-शमशाबाद में बना एयरपोर्ट अब सिर्फ हवाई सफर का केंद्र नहीं, तेलंगाना की अर्थव्यवस्था, फार्मा, आईटी और लॉजिस्टिक्स का बड़ा गेटवे
हैदराबाद। कभी हैदराबाद की हवाई जरूरतों को पूरा करने वाला बेगमपेट एयरपोर्ट शहर के बढ़ते विस्तार और बढ़ते हवाई यातायात के सामने सीमित पड़ने लगा था। इसी जरूरत ने हैदराबाद को एक नए और आधुनिक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की ओर बढ़ाया और 2008 में शमशाबाद में राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (RGIA) ने आकार लिया। करीब दो दशक बाद यही एयरपोर्ट हैदराबाद की पहचान और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। 2008 में करीब 1.2 करोड़ यात्रियों की वार्षिक क्षमता के साथ शुरू हुआ यह एयरपोर्ट अब सालाना 3 करोड़ से अधिक यात्रियों को संभाल रहा है। आने वाले वर्षों में यात्री संख्या में और तेजी से वृद्धि का अनुमान है। एयरपोर्ट के मास्टर प्लान में दीर्घकालिक रूप से इसकी क्षमता 10 करोड़ से अधिक यात्रियों प्रतिवर्ष तक ले जाने की परिकल्पना की गई है।
2008 में शुरू हुआ था नया अध्याय
राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर विकसित किया गया। इसका संचालन GMR Hyderabad International Airport Limited (GHIAL) करता है। कंपनी में GMR Group की 74 प्रतिशत, Airports Authority of India की 13 प्रतिशत और तेलंगाना सरकार की 13 प्रतिशत हिस्सेदारी है। 14 मार्च 2008 को एयरपोर्ट का उद्घाटन हुआ। शुरुआत में यहां करीब 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने की क्षमता थी। एयरपोर्ट को भविष्य में बढ़ते हवाई यातायात को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया था। यही कारण है कि इसकी मूल संरचना में भविष्य के विस्तार की काफी गुंजाइश रखी गई।
यात्री संख्या ने बदली एयरपोर्ट की तस्वीर
हैदराबाद एयरपोर्ट पर पिछले कुछ वर्षों में यात्री संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। AERA के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2022 में करीब 1.24 करोड़ यात्री एयरपोर्ट से गुजरे थे। इसके बाद यह संख्या तेजी से बढ़ी और वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 3.05 करोड़ यात्रियों तक पहुंच गई। यानी कुछ वर्षों में ही यात्री संख्या दोगुने से भी अधिक हो गई। वर्तमान डिजाइन क्षमता करीब 3.4 करोड़ यात्री प्रतिवर्ष बताई गई है। ऐसे में यात्री संख्या के मौजूदा स्तर को देखते हुए भविष्य में क्षमता विस्तार एयरपोर्ट के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।
2030-31 तक 5 करोड़ से ज्यादा यात्री आने का अनुमान
हवाई यात्रियों की बढ़ती संख्या का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उपलब्ध ट्रैफिक अनुमानों के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 में यात्री संख्या करीब 3.69 करोड़ तक पहुंच सकती है। वित्त वर्ष 2030-31 तक यह संख्या करीब 5.15 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। यानी अगले कुछ वर्षों में ही एयरपोर्ट की मौजूदा क्षमता पर दबाव बढ़ना तय है। इसी को ध्यान में रखते हुए टर्मिनल और एयरसाइड इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार की योजनाओं पर काम किया जा रहा है।
4.26 किलोमीटर लंबा रनवे, बड़े विमानों की भी क्षमता
राजीव गांधी एयरपोर्ट की प्रमुख विशेषताओं में इसका लंबा रनवे भी शामिल है। एयरपोर्ट का मुख्य रनवे करीब 4,260 मीटर लंबा है। यह देश के लंबे रनवे में शामिल है और बड़े आकार के विमानों के संचालन के लिए उपयुक्त है। रनवे को इस तरह विकसित किया गया है कि एयरपोर्ट पर बड़े विमानों के संचालन के साथ भविष्य में बढ़ने वाले अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात को भी संभाला जा सके। एयरपोर्ट के मास्टर प्लान में भविष्य के लिए अतिरिक्त एयरसाइड इंफ्रास्ट्रक्चर और रनवे संबंधी विस्तार की भी परिकल्पना है।
एक ही टर्मिनल में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय सुविधा
