इच्छा मृत्यु केवल कानून ही नहीं, मानवीय गरिमा का प्रश्न...
-ः ललित गर्ग भारतीय समाज में यह गहरी धारणा रही है कि परिवार के किसी सदस्य की सेवा तब तक की जाए, जब तक उसके प्राण स्वाभाविक रूप से समाप्त न हो जाएं। जीवन की रक्षा और उसकी देखभाल को एक नैतिक कर्तव्य के रूप में देखा जाता रहा है। यही ...


