ई-वेस्ट का जिम्मेदार प्रबंधन और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली के साथ मनाएं हर त्योहार – सदस्य सचिव, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल

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जयपुर। पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने तथा सतत जीवनशैली को दैनिक व्यवहार का हिस्सा बनाने के उद्देश्य से राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा आयोजित ‘ब्रिक्स सस्टेनेबल लाइफस्टाइल वीक’ के अंतर्गत विभिन्न जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में सप्ताह के छठे दिन 6 नवंबर को जयपुर स्थित राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (आरआईसी) में राज्य स्तरीय ई-वेस्ट कलेक्शन कार्यशाला एवं संग्रहण अभियान आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास करेंगे। उक्त संबंध में गुरुवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंडल के सदस्य सचिव श्री कपिल चंद्रवाल ने बताया कि वर्तमान डिजिटल युग में इलेक्ट्रॉनिक एवं इलेक्ट्रिकल उपकरणों का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इसके साथ ही ई-वेस्ट का वैज्ञानिक प्रबंधन एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय चुनौती बनकर उभरा है। मोबाइल फोन, कंप्यूटर, लैपटॉप, चार्जर एवं अन्य अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का अनुचित निस्तारण मिट्टी, जल एवं पर्यावरण को प्रभावित कर सकता है। सदस्य सचिव ने कहा कि सतत जीवनशैली की शुरुआत हमारे दैनिक जीवन में किए जाने वाले छोटे-छोटे बदलावों से होती है। ई-वेस्ट का उचित संग्रहण, अधिकृत माध्यमों से पुनर्चक्रण और संसाधनों का पुनः उपयोग पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। ब्रिक्स सस्टेनेबल लाइफस्टाइल वीक के माध्यम से मंडल का प्रयास है कि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी केवल संस्थानों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बने। उन्होंने कहा कि यह सप्ताह केवल आयोजनों और सामूहिक प्रयासों तक सीमित न रहे, बल्कि इसके संदेश को प्रत्येक व्यक्ति अपनी दिनचर्या में अपनाए। राज्य स्तरीय ई-वेस्ट कलेक्शन अभियान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला के माध्यम से ई-वेस्ट के पृथक्करण, सुरक्षित संग्रहण, अधिकृत पुनर्चक्रण एवं वैज्ञानिक निस्तारण के संबंध में जागरूकता विकसित की जाएगी। साथ ही संसाधनों के पुनः उपयोग और सर्कुलर इकोनॉमी की अवधारणा को प्रोत्साहित किया जाएगा।

प्रदूषण मुक्त दीपावली के लिए मीडिया से सहयोग की अपील
मंडल के मुख्य पर्यावरण अभियंता श्री विष्णु दत्त पुरोहित ने मीडिया प्रतिनिधियों से प्रदूषण मुक्त दीपावली के संदेश को व्यापक स्तर पर आमजन तक पहुंचाने में सक्रिय सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि जन-जागरूकता के माध्यम से ही पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को जन आंदोलन का स्वरूप दिया जा सकता है। उन्होंने मीडिया से आग्रह किया कि पर्यावरण अनुकूल दीपावली, स्वच्छता, कचरे के उचित निस्तारण तथा प्रदूषण नियंत्रण के प्रति नागरिकों को जागरूक करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान नागरिकों की छोटी-छोटी सावधानियां वायु एवं ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। मंडल द्वारा इस दिशा में निरंतर जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