हैदराबाद एयरपोर्ट की खासियत इसका इंटीग्रेटेड पैसेंजर टर्मिनल है। यहां घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए एयरपोर्ट परिसर को इस तरह व्यवस्थित किया गया है कि यात्रियों को अलग-अलग एयरपोर्ट भवनों के बीच जाने की जरूरत न पड़े। अंतरराष्ट्रीय प्रस्थान को भी मुख्य टर्मिनल में स्थानांतरित किया जा चुका है। इससे यात्रियों की आवाजाही आसान हुई है और घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिंग यात्रियों के लिए प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक बनी है।
घरेलू के साथ बढ़ रहा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क
हैदराबाद एयरपोर्ट से देश के प्रमुख शहरों के साथ-साथ विदेशों के अनेक शहरों के लिए उड़ानें संचालित होती हैं। हैदराबाद का आईटी, फार्मा, बिजनेस और पर्यटन क्षेत्र से जुड़ा महत्व बढ़ने के साथ अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क की भूमिका भी लगातार महत्वपूर्ण हुई है। एयरपोर्ट के नेटवर्क में घरेलू स्तर पर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता, अहमदाबाद, पुणे सहित अनेक प्रमुख शहर जुड़े हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मध्य-पूर्व, दक्षिण-पूर्व एशिया और अन्य प्रमुख विमानन बाजारों से कनेक्टिविटी है।
फार्मा उद्योग के लिए भी बड़ा केंद्र
हैदराबाद को देश के प्रमुख फार्मास्यूटिकल और लाइफ साइंस हब में गिना जाता है। इसका सीधा फायदा राजीव गांधी एयरपोर्ट के कार्गो कारोबार को मिलता है। एयरपोर्ट पर तापमान नियंत्रित दवाओं और वैक्सीन जैसे उत्पादों के लिए विशेष फार्मा कार्गो सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां कोल्ड-चेन आधारित लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था की गई है, ताकि संवेदनशील दवाओं को निर्धारित तापमान पर सुरक्षित तरीके से देश-विदेश तक पहुंचाया जा सके। फार्मा के अलावा एयर कार्गो में नाशवान खाद्य पदार्थ, फल-सब्जियां, समुद्री उत्पाद, पोल्ट्री, बीज और एक्सप्रेस कार्गो भी शामिल हैं।
2026 में शुरू हुआ नया कार्गो टर्मिनल-2
एयरपोर्ट की कार्गो क्षमता बढ़ाने के लिए वर्ष 2026 में Cargo Terminal-2 शुरू किया गया। करीब 16,864 वर्गमीटर में विकसित इस टर्मिनल की शुरुआती क्षमता करीब 50 हजार मीट्रिक टन प्रतिवर्ष है। भविष्य में इसे करीब एक लाख मीट्रिक टन सालाना तक बढ़ाने की क्षमता के साथ तैयार किया गया है। नए टर्मिनल में तापमान नियंत्रित क्षेत्र, फार्मा कार्गो के लिए विशेष व्यवस्था, आयात-निर्यात प्रक्रिया और आधुनिक रैकिंग जैसी सुविधाएं हैं। इससे हैदराबाद को दक्षिण भारत के बड़े एयर कार्गो हब के रूप में विकसित करने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।
यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाओं का पूरा पैकेज
राजीव गांधी एयरपोर्ट पर यात्रियों को आधुनिक हवाई अड्डे की लगभग सभी प्रमुख सुविधाएं उपलब्ध हैं। इनमें—
सेल्फ चेक-इन कियोस्क
सेल्फ बैगेज ड्रॉप
डिजिटल बोर्डिंग
इमिग्रेशन सुविधाएं
DigiYatra
फ्री वाई-फाई
एयरपोर्ट लाउंज
फूड कोर्ट और रेस्टोरेंट
ड्यूटी फ्री शॉपिंग
एटीएम और बैंकिंग सुविधा
मुद्रा विनिमय
मेडिकल सुविधा
बेबी केयर
बच्चों के लिए प्ले एरिया
वरिष्ठ नागरिकों एवं दिव्यांग यात्रियों के लिए सहायता
टैक्सी और कैब सुविधा
कार रेंटल
मल्टी-लेवल पार्किंग
जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
डिजिटल तकनीक से बदल रहा यात्रियों का अनुभव
हैदराबाद एयरपोर्ट पर यात्रियों की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल लगातार बढ़ाया जा रहा है। DigiYatra के जरिए यात्री एयरपोर्ट की विभिन्न प्रक्रियाओं में डिजिटल पहचान का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा एयरपोर्ट संचालन में डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक का भी इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। इसका उद्देश्य विमान संचालन, यात्री आवाजाही, संसाधनों और एयरपोर्ट के विभिन्न हिस्सों की निगरानी को ज्यादा प्रभावी बनाना है।
एयरपोर्ट के आसपास बन रही पूरी ‘एयरोसिटी’
राजीव गांधी एयरपोर्ट का विकास केवल टर्मिनल और रनवे तक सीमित नहीं है। एयरपोर्ट के आसपास एयरपोर्ट सिटी और बिजनेस इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत होटल, कार्यालय, रिटेल, लॉजिस्टिक्स, एयरोस्पेस, इंडस्ट्रियल गतिविधियों और अन्य व्यावसायिक सुविधाओं को विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य एयरपोर्ट को सिर्फ यात्रा के लिए इस्तेमाल होने वाली जगह के बजाय एक ऐसे आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करना है जहां एविएशन से जुड़ी और एविएशन पर निर्भर कई गतिविधियां एक साथ संचालित हों।
