-बाल मुकुन्द ओझा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मन की बात रेडियो कार्यक्रम के 135वें संस्करण के दौरान कैच द रेन अभियान की गति को बनाए रखने का आह्वान किया था। कैच द रेन अभियान का उद्देश्य बारिश की प्रत्येक बूंद को सहेजकर जल संकट का स्थायी समाधान तैयार करना है। हमारे देश में मानसून की बारिश के साथ कैच द रैन ने जोर पकड़ लिया है। मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है कि इस वर्ष देश में बंपर बारिश हो सकती है। इस अच्छी बारिश का संचय कर पेयजल संकट से निपटने के साथ खेतों में बंपर पैदावार हासिल की जा सकती है।
आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने जल संरक्षण के लिए ‘कैच द रेन’ अभियान को तेज करते हुए देश भर के शहरों में 1.21 लाख एकड़ जलाशयों का पुनर्निर्माण शुरू किया है। इस अभियान के तहत 27 राज्यों के 900 शहरी स्थानीय निकायों को जल सुरक्षा मजबूत करने के काम में लगाया गया है। देश के विभिन्न शहरों में भूजल स्तर सुधारने के लिए 2.72 लाख से अधिक रिचार्ज स्ट्रक्चर तैयार किए जा रहे हैं। अमृत 2.0 के अंतर्गत देश भर के शहरों में 1.21 लाख एकड़ पुराने जलाशयों को पुनर्जीवित किया जा रहा है।
वर्षा के जल को किसी खास माध्यम से संचय करने या इकट्ठा करने की प्रक्रिया को वर्षा जल संचयन कहा जाता है। विश्व भर में पेयजल की कमी एक संकट बनती जा रही है। इसका कारण पृथ्वी के जलस्तर का लगातार नीचे जाना भी है। इसके लिये अधिशेष मानसून अपवाह जो बहकर सागर में मिल जाता है, उसका संचयन और पुनर्भरण किया जाना आवश्यक है ताकि भूजल संसाधनों का संवर्धन हो पाये। अकेले भारत में ही व्यवहार्य भूजल भण्डारण का आकलन 214 बिलियन घन मी. (बीसीएम) के रूप में किया गया है जिसमें से 160 बीसीएम की पुन प्राप्ति हो सकती है। इस समस्या का एक समाधान जल संचयन है। यहाँ सवाल यह उत्पन्न होता है की भारी मात्रा में मानसूनी जल उपलब्ध होने के बावजूद हम जल संकट सामना क्योंकर कर रहे है। इसका जवाब है हमने अपने परंरागत जल श्रोत समाप्त कर दिए। भारत को कुए ,बावड़ी टांकों और तालाबों का देश कहा जाता है। यहाँ लाखों की संख्या में परंपरागत जल श्रोत थे। नदियां हर समय पानी से लबालब भरी होती थी। इसके बावजूद हम जल समस्या का सामना कर रहे है। यह समस्या हर साल गहराती जा रही है। खेत तो दूर की बात पीने को भी पानी नहीं मिल रहा है। यही कारण है की भारत सरकार ने जल शक्ति मंत्रालय का गठन कर जल संचयन का बीड़ा उठाया है। हमारे देश में हर साल मानसून में बहुत सा पानी व्यर्थ बह जाता है जिसके संचयन की कारगर व्यवस्था अब तक नहीं खोजी जा सकी है। साल भर में होने वाली बारिश का कम से कम 31 प्रतिशत पानी धरती के भीतर रिचार्ज के लिए जाना चाहिए। जब की केवल 13 प्रतिशत पानी ही धरती में समाता है। रिचार्ज नहीं होने की वजह से भूगर्भ में पानी की कमी हो जाती है और उसका खामियाजा हमें भुगतना पड़ता है।
हमारे देश में सूखा और बाढ़ की अजब गजब स्थिति है। देश के किसी भाग में सूखा तो किसी में बाढ़ अक्सर हम देखते है। यह समय मानसून का है और मानसून ने देश में प्रवेश कर लिया है। भारत सरकार द्वारा कैच द रैन कार्यक्रम के तहत वर्षा जल संचयन अभियान देश भर में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में चलाया जा रहा है और इसका नारा है जहां भी गिरे और जब भी गिरे, वर्षा का पानी इकट्ठा करें। नीति आयोग के अनुसार, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग को जल संरक्षण और भूजल को रिचार्ज करने का एक सरल, व्यवहारिक और पर्यावरण के अनुकूल तरीका माना जाता है। ऐसे में देश के कई राज्यों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य बना दिया गया है। शहरी विकास मंत्रलय के मुताबिक प्रति 100 स्क्वायर मीटर क्षेत्र की छत से हर साल 55,000 लीटर तक जल का संरक्षण किया जा सकता है।
सरकार को जनता में जागरूकता लाने के लिए विशेष प्रबन्ध और उपाय करने होंगे। है। आम आदमी को जल संरक्षण एवं समझाइश के माध्यम से पानी की बचत का सन्देश देना होगा। वर्षा की अनियमितता और भूजल दोहन के कारण भी पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। आवश्यकता इस बात की है कि हम जल के महत्व को समझे और एक-एक बूंद पानी का संरक्षण करें तभी लोगों की प्यास बुझाई जा सकेगी।
कैच द रैन अभियान : 1.21 लाख एकड़ जलाशयों का होगा पुनर्निर्माण
ram