वायु एवं ध्वनि प्रदूषण की निगरानी के लिए मंडल की विशेष व्यवस्था
मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी श्रीमती शीबा ने दीपावली के दौरान वायु एवं ध्वनि प्रदूषण की निगरानी के लिए मंडल द्वारा किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों एवं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के निर्देशों की पालना में मंडल द्वारा प्रदेश के विभिन्न शहरों में स्थापित 50 सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों (CAAQMS) के माध्यम से वायु गुणवत्ता की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। उन्होंने बताया कि सदस्य सचिव श्री कपिल चंद्रवाल के निर्देशानुसार क्षेत्रीय अधिकारियों को दीपावली से पूर्व एवं दीपावली के दौरान विशेष निगरानी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम (NAMP) के अंतर्गत संचालित निगरानी केंद्रों पर भी 24 घंटे के आधार पर वायु गुणवत्ता की निगरानी की जाएगी। मंडल द्वारा अलवर, भिवाड़ी, कोटा, जयपुर, जोधपुर एवं उदयपुर में विशेष परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी की जा रही है। इन शहरों में निर्धारित निगरानी स्थलों पर 1 से 15 नवंबर, 2026 तक वायु गुणवत्ता के विभिन्न मानकों की जांच की जाएगी। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम के अंतर्गत अन्य निर्धारित केंद्रों पर भी विशेष निगरानी की जाएगी। इसके तहत दीपावली से पूर्व 1 नवंबर, 2026 प्रातः 6 बजे से 2 नवंबर, 2026 प्रातः 6 बजे तक तथा दीपावली के दौरान 8 नवंबर, 2026 प्रातः 6 बजे से 9 नवंबर, 2026 प्रातः 6 बजे तक वायु गुणवत्ता के आंकड़े संकलित किए जाएंगे। श्रीमती शीबा ने बताया कि विशेष निगरानी के दौरान सूक्ष्म कण पदार्थ पीएम-10 एवं पीएम-2.5, सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) सहित अन्य निर्धारित प्रदूषक तत्वों का विश्लेषण किया जाएगा। साथ ही पीएम-10 में सीसा, निकेल एवं आर्सेनिक जैसी धातुओं तथा पीएम-2.5 में एल्युमिनियम, बेरियम एवं लौह तत्वों के विश्लेषण के लिए निर्धारित तकनीकी दिशा-निर्देशों की पालना सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने ध्वनि प्रदूषण के संबंध में बताया कि दीपावली के दौरान निर्धारित मानकों के अनुरूप ध्वनि स्तर की निगरानी भी महत्वपूर्ण है। इस दिशा में मंडल द्वारा ध्वनि प्रदूषण की मॉनिटरिंग एवं संबंधित मानकों के अनुपालन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आमजन को ध्वनि प्रदूषण के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के साथ निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

ई-वेस्ट कलेक्शन अभियान में जनभागीदारी जरूरी
मंडल के अतिरिक्त मुख्य पर्यावरण अभियंता श्री भुवनेश माथुर ने ई-वेस्ट कलेक्शन अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बढ़ते उपयोग के साथ उनके अनुपयोगी होने पर सुरक्षित निस्तारण की जिम्मेदारी भी बढ़ी है। आमजन को ई-वेस्ट के प्रति जागरूक होना आवश्यक है, ताकि अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को घरेलू कचरे के साथ फेंकने के बजाय अलग एकत्रित कर अधिकृत संग्रहण एवं पुनर्चक्रण माध्यमों तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने बताया कि 6 नवंबर को आरआईसी में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय ई-वेस्ट कलेक्शन कार्यक्रम का उद्देश्य नागरिकों, संस्थानों एवं विभिन्न हितधारकों को ई-वेस्ट के जिम्मेदार प्रबंधन के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने आमजन से अपने घरों एवं कार्यालयों में जमा अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को निर्धारित संग्रहण अभियान में उपलब्ध कराने तथा ई-वेस्ट के वैज्ञानिक निस्तारण के प्रति जागरूक रहने की अपील की।

पर्यावरण अनुकूल दीपावली मनाने का संदेश
मंडल द्वारा ब्रिक्स सस्टेनेबल लाइफस्टाइल वीक के अंतर्गत दीपावली के अवसर पर विशेष जन-जागरूकता अभियान भी संचालित किया जा रहा है। इसके माध्यम से आमजन को सिंगल यूज प्लास्टिक एवं अनावश्यक पैकेजिंग से बचने, पुनः उपयोग योग्य सजावटी सामग्री अपनाने तथा त्योहार के दौरान उत्पन्न होने वाले कचरे का उचित पृथक्करण एवं निस्तारण करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सदस्य सचिव श्री कपिल चंद्रवाल ने कहा कि दीपावली प्रकाश, खुशियों और सकारात्मकता का पर्व है। इसे पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता के साथ मनाना भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। मिट्टी के दीपकों का उपयोग, ऊर्जा की बचत, कम कचरा उत्पादन और स्वच्छता के प्रति सजगता जैसे छोटे प्रयास पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने आमजन एवं मीडिया प्रतिनिधियों से अपील की कि वे ई-वेस्ट का निस्तारण केवल अधिकृत माध्यमों से करें तथा दीपावली पर पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाकर स्वच्छता और प्रदूषण नियंत्रण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं। मंडल का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, जिम्मेदार उपभोग, अपशिष्ट प्रबंधन एवं नागरिक सहभागिता को प्रोत्साहित करते हुए स्वच्छ, हरित एवं सतत राजस्थान के निर्माण में जनभागीदारी सुनिश्चित करना है।

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