आईटी और फार्मा के साथ एयरोस्पेस को भी बढ़ावा
हैदराबाद पहले से आईटी और फार्मा उद्योग का बड़ा केंद्र है। अब एयरपोर्ट के आसपास एयरोस्पेस और एविएशन से जुड़ी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। एयरपोर्ट से बेहतर एयर कनेक्टिविटी मिलने के कारण अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के लिए यह क्षेत्र महत्वपूर्ण बनता जा रहा है। एयरपोर्ट के आसपास विकसित होने वाला औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्र भविष्य में रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा कर सकता है।
अब चुनौती भी बड़ी—यात्री बढ़े तो क्षमता भी बढ़ानी होगी
राजीव गांधी एयरपोर्ट की सफलता के साथ अब उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती भी सामने आ रही है। यात्री संख्या जिस तेजी से बढ़ रही है, उसके मुकाबले वर्तमान टर्मिनल क्षमता सीमित है। वर्तमान क्षमता करीब 3.4 करोड़ यात्रियों की है, जबकि 2025-26 में ही यात्री संख्या करीब 3.05 करोड़ तक पहुंच गई। आने वाले वर्षों में यदि यात्री संख्या 5 करोड़ से ऊपर जाती है तो टर्मिनल, चेक-इन, सुरक्षा जांच, इमिग्रेशन, बैगेज, एप्रन, पार्किंग और सड़क कनेक्टिविटी सभी क्षेत्रों में विस्तार करना होगा। यही वजह है कि एयरपोर्ट के अगले चरण के विस्तार को भविष्य की जरूरत के तौर पर देखा जा रहा है।
10 करोड़ यात्रियों का सपना
राजीव गांधी एयरपोर्ट का सबसे महत्वाकांक्षी लक्ष्य इसकी दीर्घकालीन क्षमता को 10 करोड़ से अधिक यात्रियों प्रतिवर्ष तक ले जाना है। मास्टर प्लान में अतिरिक्त टर्मिनल, रनवे, टैक्सीवे, एप्रन, कार्गो सुविधाओं और लैंडसाइड इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार की परिकल्पना की गई है। यदि यह विस्तार योजना निर्धारित रूप से आगे बढ़ती है तो आने वाले वर्षों में हैदराबाद एयरपोर्ट देश के सबसे बड़े विमानन केंद्रों में अपनी क्षमता के लिहाज से महत्वपूर्ण स्थान बना सकता है।
मेट्रो और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी पर भी जोर
एयरपोर्ट के भविष्य के विकास में केवल एयरसाइड इंफ्रास्ट्रक्चर ही महत्वपूर्ण नहीं है। यात्रियों को शहर और आसपास के क्षेत्रों से तेज और सुविधाजनक कनेक्टिविटी देना भी बड़ी चुनौती है। भविष्य की योजनाओं में एयरपोर्ट को व्यापक परिवहन नेटवर्क से जोड़ने और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी विकसित करने पर जोर है। मेट्रो कनेक्टिविटी सहित विभिन्न परिवहन विकल्पों को जोड़ने की परिकल्पना की गई है।
एक नजर में राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट
स्थान: शमशाबाद, हैदराबाद
शुरुआत: 2008
ऑपरेटर: GMR Hyderabad International Airport Ltd.
मॉडल: पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप
मौजूदा डिजाइन क्षमता: करीब 3.4 करोड़ यात्री प्रतिवर्ष
FY 2025-26 यात्री: करीब 3.05 करोड़
मुख्य रनवे: 4,260 मीटर
कार्गो: अंतरराष्ट्रीय, घरेलू और फार्मा कार्गो की सुविधा
नया Cargo Terminal-2: 2026 में शुरू
Cargo Terminal-2 शुरुआती क्षमता: करीब 50 हजार मीट्रिक टन प्रतिवर्ष
2030-31 अनुमानित यात्री: करीब 5.15 करोड़
दीर्घकालीन मास्टर प्लान क्षमता: 10 करोड़ से अधिक यात्री प्रतिवर्ष
अंतिम बात
राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब सिर्फ हैदराबाद का एयरपोर्ट नहीं रह गया है। यह तेलंगाना की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। एक तरफ लाखों लोग यहां से देश-दुनिया की यात्रा कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ फार्मा, आईटी, एयरोस्पेस और लॉजिस्टिक्स उद्योगों के लिए यह वैश्विक कनेक्टिविटी का माध्यम बन रहा है।
2008 में 1.2 करोड़ यात्रियों की क्षमता से शुरू हुआ सफर अब 3 करोड़ से आगे निकल चुका है। अगले कुछ वर्षों में 5 करोड़ से ज्यादा यात्रियों का अनुमान और दूरगामी योजना में 10 करोड़ से अधिक यात्रियों की क्षमता बताती है कि हैदराबाद के आसमान में उड़ानों की संख्या ही नहीं, बल्कि इस एयरपोर्ट की भूमिका भी लगातार बड़ी होती जा रही है।



