राष्ट्रीय हथकरघा दिवस – उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ 7 अगस्त को करेंगे राज्य स्तरीय समारोह का उद्घाटन

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जयपुर। उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ 7 अगस्त को जवाहर कला केंद्र में आयोजित राज्य स्तरीय राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर प्रदेश के विभिन्न जिलों के बुनकरों द्वारा तैयार उत्कृष्ट हथकरघा उत्पादों का प्रदर्शन एवं विक्रय किया जाएगा। यह हथकरघा प्रदर्शनी 7 से 9 अगस्त तक आमजन के लिए खुली रहेगी, जहां आगंतुक राजस्थान की समृद्ध हथकरघा परंपरा से रूबरू होने के साथ-साथ हस्तनिर्मित उत्पादों का क्रय भी कर सकेंगे। इस दौरान राज्य स्तरीय बुनकर पुरस्कार भी प्रदान किए जाएंगे।समारोह में लगभग 60 स्टॉल्स स्थापित किए जाएंगे। इनमें राज्य के विभिन्न जिलों से आए बुनकर कोटा डोरिया साड़ी एवं ड्रेस मटेरियल, पंजादरी, मालानी पट्टू, खेस, हैंडलूम बेडशीट, दुपट्टे, कुशन कवर, गृह सज्जा सामग्री, हैंडलूम शॉल, ऊनी वस्त्र, इंडिगो आधारित हथकरघा वस्त्र तथा साफा एवं पगड़ी के कपड़ों सहित विभिन्न उत्पादों का प्रदर्शन एवं विक्रय करेंगे। प्रदर्शनी 9 अगस्त तक चलेगी। थीम पवेलियन रहेगा आकर्षण का केंद्र भारत सरकार के बुनकर सेवा केंद्र द्वारा हथकरघा प्रौद्योगिकी पर आधारित आकर्षक थीम पवेलियन तैयार किया गया है। इसमें पारंपरिक हथकरघा उपकरणों तथा हस्तनिर्मित वस्त्रों का सुंदर संयोजन प्रदर्शित किया जाएगा। इससे आगंतुकों को हथकरघा उद्योग की समृद्ध विरासत और तकनीकी विकास की जानकारी मिल सकेगी। बुनकर पुरस्कारों से होगा उत्कृष्ट शिल्प का सम्मान राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में राज्य स्तरीय बुनकर पुरस्कार भी प्रदान किए जाएंगे। इस अवसर पर प्रथम पुरस्कार के लिए जालोर के डूंगांव निवासी कानाराम को कॉटन एवं सिल्क साड़ी के उत्कृष्ट निर्माण के लिए सम्मानित किया जाएगा। द्वितीय पुरस्कार नागौर के टांकला निवासी सोहनराम को कलात्मक दरी के लिए तथा तृतीय पुरस्कार झालावाड़ के असनावर निवासी c धापूबाई को तोता गागरौनी डबल बेडशीट के लिए प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा सांत्वना पुरस्कार जोधपुर के सालावास निवासी दिनेश भोयरिया को पंजा दरी तथा बाड़मेर के इण्डारा निवासी ककू को टेबल कवर के उत्कृष्ट निर्माण के लिए सम्मानित किया जाएगा। समारोह में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के साथ बुनकर सेवा केंद्र, राजस्थान खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, राजसिको, रूड़ा, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्राफ्ट एंड डिज़ाइन, राजस्थान बुनकर संघ, राजस्थान राज्य हथकरघा विकास निगम तथा राष्ट्रीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान, जोधपुर की सहभागिता रहेगी। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के बारे में हथकरघा प्राचीन भारत की आर्थिक एवं सांस्कृतिक उत्कृष्टता का प्रतीक रहा है। प्राचीन काल में भारतीय हथकरघा वस्त्र पश्चिमी देशों के लिए आकर्षण के प्रमुख केंद्र रहे। अंग्रेजों के शासनकाल में स्वदेशी अपनाने के उद्देश्य से 7 अगस्त, 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में स्वदेशी आंदोलन का शुभारंभ किया गया था। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में भारत सरकार वर्ष 2015 से प्रतिवर्ष 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मना रही है। यह दिवस देश की समृद्ध बुनाई विरासत तथा बुनकरों के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक योगदान का सम्मान करने का अवसर है। चौथी अखिल भारतीय हथकरघा जनगणना (2019-20) के अनुसार देश में 35.22 लाख हथकरघा बुनकर एवं संबद्ध श्रमिक कार्यरत हैं, जिनमें 72 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं। राजस्थान में 8,770 बुनकर हथकरघा उद्योग से जुड़े हैं। प्रदेश कोटा डोरिया, पट्टू, खेस, रेजा, लट्ठा, बरड़ी, कंबल, लोई, शॉल, बगरू एवं सांगानेरी प्रिंटेड वस्त्र, दरियां और जाजम जैसे उत्कृष्ट हथकरघा उत्पादों के लिए देशभर में विशिष्ट पहचान रखता है।

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