नई दिल्ली। APAAR का पूरा नाम ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री है। केंद्र सरकार की ओर से देशभर के राजकीय एवं प्राइवेट स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए ‘वन नेशन वन स्टूडेंट आईडी’ के तहत अपार आईडी (APAAR ID) कार्ड जेनरेट की जाती है। इस कार्ड के माध्यम से स्टूडेंट्स को आधार कार्ड के जैसे ही 12 अंकों का यूनिक नंबर प्राप्त होता है जो स्टूडेंट्स आईडी के रूप में कार्य करता है।
क्या है उद्देश्य
अपार आईडी बनाने का उद्देश्य नीति निर्माण और विश्लेषण के लिए शिक्षा संबंधी डेटा संग्रह में सुधार लाना है जिसे नई नीति 2020 के तहत लाया गया है। शिक्षा मंत्रालय और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से संबद्ध विद्यालयों को यह सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है कि छात्र सभी स्टूडेंट्स अपार आईडी के लिए रजिस्ट्रेशन करवाएं। हालांकि, स्कूल बिना छात्र के माता-पिता की अनुमति के अपार आईडी जेनरेट नहीं कर सकते हैं।
क्या APAAR है अनिवार्य?
अपार आईडी की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई डिटेल के मुताबिक APAAR अनिवार्य नहीं है। हालांकि, सरकार ने APAAR से छात्रों को मिलने वाले लाभ का बताया है ताकी ज्यादा से ज्यादा स्टूडेंट्स आईडी बनायें। केंद्र सरकार ने दिसंबर 2024 में संसद के एक प्रश्न के उत्तर में भी APAAR ID वैकल्पिक बताया थे।
पेरेंट्स आईडी बनवाने से कर सकते हैं मना
अविभावक के पास स्कूलों को पत्र लिखकर अपने बच्चों के लिए APAAR आईडी बनवाने से मना करने का विकल्प है। सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर (SFLC) ने अपनी वेबसाइट पर एक टेम्पलेट उपलब्ध कराया है, जिसे योजना से बाहर निकलने के इच्छुक अभिभावक संपादित करके अपने स्कूलों को भेज सकते हैं।
स्कूल कैसे जेनरेट कर सकते हैं APAAR ID
स्कूल शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की अपार वेबसाइट apaar.education.gov.in पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं। आवेदन पत्र में छात्र का नाम, जन्मतिथि, जेंडर, मोबाइल नंबर, माता-पिता का नाम, आधार कार्ड नंबर आदि दर्ज करना होगा।



