राहुल गांधी को महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए : किरेन रिजिजू

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नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने महिलाओं की आजादी और भागीदारी पर बयान दिया। उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा कि जब तक महिलाएं खुलकर अपनी बात नहीं रख पाएंगी, तब तक कोई भी देश पूरी तरक्की नहीं कर सकता। राहुल गांधी के इस बयान पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रतिक्रिया देते हुए ‘एक्स’ पोस्ट में कहा कि कांग्रेस को अब संसद में महिला आरक्षण विधेयक का बिना शर्त समर्थन करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
दरअसल, राहुल गांधी ने शुक्रवार को ‘एक्स’ पर एक वीडियो पोस्ट कर में अपनी बात रखी। गुरुवार को भी ‘आस्क मी एनीथिंग’ सत्र में भी उन्होंने इसी मुद्दे पर बात की थी।
उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “मैं सोच रहा था कि भारत की महिलाओं की ऊर्जा फंसी हुई है, उसे व्यक्त करने की इजाजत नहीं है, कल्पना करने की आजादी नहीं है। मेरे लिए कोई भी देश तब तक सफल नहीं हो सकता जब तक वहां की महिलाएं खुद को व्यक्त न कर सकें।”
वीडियो में राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं की आवाज दबने से देश की तरक्की पर असर पड़ता है। मेरी राजनीति का एक बड़ा हिस्सा यही है कि लोग समझें कि महिलाओं की अभिव्यक्ति के बिना हमारा देश अधूरा और पिछड़ा है।
राहुल गांधी ने कहा कि महिला सशक्तीकरण सिर्फ बिजनेस या राजनीति तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह सिर्फ इस बारे में नहीं है कि महिलाएं बिजनेस या राजनीति में अच्छा करें, बल्कि यह भी है कि वे अपने घरों में, परिवार में और सार्वजनिक जगहों पर खुलकर बोल सकें और सड़कों पर आराम से चल सकें।
उन्होंने आगे कहा, “महिलाओं को यह आजादी होनी चाहिए कि वे दूसरों से अलग राय रख सकें, अपने माता-पिता, पति, भाई-बहन से सवाल कर सकें। भारत को सच में विकसित होना है तो पितृसत्ता और पुरुषों के कड़े नियंत्रण से महिलाओं को थोड़ी आजादी मिलनी ही चाहिए।”
राहुल गांधी के इस वीडियो बयान पर किरेन रिजिजू ने कहा कि यह कांग्रेस के नजरिए में सकारात्मक बदलाव का संकेत है।
यह कांग्रेस पार्टी का सकारात्मक संदेश लगता है। राहुल गांधी के दिल में महिलाओं को लेकर बदलाव दिख रहा है। अब मुझे उम्मीद है कि कांग्रेस महिला आरक्षण विधेयक का बिना शर्त समर्थन करेगी।
महिला आरक्षण विधेयक, जिसे संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 या नारी शक्ति वंदन अधिनियम भी कहा जाता है, एक ऐतिहासिक कानून है। इसके तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई हैं। फिलहाल महिला आरक्षण को लेकर सियासी बहस तेज है और सभी की नजर संसद के अगले कदम पर है।

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