विशाखापट्टनम। सात साल की शैक्षणिक यात्रा के बाद विश्वविद्यालय ने 30 जून 2026 को अपने सफर में एक नया अध्याय जोड़ा। विशाखापट्टनम के वी कन्वेंशन सेंटर, नोवोटेल में पहली बार दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया और विद्यार्थियों को संबोधित किया।
समारोह में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर सहित राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री भी मौजूद रहे। इस मौके पर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को पहली बार औपचारिक रूप से डिग्री और प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
जनजातीय शिक्षा को स्थानीय विकास से जोड़ने की जरूरत
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संबोधन में जनजातीय समुदायों की पारंपरिक जानकारी और आधुनिक शिक्षा के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि जनजातीय युवाओं की शिक्षा को उनकी संस्कृति और स्थानीय ज्ञान से जोड़े रखना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने वनोपज, हस्तशिल्प, मिलेट, औषधीय पौधों, ईको-टूरिज्म और स्थानीय उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में शोध और नवाचार को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इन क्षेत्रों को जनजातीय समुदायों की आजीविका और क्षेत्रीय विकास से जोड़कर देखा जा सकता है।
राष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय से यह अपेक्षा भी जताई कि शिक्षा विद्यार्थियों को केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित न रखे, बल्कि उनके लिए रोजगार, उद्यमिता और स्थानीय स्तर पर विकास के नए अवसर तैयार करने में भी मददगार बने।
पहली बार विद्यार्थियों को मिली औपचारिक डिग्री
पहला दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय के लिए इसलिए भी खास रहा क्योंकि स्थापना के बाद सात साल की अवधि में पहली बार विद्यार्थियों को औपचारिक रूप से डिग्री और प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। विद्यार्थियों के लिए यह उनकी शैक्षणिक मेहनत को औपचारिक पहचान मिलने का महत्वपूर्ण अवसर रहा।
विश्वविद्यालय के अनुसार, इस पहले दीक्षांत समारोह तक उसकी अकादमिक गतिविधियों का विस्तार 13 विभागों तक हो चुका था। यहां स्नातक, स्नातकोत्तर, एकीकृत और शोध स्तर के विभिन्न कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे थे।
अकादमिक विस्तार के साथ नई जिम्मेदारी
पहला दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय की अब तक की विकास यात्रा को सामने लाने के साथ भविष्य की जिम्मेदारियों की ओर भी संकेत करता है। खासतौर पर जनजातीय क्षेत्रों में उच्च शिक्षा को स्थानीय जरूरतों, परंपरागत ज्ञान और रोजगार के अवसरों से जोड़ना विश्वविद्यालय की भूमिका को व्यापक बनाता है।
सात वर्ष में अकादमिक विभागों और पाठ्यक्रमों के विस्तार के बाद अब पहला दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आया।



