हमारी सांस्कृतिक धरोहर है राखी का त्योहार

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– बाल मुकुन्द ओझा
रक्षाबंधन मात्र एक पर्व या त्योहार नहीं है, अपितु यह भाई-बहन के अमर प्रेम का प्रतीक है। श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन मनाने की परंपरा है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। इसके बदले भाई उन्हें रक्षा का वचन देते हैं। रक्षाबंधन 2026 की तारीख को लेकर 27 और 28 अगस्त के बीच लोगों में भ्रम बना हुआ है। पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त सुबह 9:08 बजे शुरू होकर 28 अगस्त सुबह 9:48 बजे समाप्त होगी। उदय तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाना उचित बताया गया है। इस भांति भाई-बहन के अप्रतिम प्रेम के पवित्र स्नेह के पर्व रक्षाबंधन का पर्व इस साल 28 अगस्त को मनाया जायेगा। इस दिन सुबह 6:24 से 9:48 बजे तक राखी बांधने का शुभ समय रहेगा। दोपहर 12:01 से 1:05 बजे तक अभिजीत मुहूर्त भी रहेगा। रक्षाबंधन देश का महत्वपूर्ण पर्व है, जो भारत के अलावा भी विश्व भर में जहां पर हिंदू धर्मं के लोग रहते हैं, वहां इस पर्व को भाई बहनों के बीच मनाया जाता है।
त्योहार हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। इन्हीं के माध्यम से रिश्तों की गहराई महसूस की जाती है। रक्षाबंधन केवल एक त्यौहार नहीं बल्कि हमारी परंपराओं का प्रतीक है जो आज भी हमें अपने परिवार व संस्कारों से जोड़े रखने का हर संभव प्रयास करता है। रक्षा बंधन का पर्व सावन मास का सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना गया है। रक्षाबंधन पर राखी बांधने की हमारी सदियों पुरानी परंपरा रही है। इस दिन बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाती है और कलाई पर रक्षासूत्र बाधती है। उसकी आरती करती है लंबी आयु की प्रार्थना करती है। भाई भी अपनी बहनों को इस पवित्र बंधन के बदले उपहार देने के साथ ही उसकी रक्षा करने का वचन देते हैं। रक्षाबंधन को पर्यावरण की रक्षा के साथ भी जोड़कर देखा जाता है। बहुत से लोग वृक्षों को राखी बांधकर पर्यावरण के प्रति जागरूकता का सन्देश देते है।
यह त्योहार अपने धार्मिक और ऐतिहासिक महत्त्व के लिए प्रसिद्ध है। हमारा इतिहास साक्षी है कि चित्तौड़ की रानी कर्णावती ने अपनी रक्षा के लिए मुगल शासक हुमायूं को राखी भेजकर मदद की गुहार की थी। मुगल काल में राजपूताना की महारानी द्वारा मुस्लिम बादशाह को राखी बांधने का प्रसंग आता है। महाभारत में भी रक्षाबंधन के पर्व का उल्लेख है। जब युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि मैं सभी संकटों को कैसे पार कर सकता हूं, तब कृष्ण ने उनकी तथा उनकी सेना की रक्षा के लिए राखी का त्योहार मनाने की सलाह दी थी। शिशुपाल का वध करते समय भगवान श्रीकृष्ण की तर्जनी अंगुली में चोट आ गई, तो द्रौपदी ने लहू रोकने के लिए अपनी साड़ी फाड़कर उनकी अंगुली पर बांध दिया। यह श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था। कृष्ण ने चीरहरण के समय उनकी लाज बचाकर अपने भ्राता धर्म का निर्वहन किया।
पौराणिक मान्यता के अनुसार यह पर्व देवासुर संग्राम से जुडा है। जब देवों और दानवों के बीच युद्ध चल रहा था और दानव विजय की ओर अग्रसर थे , यह देख कर राजा इंद्र बेहद परेशान हो उठे ।.उन्हें परेशान देखकर उनकी पत्नी इंद्राणी ने भगवान की अराधना की. उनकी पूजा से प्रसन्न हो ईश्वर ने उन्हें एक मंत्रसिद्ध धागा दिया। इस धागे को इंद्राणी ने इंद्र की कलाई पर बांध दिया. इस प्रकार इंद्राणी ने पति को विजयी कराने में मदद की । इस धागे को रक्षासूत्र का नाम दिया गया और बाद में यही रक्षा सूत्र रक्षाबंधन हो गया ।
सामाजिक सौहार्द की दृष्टि से राखी का त्योहार बहुत उपयोगी है। यह त्योहार महिलाओं के कल्याण के प्रयासों को तेज करने की जरुरत तथा समाज में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के पुरुषों के कर्तव्य को रेखांकित करता है। इस दिन प्रत्येक नागरिक महिलाओं की सुरक्षा, अस्मिता व महिला सशक्तिकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करें। राखी का त्योहार हमें ना सिर्फ अपनी बहन को सम्मान की दृष्टि से देखने की सीख देता है बल्कि यह त्योहार संपूर्ण स्त्री जाति का सम्मान करने की भी सीख देता है।

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