इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन के मुख्य सचिव ने दिए निर्देश

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जयपुर। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने गुरुवार को सचिवालय में इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि राजस्थान देश में अक्षय ऊर्जा उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है और इन ट्रांसमिशन परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन राज्य में उत्पादित सौर एवं पवन ऊर्जा को राष्ट्रीय ग्रिड तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सीकर, झुंझुनूं, बाड़मेर, बालोतरा, जैसलमेर तथा फलोदी जिलों में निर्माणाधीन इन ट्रांसमिशन परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं की समीक्षा करते हुए संबंधित जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि राइट ऑफ वे (RoW), वन स्वीकृति, स्थानीय समन्वय सहित अन्य लंबित प्रशासनिक मामलों का शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि परियोजनाओं का कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरा हो सके। बैठक में 765 केवी फतेहगढ़-III–ब्यावर (द्वितीय), 400 केवी फतेहगढ़-3–भड़ला-3, 765 केवी सीकर–खेतड़ी तथा 765 केवी सीकर–नरेला ट्रांसमिशन परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़े संबंधित जिलों के जिला कलेक्टरों ने बताया कि उनके-अपने जिलों में इन परियोजनाओं के अंतर्गत अधिकांश निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है तथा शेष कार्य प्रगति पर है। कुछ स्थानों पर राइट ऑफ वे, वन स्वीकृति तथा स्थानीय समन्वय से जुड़े मुद्दे लंबित हैं, जिनके समाधान के लिए जिला प्रशासन स्तर पर आवश्यक कार्यवाही की जा रही है। बैठक में ऊर्जा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अजिताभ शर्मा, प्रबंध निदेशक राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम (आरवीपीएन) सिद्धार्थ सिहाग, पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के अधिकारी उपस्थित रहे, जबकि सीकर, झुंझुनूं, बाड़मेर, बालोतरा, जैसलमेर और फलोदी जिलों के जिला कलेक्टर एवं अन्य अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़े।

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