मारुति सुजुकी ने रेलवे के जरिए 30 लाख वाहनों की डिलीवरी का बनाया रिकॉर्ड

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नई दिल्ली। भारत की सबसे बड़ी पैसेंजर व्हीकल निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने बुधवार को कहा कि उसने भारतीय रेलवे नेटवर्क के जरिए 30 लाख से अधिक वाहनों की डिलीवरी करके एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जो ग्रीन और अधिक टिकाऊ लॉजिस्टिक्स संचालन की दिशा में उसके प्रयासों को रेखांकित करता है। कंपनी ने कहा कि पिछले एक दशक में उसने अपने कुल आउटबाउंड लॉजिस्टिक्स में रेल परिवहन की हिस्सेदारी लगातार बढ़ाई है।
वित्त वर्ष 2014-15 में कुल वाहन डिस्पैच में रेल आधारित परिवहन की हिस्सेदारी केवल 5 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 26.5 प्रतिशत हो गई है।
मारुति सुजुकी ने बताया कि रेल द्वारा कुल 20 लाख से 30 लाख वाहनों की ढुलाई का सफर मात्र 21 महीनों में पूरा किया गया, जो कंपनी के इतिहास में रेलवे के जरिए 10 लाख अतिरिक्त वाहनों की सबसे तेज वृद्धि है।
इस उपलब्धि पर टिप्पणी करते हुए हिसाशी ताकेउची ने कहा कि यह उपलब्धि कंपनी की ग्रीन लॉजिस्टिक्स यात्रा में एक अहम कदम है।
उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से रेल आधारित माल ढुलाई लगभग नौ गुना बढ़ चुका है और अब यह कंपनी के कुल वाहन परिवहन का एक चौथाई से अधिक हिस्सा बन चुका है।
उन्होंने बताया कि कंपनी ने समर्पित ग्रीन लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 13,720 मिलियन रुपए से अधिक का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है।
ताकेउची ने सरकार की पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इस योजना ने इंटीग्रेटेड और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स के लिए मजबूत ढांचा तैयार किया है, जिससे उद्योगों को रेल आधारित माल परिवहन अपनाने में मदद मिली है।
आगे की योजना पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि कंपनी वित्त वर्ष 2030-31 तक रेल आधारित वाहन डिस्पैच की हिस्सेदारी को 35 प्रतिशत तक बढ़ाना चाहती है।
इसके अलावा, कंपनी अपनी आगामी खरखोदा मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में इन-प्लांट रेलवे साइडिंग भी स्थापित करेगी। कंपनी का कहना है कि इससे कार्बन उत्सर्जन कम होगा, ईंधन की बचत होगी और सड़कों पर ट्रैफिक दबाव भी घटेगा।
मारुति सुजुकी ने कहा कि वह भारत की पहली और एकमात्र पैसेंजर व्हीकल निर्माता कंपनी है, जिसके दो मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स (गुजरात के हंसलपुर और हरियाणा के मानेसर) में रेलवे साइडिंग की सुविधा मौजूद है।
ये दोनों सुविधाएं पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत विकसित की गई हैं।
कंपनी के अनुसार, इन दोनों इन-प्लांट रेलवे साइडिंग्स की संयुक्त वार्षिक डिस्पैच क्षमता 7.5 लाख वाहनों की है।
फिलहाल कंपनी का रेल नेटवर्क हब-एंड-स्पोक लॉजिस्टिक्स मॉडल के तहत 22 हब्स के जरिए देश के 600 से अधिक शहरों को सेवाएं प्रदान कर रहा है।
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