गरीबी मुक्त भारत : सपनों से संकल्प तक

ram

-सुनील कुमार महला।

गरीबी, भुखमरी, असमानता और सामाजिक बहिष्कार को समाप्त करने के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रतिवर्ष 17 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस मनाया जाता है। यहां इस आलेख में सबसे पहले हम यह समझने का प्रयास करते हैं कि आखिर गरीबी से तात्पर्य या मतलब क्या है? तो इसका सीधा सा उत्तर यह है कि गरीबी वह स्थिति है, जिसमें कोई व्यक्ति या परिवार भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी जीवन की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं जुटा पाता। दूसरे शब्दों में कहें तो गरीबी केवल धन की कमी नहीं है, बल्कि यह सम्मानजनक जीवन जीने, समान अवसर पाने और समाज की मुख्यधारा में शामिल होने की क्षमता को भी प्रभावित करती है। यहां निष्कर्ष के तौर पर यह बात कही जा सकती है कि गरीबी केवल धन का अभाव नहीं, बल्कि बुनियादी सुविधाओं, अवसरों, अधिकारों और सम्मानजनक जीवन से वंचित होने की स्थिति भी है। वास्तव में सच तो यह है कि गरीबी का प्रभाव व्यक्ति के साथ-साथ उसके परिवार, बच्चों और आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ता है।

देश और समाज के लिए गंभीर चुनौती: गरीबी –

बहरहाल, यहां पर यह कहना ग़लत नहीं होगा कि गरीबी, भुखमरी, असमानता और सामाजिक बहिष्कार आज भी हमारे समाज में विद्यमान गंभीर चुनौतियाँ हैं। गरीबी के कारण लाखों लोग भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं। वहीं पर भुखमरी और कुपोषण बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास को प्रभावित करते हैं, जबकि आर्थिक और सामाजिक असमानता अवसरों तक समान पहुँच में बाधा बनती है। सामाजिक बहिष्कार के कारण वंचित वर्ग के लोग समाज की मुख्यधारा से दूर रह जाते हैं। वास्तव में, इन समस्याओं का समाधान केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि समान अवसर, सामाजिक न्याय, जागरूकता और सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। एक समतामूलक समाज वही है, जहाँ किसी व्यक्ति की पहचान उसकी गरीबी नहीं, बल्कि उसकी प्रतिभा और मानवीय गरिमा से हो। विश्व और भारत में गरीबी आज भी एक गंभीर सामाजिक-आर्थिक चुनौती है। आंकड़ों की बात करें तो विश्व बैंक के सितंबर 2026 के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2024 में दुनिया के लगभग 82.43 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी में जीवनयापन कर रहे थे। भारत में विश्व बैंक की 3 डॉलर प्रतिदिन की अंतरराष्ट्रीय गरीबी-रेखा के आधार पर वर्ष 2022–23 में अत्यधिक गरीबी की दर 5.3 प्रतिशत थी। वहीं, नीति आयोग के अनुसार, भारत में बहुआयामी गरीबी की दर 2022–23 में अनुमानतः 11.28 प्रतिशत रही। ये आँकड़े गरीबी में आई कमी को दर्शाते हैं, लेकिन भोजन, पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन के समान अवसर सुनिश्चित करने की चुनौती अब भी बनी हुई है। आंकड़े बताते हैं कि भारत में लगभग 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए। यहां पाठकों को बताता चलूं कि (नीति आयोग के अनुमानों के अनुसार) वर्ष 2013–14 से 2022–23 के दौरान भारत में लगभग 24.82 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए। इस अवधि में बहुआयामी गरीबी की दर 29.17 प्रतिशत से घटकर 11.28 प्रतिशत रह गई।

सरकार द्वारा गरीबी उन्मूलन के लिए किए जा रहे प्रमुख प्रयास:-

हाल फिलहाल यहां पाठकों को जानकारी देना चाहूंगा कि भारत में गरीबी कम करने के लिए सरकार खाद्य सुरक्षा, रोजगार, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता पर एक साथ काम कर रही है और यही कारण भी है कि हमारे देश में लगभग 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए हैं। गौरतलब है कि आज प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत लगभग 81.35 करोड़ लाभार्थियों को निःशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे गरीब परिवारों की भोजन संबंधी जरूरतों और घरेलू खर्च का बोझ कम करने में मदद मिल रही है और इस योजना के तहत निःशुल्क खाद्यान्न वितरण 31 दिसंबर 2028 तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है। वहीं पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण और शहरी गरीब परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं और एक उपलब्ध जानकारी के अनुसार ग्रामीण आवास योजना के अंतर्गत वर्ष 2029 तक कुल 4.95 करोड़ घर उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित है। इसके अलावा, ग्रामीण परिवारों को रोजगार और आजीविका उपलब्ध कराने के लिए रोजगार गारंटी कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं तथा दिसंबर 2025 में जारी सरकारी विवरण में विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम के तहत ग्रामीण परिवारों के लिए प्रति वर्ष 125 दिन तक रोजगार की गारंटी का उल्लेख है। इतना ही नहीं, आज दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर बचत, बैंक ऋण, स्वरोजगार और छोटे उद्यमों के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य परिवारों की नियमित आय बढ़ाना है। आयुष्मान भारत और स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत पात्र परिवारों को अस्पताल में उपचार के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती है, जिससे बीमारी के कारण परिवारों पर पड़ने वाले भारी आर्थिक बोझ को कम करने में मदद मिलती है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने तो गरीब परिवारों की महिलाओं को एलपीजी गैस कनेक्शन उपलब्ध कराकर स्वच्छ ईंधन तक पहुँच बनाकर रसोई की तस्वीर तक बदल दी है और इस योजना के कारण आज 10.5 करोड़ से ज्यादा घरों में एलपीजी सिलेंडर पहुंच चुका है। वहीं पर विभिन्न बुनियादी सुविधाएं जैसे कि जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, ग्रामीण सड़क निर्माण, बिजली और सामाजिक सुरक्षा जैसी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से गरीब परिवारों के जीवन स्तर को सुधारने का प्रयास किया जा रहा है, यह काबिले-तारीफ है। आज देश में कौशल विकास और रोजगारपरक प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया गया है तथा इस क्रम में आज दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना तथा ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से युवाओं को रोजगार योग्य कौशल, प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर दिए जा रहे हैं।

अंत में यही कहूंगा कि गरीबी उन्मूलन के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पर्याप्त रोजगार, खाद्य एवं स्वास्थ्य सुरक्षा, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक समानता सुनिश्चित करना आवश्यक है; सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुँचाकर तथा स्वरोजगार और कौशल विकास को बढ़ावा देकर लोगों को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है, और सरकार व समाज के संयुक्त प्रयासों से ही गरीबी, भुखमरी और असमानता को कम कर एक समतामूलक समाज का निर्माण संभव है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *