की संख्या में वर्ष दर वर्ष उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2019-20 में जहां 9,201 मरीजों का इलाज हुआ था, वहीं 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 39,227 तक पहुंच गई। चालू वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक 34,422 लाभार्थियों को उपचार मिल चुका है। यह निरंतर वृद्धि पीजीआईएमईआर की बढ़ती क्षमता और लोगों के विश्वास को दर्शाती है।

विशेषज्ञता के आधार पर देखें तो मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग में सबसे अधिक 53,940 मरीजों का उपचार हुआ है। इसके अलावा जनरल मेडिसिन में 42,870, कार्डियोलॉजी में 15,050, न्यूरोसर्जरी में 13,500, ऑर्थोपेडिक्स में 11,220 तथा किडनी ट्रांसप्लांट के 211 मामले आयुष्मान योजना के अंतर्गत किए गए हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि योजना के तहत जीवनरक्षक और जटिल उपचार व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

राज्यवार विश्लेषण में पंजाब के मरीजों की हिस्सेदारी 46 प्रतिशत है, जबकि हरियाणा से 20 प्रतिशत, हिमाचल प्रदेश से 9 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश से 7 प्रतिशत और जम्मू-कश्मीर से 6 प्रतिशत मरीज उपचार के लिए पहुंचे। चंडीगढ़ से 4 प्रतिशत और अन्य राज्यों से 8 प्रतिशत मरीजों ने यहां इलाज कराया। इससे स्पष्ट है कि पीजीआईएमईआर एक राष्ट्रीय रेफरल केंद्र के रूप में अपनी पहचान और विश्वसनीयता बनाए हुए है।

निदेशक ने बताया कि कुछ विभागों में अब 65 से 80 प्रतिशत तक प्रमुख सर्जरियां आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत की जा रही हैं। हाल ही में किए गए एक संस्थागत अध्ययन में पाया गया कि योजना के तहत उपचारित मरीजों के परिणाम अंतरराष्ट्रीय मानकों के समान हैं, जबकि मरीजों को किसी प्रकार का जेब खर्च नहीं करना पड़ता। उन्होंने कहा कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

संस्थान में डिजिटल सुधारों को भी मजबूती से लागू किया गया है। आयुष्मान भारत 2.0 के तहत बायोमेट्रिक सत्यापन, एंड-टू-एंड डिजिटाइजेशन, बेडसाइड दवा वितरण और ऑनलाइन इंडेंटिंग व इन्वेंट्री प्रबंधन प्रणाली लागू की गई है। इन सुधारों से पारदर्शिता बढ़ी है और संसाधनों के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित किया गया है।

सर्जरी की बढ़ती मांग को देखते हुए पीजीआईएमईआर में ऑपरेशन थिएटर सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक नियमित रूप से संचालित किए जा रहे हैं, जबकि आपातकालीन सेवाएं 24 घंटे उपलब्ध हैं। बेहतर प्रबंधन के माध्यम से सर्जरी की प्रतीक्षा अवधि में उल्लेखनीय कमी आई है। इसके साथ ही संस्थान परिसर में संचालित एएमआरआईटी फार्मेसियों के माध्यम से मरीजों को गुणवत्तापूर्ण दवाएं और इम्प्लांट रियायती दरों पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। लंबित भुगतानों में भी भारी कमी लाई गई है, जिससे दवा आपूर्ति व्यवस्था मजबूत हुई है।

अपने संबोधन के अंत में प्रो. विवेक लाल ने कहा कि पीजीआईएमईआर यह दर्शाता है कि जब सरकारी योजनाओं को प्रतिबद्धता और ईमानदारी से लागू किया जाए तो वे समाज के सबसे कमजोर वर्ग तक वास्तविक लाभ पहुंचा सकती हैं। उन्होंने कहा, “हम सफेद कोट वाले सैनिक हैं। हमारा कर्तव्य है कि हर जरूरतमंद मरीज को सर्वोत्तम उपचार मिले, चाहे उसकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो।”

पीजीआईएमईआर की यह उपलब्धि न केवल आयुष्मान भारत योजना की सफलता की कहानी है, बल्कि यह भी संदेश देती है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र विश्वस्तरीय चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने में पूरी तरह सक्षम है।

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