ब्यावर में कलेक्टर की जनसुनवाई के मिल रहे सार्थक परिणाम: पत्नी के इलाज के लिए आर्थिक मदद और एम्बुलेंस की व्यवस्था मिली, डेढ़ माह के इलाज के बाद स्वास्थ्य में सुधार, कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुकेश ने जताया आभार

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जयपुर। मुश्किल वक्त में जब अपनों के अलावा किसी से मदद की उम्मीद नहीं होती, तब शासन—प्रशासन का साथ किसी सहारे से कम नहीं होता। ब्यावर के शाहपुरा मोहल्ला निवासी मुकेश वैष्णव और उनकी पत्नी विमला देवी के लिए जिला प्रशासन की संवेदनशील पहल ऐसी ही मददगार साबित हुई। साधन संसाधन में सबसे कमजोर व्यक्ति को सबसे पहले मदद देकर अंत्योदय के सिद्धान्त को व्यवहार में लाने के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संकल्प को समझना है तो मुकेश के साथ घटी घटना के पहलुओं पर गौर करना होगा। मुकेश की पत्नी विमला देवी करीब पांच-छ: वर्ष पहले मोटरसाइकिल दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गई, हादसे के बाद उनके पैरों में संक्रमण हो गया और धीरे-धीरे उनका चलना-फिरना पूरी तरह बंद हो गया। संक्रमण बढ़ने पर एम्स, जोधपुर में घाव का उपचार कराया गया लेकिन स्थिति गंभीर होने और गैंगरीन सहित अन्य स्वास्थ्य समस्याएं सामने आने के बाद वर्ष 2022 में विक्टोरिया अस्पताल, अजमेर में उनका पैर काटना पड़ा। मुकेश ने बताया कि पत्नी की तबीयत अक्सर खराब रहती है और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर है। आर्थिक परेशानियों के बीच पत्नी के इलाज को लेकर वे बेहद चिंतित थे। इसी दौरान उन्होंने अपनी समस्या जनसुनवाई में जिला कलक्टर कमल राम मीना के समक्ष रखी। जनसुनवाईयों का इतिहास पुराना है। शासन की हर प्रणाली में जनसुनवाई होती रही हैं लेकिन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पद की शपथ लेने के प्रथम दिन से ही जनसुनवाई को गरीब और वंचित की पीड़ा को हरने का माध्यम बनाने का फैसला लिया और मंत्रियों और अधिकारियों को जन की बात सुन कर समाधान निकालने के निर्देश दिए और इस निर्देश की पालना की निगरानी की पुख्ता व्यवस्था की।.

मदद मिली तो इलाज की राह आसान हुई
जिला कलक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई, साथ ही विमला देवी को एम्बुलेंस से ब्यावर से जोधपुर एम्स तक भेजा, जहां करीब डेढ़ माह से अधिक समय तक उपचार चला। उपचार के बाद अब उनके स्वास्थ्य में सुधार है। लाज के बाद पत्नी के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे मुकेश वैष्णव ने जिला कलक्टर कमल राम मीना से मुलाकात कर धन्यवाद और आभार जताया। उन्होंने कहा कि पत्नी की बीमारी और आर्थिक संकट के कठिन दौर में जिला प्रशासन से मिली मदद ने उन्हें बड़ा संबल दिया। मुकेश की आंखों में राहत और चेहरे पर संतोष था। उन्होंने कहा कि दुख की घड़ी में जिला कलक्टर ने जिस संवेदनशीलता के साथ मदद की, उसे वे कभी नहीं भूलेंगे। मुकेश और विमला की यह सच्ची कहानी बताती है कि शासन जब ईमानदारी और दृढ़ता के साथ संकल्प लेता है तो प्रशासन दिन—रात जनसेवा कर जन को तंत्र के साथ अधिक मजबूती के साथ जोड़ता है, जन का तंत्र के साथ सहयोग, भागीदारी बढ़ती है।

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