संघ के पंजीकरण की मांग : कितनी जायज और कितनी नाजायज

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बाल मुकुन्द ओझा
आज़ादी के बाद से ही देश और दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लगातार विवादों में घसीटने का प्रयास किया जाता रहा है। कई बार प्रतिबन्ध की मार झेल चुका संघ विवाद खड़े करने के बावजूद आगे बढ़ता रहा। ताज़ा मामला संघ के पंजीकरण को लेकर खड़ा करने का प्रयास किया गया है। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे लगातार संघ से उसके पंजीकरण दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। प्रियांक कांग्रेस के अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे के पुत्र है। कांग्रेस की संघ के प्रति शत्रुता और घृणा के भाव सर्वविदित है। कांग्रेस समय समय पर संघ पर सियासती आक्रमण करती रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख डॉ मोहन भागवत ने संघ के पंजीकरण की मांग को खारिज करते हुए कहा कि संगठन के पास न तो कुछ छिपाने के लिए है और न ही वह जनता की नजरों से बचकर काम करता है। आज गाहे बगाहे हर काम में संघ का नाम लेना एक फैशन हो गया है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी सहित कुछ नेता हर काम में संघ का नाम जपते है। मोदी सरकार के हर काम के पीछे संघ का हाथ होने का आरोप लगाते है जबकि संघ का कहना है वह एक सांस्कृतिक संगठन है। उसकी विचारधारा भाजपा से मेल खाती है और कुछ स्वयंसेवक संघ भाजपा में सक्रीय है। कांग्रेस नेता राहुल गाँधी की जुबान पर हर समय संघ का नाम रहता है। केजरीवाल भी संघ का नाम हर कार्य में घसीटते है। कुछ अन्य पार्टियां भी संघ पर आरोप लगाते नहीं थकते। देश में जहाँ कहीं भी कोई विवाद या दंगा होता है उसमें संघ का हाथ होने का आरोप भी लगाया जाता है मगर यह आजतक प्रमाणित नहीं हुआ है। भाजपा के सत्ता में आने के बाद संघ आगे बढ़ता ही गया है इसमें कोई दो राय नहीं है।
यह सर्वविदित है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के मुंह से निकले शब्द स्वयं सेवकों के लिए प्राण वायु का संचार करते है। देश के लाखों स्वयंसेवक प्रतिदिन प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अपने सर्वप्रिय नेता के वक्तव्यों का बेसब्री से इंतज़ार करते है और फिर उन्हें आधार बनाकर अपना रोजमर्रा का कार्य शुरू करते है। जनता को संघ के कार्यों का सन्देश देते है। इस दौरान लाखों प्रचारक जनसाधारण को संघ की रीति नीति और कार्यप्रणाली से अवगत करते है। बिना तड़क भड़क और ताम झाम के जनता से सीधा जुड़ाव का उनका कार्य लोग पसंद करते है। लोगों के सुख दुःख में हाथ बंटाने के कारण संघ के लोग शीघ्र जनता में घुल मिल जाते है। देश में अनेक विपदाओं के दौरान संघ के कार्यकर्ताओं ने समाज सेवा की अनूठी मिसाल कायम की, यह किसी से छिपा नहीं है। संघ अपने विलक्षण सेवाभावी और रचनातमक कार्यों के लिए देश और दुनिया में ख्यात है। देश में हर संकट और विपदा के दौरान संघ के कार्यकर्ताओं को सेवा करते देखा जा सकता है। संघ के अनुसार समाज में देशभक्त, अनुशासित, चरित्रवान और निःस्वार्थ भाव से काम करने वाले लोगों की आवश्यकता रहती है। संघ ऐसे लोगों को तैयार कर संगठित करने का कार्य करता है। उनमें देशभक्ति की भावना जगाता है। संघ का कहना है कि संघ समाज में एक संगठन ना बनाकर सम्पूर्ण समाज को ही संगठित करने का प्रयास करता है।संघ के सेवा कार्यों की एक लम्बी फेहरिस्त है। संघ के बेहतरीन कामों की खूब प्रशंसा भी हुई है। आजादी के बाद से ही कांग्रेस के निशाने पर रहा है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ। लाख चेष्टा के बावजूद कांग्रेस संघ को समाप्त करना तो दूर हाशिये पर लाने में सफल नहीं हुआ। संघ को खत्म करने के चक्कर में खुद कांग्रेस अपना वजूद समाप्त करने की ओर अग्रसर है। बापू की हत्या के आरोप सहित कई बार प्रतिबन्ध की मार झेल चुका यह संगठन आज भी लोगों के दिलों में बसा है और यही कारण है की इसका एक स्वयं सेवक प्रधान मंत्री की कुर्सी पर काबिज है और अनेक स्वयं सेवक राज्यों के मुख्यमंत्री है। संघ विचारकों का मानना है कि डॉ. राममनोहर लोहिया और लोक नायक जय प्रकाश नारायण सरीखे देश भक्तों ने कभी संघ का विरोध नहीं किया और समय-समय पर संघ कार्यों की प्रशंसा की। विभिन्न गुटों में बंटे उनके कथित समाजवादी अनुयायी अपने राजनैतिक लाभों को हासिल करने के लिए उनका विरोध करते हैं। पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी भी संघ के नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेकर कांग्रेस को झटका दे चुके है। उन्होंने संघ के संस्थापक हेडगेवार को बड़ा देशभक्त बताया था।

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