भारत, बेल्जियम और लक्जमबर्ग एयरोस्पेस, रिसर्च और इनोवेशन में बढ़ाएंगे सहयोग

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नई दिल्ली। भारत, बेल्जियम और लक्जमबर्ग आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और एयरोस्पेस, अनुसंधान, नवाचार और उच्च शिक्षा के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाशने पर सहमत हुए हैं। यह जानकारी वाणिज्य मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को जारी एक बयान में दी गई। मंत्रालय के अनुसार, भारत-बेल्जियम-लक्जमबर्ग आर्थिक संघ (बीएलईयू) के संयुक्त आर्थिक आयोग (जेईसी) का 19वां सत्र लक्जमबर्ग में आयोजित किया गया। इस बैठक में भारत, बेल्जियम और लक्जमबर्ग के बीच द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश संबंधों की समीक्षा करने और प्रमुख क्षेत्रों में आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने के अवसरों पर चर्चा की गई। जेईसी की सह-अध्यक्षता वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल, बेल्जियम के संघीय विदेश मामले, विदेश व्यापार एवं विकास सहयोग मंत्रालय में भू-अर्थव्यवस्था एवं आर्थिक कूटनीति के महानिदेशक फिलिप वेंडेन बुल्के और लक्जमबर्ग के विदेश एवं यूरोपीय मामलों, रक्षा, विकास सहयोग एवं विदेश व्यापार मंत्रालय के महासचिव हेनरी शूमाकर ने की।
बैठक में कई प्रमुख क्षेत्रों पर व्यापक चर्चा हुई। इनमें लॉजिस्टिक्स, विशेष रूप से हवाई संपर्क और बंदरगाह, नवीकरणीय ऊर्जा एवं स्वच्छ प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाएं और फिनटेक, डिजिटल बदलाव एवं सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी), स्वास्थ्य सेवा एवं जीवन विज्ञान, आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा और कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग शामिल रहे।
बैठक में एयरोस्पेस, अनुसंधान एवं नवाचार, उच्च शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाशने का निर्णय लिया गया। व्यापार संबंधी चिंताओं को दूर करने, बाजार तक पहुंच आसान बनाने और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के अवसरों की पहचान करने के उद्देश्य से बाजार से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
जेईसी की बैठक में तीनों देशों को अपनी आर्थिक प्राथमिकताओं पर विचारों का आदान-प्रदान करने, विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा करने और कारोबारी भागीदारी एवं निवेश साझेदारी बढ़ाने के रास्ते तलाशने का अवसर मिला। चर्चा में भारत, बेल्जियम और लक्जमबर्ग के बीच पारस्परिक रूप से लाभकारी आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर संवाद और सहयोग के महत्व को दोहराया गया।
जेईसी सत्र के बाद राजेश अग्रवाल ने लक्जमबर्ग स्थित कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) के साथ बातचीत की। उन्होंने भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि और निवेश क्षमता को रेखांकित किया। साथ ही वित्तीय सेवाओं, उन्नत विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा तथा अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया।
मंत्रालय के बयान में कहा गया कि उन्होंने लक्जमबर्ग की कंपनियों को दीर्घकालिक निवेश, प्रौद्योगिकी साझेदारी और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारतीय कंपनियों के साथ जुड़ने के अवसर तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया।

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