आरबीआई द्वारा रेपो रेट स्थिर रखने से दीर्घकालिक विकास की संभावनाएं बनी रहेंगी: विशेषज्ञ

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नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा नीतिगत रेपो दर को अपरिवर्तित रखने का फैसला वित्तीय स्थिरता बनाए रखने पर केंद्रित है और इससे लंबी अवधि में आर्थिक विकास की संभावनाएं मजबूत बनी रहेंगी। यह बात अर्थशास्त्रियों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने शुक्रवार को कही।
पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और महासचिव डॉ. रंजीत मेहता ने कहा कि मौद्रिक नीति का यह फैसला अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद जोखिमों को ध्यान में रखते हुए संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताएं बढ़ी हैं, लेकिन आरबीआई के इस कदम ने मध्यम और दीर्घकालिक विकास की संभावनाओं को बनाए रखने के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है।
पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने कहा कि महंगाई अभी भी आरबीआई के निर्धारित लक्ष्य दायरे, यानी 4 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है, लेकिन भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो रही है, जिससे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि मजबूत घरेलू मांग के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था अब भी लचीली और मजबूत बनी हुई है।
विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी कि आपूर्ति संबंधी झटके, ऊर्जा की ऊंची कीमतें और सामान्य से कमजोर मानसून आर्थिक विकास की रफ्तार को प्रभावित कर सकते हैं।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने अनुमान जताया कि यदि महंगाई बढ़कर 5.9 प्रतिशत के करीब पहुंचती है तो इस वर्ष के अंत तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो सकती है।
उन्होंने कहा, “हम इस साल एक से दो बार ब्याज दर बढ़ने की संभावना देख रहे हैं। ऐसा लगता है कि मानसून का असर पड़ सकता है, हालांकि फिलहाल उसे कुछ हद तक संतुलित कर लिया गया है।”
सबनवीस ने आगे कहा कि आरबीआई की ओर से विदेशी पोर्टफोलियो निवेश, बाहरी वाणिज्यिक उधारी और विदेशी मुद्रा गैर-निवासी जमा के माध्यम से विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए उठाए गए व्यापक कदम सकारात्मक आश्चर्य की तरह हैं।
उन्होंने कहा कि विदेशी मुद्रा बाजार ने इन घोषणाओं पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। अब यह देखना होगा कि क्या इससे ऋण बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के निवेश का रुख बदलता है।
इसके अलावा, इंडियन बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी बिनोद कुमार ने रुपए को स्थिर बनाए रखने के लिए किए गए उपायों का स्वागत किया।
उन्होंने कहा, “भू-राजनीतिक संकट के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है और वैश्विक चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है। ब्याज दरों को स्थिर रखने का आरबीआई का फैसला आर्थिक विकास पर उसके फोकस को दर्शाता है।”
बिनोद कुमार ने आगे कहा कि खुदरा, कृषि और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्रों में मांग लगातार बढ़ती रहेगी क्योंकि आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने वाली नीतियां लागू की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि यह नीति भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती पर विश्वास को और मजबूत करती है।
एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) त्रिभुवन अधिकारी ने कहा कि स्थिर ब्याज दरों का माहौल आवास क्षेत्र की मांग को समर्थन देगा।
उन्होंने कहा कि मौजूदा ब्याज दर व्यवस्था जारी रहने से उधारकर्ताओं का भरोसा बढ़ेगा, ऋण प्रवाह में सुधार होगा और विभिन्न बाजारों में आवास की मांग को मजबूती मिलेगी।

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