दुर्गा अष्टमी पर कन्या पूजन : नारी शक्ति की आराधना का महापर्व

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बाल मुकुन्द ओझा
शारदीय नवरात्रि की अष्टमी को महा अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा होती है। कहते हैं नवरात्रि के आठवें दिन जो भी भक्त मां की सच्चे मन से आराधना करता है उसके सारे दुख दूर हो जाते हैं और उसके जीवन में सब मंगल ही मंगल होता है। देवी के इस स्वरूप का रंग अत्याधिक गोरा है इसलिए उन्हें महागौरी के नाम से जाना गया है। लेकिन इस बार नवरात्रि की अष्टमी कब मनाई जाएगी इसे लेकर काफी असमंजस चल रहा है। इस साल कहीं 18 अक्टूबर को दुर्गा अष्टमी मनाए जाने की बात सामने आ रही है तो कहीं 19 अक्टूबर को। दोनों दिन ही शुभ है। कन्या पूजन कोई अष्टमी को करता है तो कोई नवमी के दिन। अगर आप अष्टमी पूजते हैं तो कन्या पूजन 18 अक्टूबर को करें और यदि आप नवमी पूजते हैं तो कन्या पूजन 19 अक्टूबर को करें।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब महागौरी की उत्पत्ति हुई उस समय उनकी उम्र आठ साल थी इसलिए इनकी पूजा अष्टमी के दिन की जाती है। ये सुख और शान्ति की देवी भी कहलाती है। माँ दुर्गा की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है। इनकी शक्ति अमोघ और फलदायिनी है। नवरात्रि में आठवें दिन महागौरी की पूजा की जाती है। इनका रूप पूर्णतः गौर वर्ण है। इनकी उपमा शंख, चंद्र और कुंद के फूल से दी गई है। देवी दुर्गा के नौ रूपों में महागौरी आठवीं शक्ति स्वरूपा हैं। महाष्टमी के दिन मां महागौरी की आराधना करने से सुख और समृद्धि के साथ सौभाग्य की प्राप्ति होती है। भक्तों के सभी दुख दूर हो जाते हैं, वह पापमुक्त हो जाते हैं। महागौरी की चार भुजाएं होती हैं। जिसमें से दो भुजाओं में उनके शस्त्र होते हैं और दो भुजाएं आशीर्वाद देती हुई प्रतीत होती हैं। इनका वर्ण सफेद और देखने में अत्यंत सुन्दर है, इसीलिए इनका नाम महागौरी है। इनकी सवारी एक सफेद बैल है और इनके वस्त्र भी सफेद हैं। अष्टमी की तिथि के दिन महागौरी मां दुर्गा की पूजा से भक्तों के सभी तरह के पाप और कष्ट दूर हो जाते है।
प्राचीन कथा के अनुसार जब देवी सती भगवान् शिव को पति रूप में प्राप्त करने हेतु तपस्या में लीन थीं, तो उनके सम्पूर्ण शरीर पर मिट्टी जम गयी थी। कठोर तपस्या के कारण माता का शरीर काला पड़ गया था। अंततरू देवी की तपस्या से प्रसन्न होने के पश्चात्क भगवान शिव उन्हें स्वीकार करते हैं। उस समय देवी सती ने जब गंगा जल में स्नान किया तब वह विद्युत के समान अत्यंत कांतिमान गौर वर्ण की हो जाती हैं। तब देवी के इस स्वरूप को भगवान शिव ने महागौरी का नाम दिया।
नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा करने से सभी पाप धुल जाते है। जिससे मन और शरीर हर तरह से शुद्ध हो जाता है। देवी महागौरी भक्तों को सदमार्ग की ओर ले जाती है। इनकी पूजा से अपवित्र व अनैतिक विचार भी नष्ट हो जाते हैं। देवी दुर्गा के इस सौम्य रूप की पूजा करने से मन की पवित्रता बढ़ती है। जिससे सकारात्मक ऊर्जा भी बढ़ने लगती है। देवी महागौरी की पूजा करने से मन को एकाग्र करने में मदद मिलती है। इनकी उपासना से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। हमारी धार्मिक परंपरा में नारी को शक्ति का स्वरूप माना गया है। मां दुर्गा को आदिशक्ति के रूप में पूजा जाता है और छोटी कन्याओं में भी देवी के स्वरूप की कल्पना की जाती है। इसी आस्था के कारण नवरात्रि के अंत में कन्या पूजन किया जाता है।
नवरात्रि के दसों दिन कुवारी कन्या भोजन कराने का विधान है परंतु अष्टमी के दिन का विशेष महत्व है। इस दिन महिलाएं अपने सुहाग के लिए देवी मां को चुनरी भेंट करती हैं। देवी गौरी की पूजा का विधान भी पूर्ववत है अर्थात जिस प्रकार सप्तमी तिथि तक आपने मां की पूजा की है उसी प्रकार अष्टमी के दिन भी देवी की पंचोपचार सहित पूजा करें।

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