सांस्कृतिक धरोहरों की सुरक्षा में संग्रहालयों की नई चुनौतियां

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-सुनील कुमार महला
संग्रहालयों के महत्व, इनके इतिहास, इनकी संस्कृति और विरासत के संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के क्रम में प्रतिवर्ष 18 मई को अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस (इंटरनेशनल म्यूजियम डे) मनाया जाता है। कहना ग़लत नहीं होगा कि संग्रहालय केवल पुरानी वस्तुओं का भंडार ही नहीं होते हैं, बल्कि ये शिक्षा, शोध और सांस्कृतिक संवाद के महत्वपूर्ण केंद्र होते हैं। सरल शब्दों में कहें तो संग्रहालय केवल अतीत की स्मृतियों के संरक्षक नहीं, बल्कि शिक्षा, शोध, सामाजिक संवाद और मानवता को जोड़ने वाले सशक्त माध्यम भी हैं। तेजी से बदलती दुनिया में संग्रहालय हमारी पहचान, संस्कृति और ज्ञान को सुरक्षित रखने का अमूल्य कार्य कर रहे हैं। पाठकों को बताता चलूं कि इस दिवस की शुरुआत वर्ष 1977 में इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ म्यूज़ियम्स द्वारा की गई थी। संग्रहालय किसी भी देश की असली सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक धरोहर होते हैं, जो हमें तत्कालीन इतिहास, उस समय विशेष की कला और सभ्यता का परिचय देते हैं अथवा उससे रूबरू करवाते हैं। इस दिवस को मनाने के पीछे मुख्य उद्देश्य विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद, सहयोग और शांति को बढ़ावा देने तथा नई (युवा) पीढ़ी को अपने अतीत(इतिहास) से परिचित कराना तथा ज्ञान-विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करना है। गौरतलब है कि पिछले साल इस दिवस की थीम (2025 में)-‘तेजी से बदलते समुदायों में संग्रहालयों का भविष्य।’ रखी गई थी। वास्तव में इस थीम का उद्देश्य बदलती तकनीक, समाज और पर्यावरणीय परिस्थितियों में संग्रहालयों की भूमिका को रेखांकित करना था। इस साल यानी कि वर्ष 2026 में इस दिवस की थीम -‘विभाजित दुनिया को जोड़ते संग्रहालय।’ रखी गई है।यह थीम संग्रहालयों की उस भूमिका पर केंद्रित है, जिसके माध्यम से वे समाज में संवाद, समावेश और शांति स्थापित करते हैं।बहरहाल, यदि हम यहां पर संग्रहालयों से संबंधित आंकड़ों की बात करें तो यूनेस्को के अनुसार 1975 में विश्व में लगभग 22,000 संग्रहालय थे, जबकि आज इनकी संख्या बढ़कर लगभग 95,000 से अधिक हो चुकी है। कुछ रिपोर्टों में यह संख्या लगभग 1,04,000 संग्रहालयों तक बताई गई है। यहां पाठकों को बताता चलूं कि इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ म्यूज़ियम्स के 138 से अधिक देशों में 57,000 से ज्यादा सदस्य हैं तथा अमेरिका विश्व में सबसे अधिक संग्रहालयों वाला देश माना जाता है।लूव्र म्यूज़ियम,वेटिकन म्यूज़ियम,ब्रिटिश म्यूज़ियम,मेट्रोपॉलिटन म्यूज़ियम ऑफ़ आर्ट तथा नेशनल म्यूज़ियम ऑफ़ चाइना विश्व के कुछ प्रसिद्ध संग्रहालय हैं। वहीं दूसरी ओर यदि हम भारतीय संग्रहालयों से संबंधित आंकड़ों की बात करें तो भारत में केंद्र, राज्य, निजी और विश्वविद्यालय स्तर पर मिलाकर सैकड़ों संग्रहालय संचालित हैं।भारत सरकार के अधीन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के प्रशासनिक नियंत्रण में वर्तमान में 52 पुरातात्विक साइट संग्रहालय हैं। यहां यह गौरतलब है कि देश का सबसे पुराना और एशिया का सबसे बड़ा संग्रहालय इंडियन म्यूजियम है, जिसकी स्थापना 1814 में हुई थी। उल्लेखनीय है कि इंडियन म्यूजियम भारत का सबसे पुराना और एशिया के सबसे बड़े संग्रहालयों में से एक है। इसकी स्थापना, जैसा कि ऊपर भी इस आलेख में चर्चा कर चुका हूं कि 1814 में डेनिश वनस्पतिशास्त्री डॉ. नाथेनियल वालिच द्वारा की गई थी। यह संग्रहालय कोलकाता(जवाहरलाल नेहरू रोड, कोलकाता)में स्थित है और इसे ‘जादूघर’ के नाम से भी जाना जाता है। इस संग्रहालय की प्रमुख विशेषताओं की बात करें तो यहां पुरातत्व, कला, जीवाश्म, मानव विज्ञान, भूविज्ञान और प्राचीन सभ्यताओं से जुड़ी लाखों वस्तुएं सुरक्षित हैं। इतना ही नहीं,संग्रहालय की सबसे प्रसिद्ध वस्तुओं में लगभग 4000 वर्ष पुरानी मिस्र की ममी विशेष आकर्षण का केंद्र है।यहां बौद्ध स्तूप अवशेष, मुगलकालीन चित्रकला, प्राचीन सिक्के, हथियार और दुर्लभ मूर्तियां भी प्रदर्शित हैं।इसकी वास्तुकला औपनिवेशिक शैली की शानदार मिसाल मानी जाती है।संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार इस संग्रहालय की नियंत्रक संस्था है।दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, जयपुर, हैदराबाद और चेन्नई जैसे शहर संग्रहालयों के प्रमुख केंद्र हैं।कई भारतीय संग्रहालय अब डिजिटल तकनीक, वर्चुअल टूर और इंटरैक्टिव प्रदर्शनियों का उपयोग कर रहे हैं।नेशनल म्यूज़ियम,इंडियन म्यूज़ियम ,सालार जंग म्यूज़ियम,अल्बर्ट हॉल म्यूज़ियम तथा छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय भारत के कुछ प्रमुख व प्रसिद्ध संग्रहालय हैं।

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