-बाल मुकुंद ओझा
देश के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव जैसे जैसे नजदीक आते जा रहे है वैसे वैसे नये नये चुनावी मुद्दों की धमाकेदार एंट्री होती जा रही है। इनमें सबसे ताज़ा अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी का है। इसे लेकर यूपी की सियासत बेहद आक्रामक हो गई है। राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी का मामला अब उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव ने इसे भाजपा से जोड़ा है तो कांग्रेस ने आर एस एस पर निशाना साधा है। राम मंदिर में गबन का मुद्दा सबसे पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उठाया था. ऐसे में कांग्रेस भी इस मुद्दे के जरिए बीजेपी को लगातार घेरने में जुटी है। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है एस आई टी जाँच रिपोर्ट में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बक्सा नहीं जायेगा। बहरहाल यह किसी से छिपा नहीं है कि राम मंदिर में योजनाबद्ध ढंग से चढ़ावा चोरी हो रही थी। ट्रस्ट को कुछ माह पूर्व चोरी का पता चल गया था मगर कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं की गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ट्रस्ट के सचिव चम्पत राय से पुलिस ने पूछताछ की उसमें कई बातों का खुलासा हुआ। आठ कर्मचारियों की धरपकड़ कर जेल भेजा गया है मगर विपक्ष इससे संतुष्ट नहीं है। विपक्ष राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों की मिलीभगत का आरोप लगाकर कार्यवाही की मांग कर रहा है। हालाँकि यह तो जाँच से ही पता चलेगा कि असली दोषी कौन है मगर राम मंदिर की सीढ़ी पर सत्ता सुख भोगने वाली भाजपा के समक्ष चढ़ावा चोरी का यह मामला गले की फ़ांस बन गया है। आमजन भी दुखी है और असली चोरों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग कर रहा है। चढ़ावा चोरी से देश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंची है, बल्कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़ा सियासी तूफान भी खड़ा कर दिया है। साथ ही अब यह तय है की राम मंदिर चढ़ावा चोरी यूपी चुनाव का एक प्रमुख मुद्दा बन गया है। इसके साथ ही अफवाहों ने भी आग में घी का काम किया है। तरह तरह की चोरी के आरोप लग रहे है। जो चीजे चोरी नहीं हुई, उन्हें भी गायब बताया जा रहा है।
कहा जाता यूपी की सियासत में ‘दिल्ली की सत्ता का रास्ता लखनऊ से होकर गुजरता है’, यह केवल कहावत ही नहीं है अपितु भारतीय राजनीति की सबसे बड़ी हकीकत है। प. जवाहर लाल नेहरू से लेकर नरेंद्र मोदी तक, इतिहास गवाह है कि जिसने यूपी जीता, उसने हिंदुस्तान जीत लिया । यह भी कहा जाता है, जिसने उत्तर प्रदेश में अच्छा प्रदर्शन किया उसके दिल्ली पहुंचने के रास्ते आसान हो जाते हैं। इसीलिए भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में अपनी चुनावी रणनीति को धार देना शुरु कर दिया है। विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से जोड़-तोड़ और कयासों का दौर शुरू हो चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने अपनी सत्ता बचाने और भाजपा की हैट्रिक लगाने की चुनौती है, तो वहीं समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव पीडीए के फॉर्मूले के दम पर सत्ता में वापसी की हर संभव कोशिश में जुटे हैं। यूपी की जनता ही तय करती है की देश की हवा किस ओर बहती है।
यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से जोड़-तोड़ और कयासों का दौर शुरू हो चुका है। इसी के मधे नज़र गठजोड़ बनने बिगड़ने शुरू हो गए है। बात बात पर नेताओं ने चुनाव में देख लेने की धमकिया देनी शुरू कर दी है। यूपी में साढ़े नौ साल से भाजपा सत्तारूढ़ है और योगी आदित्यनाथ के पास सत्ता की कमान है। भाजपा तीसरे टर्म के लिए जी तोड़ कोशिश में लगी है। यहाँ भाजपा और समाजवादी पार्टी में सीधी और कांटे की लड़ाई है। कांग्रेस और बसपा समाप्त प्राय है। अन्य छोटी पार्टिया अपने अस्तित्व को बचाने के फेर में है। सपा मुखिया पीडीए बनाकर मतों को एक मुश्त अपनी झोली में डालने के प्रयास में जुटी है वहीँ भाजपा हिन्दू मतों को कटेंगे तो बटेंगे का नारा देकर प्राप्त करने के प्रयास में है। कुछ अन्य जातीय पार्टियां भी जातीय मतों के बुते पर मैदान में डटी है। यूपी विधानसभा का चुनाव आगामी लोकसभा चुनाव की आधारशिला रखेगा। प्रदेश में चुनावी माहौल तेजी से गहराने लगा है। 2022 में यूपी की सभी 403 विधान सभा सीटों पर चुनाव हुआ था। इसमें एनडीए के खाते में 273+, सपा गठबंधन को 125 और बसपा को 1 सीट मिली थी। मिशन-2027 को लेकर भाजपा ने अपनी चुनावी रणनीति तैयार करना शुरू कर दिया है। भाजपा मिशन-2027 को लेकर ओबीसी वोट बैंक, हिंदुत्व और राष्ट्रवाद पर केंद्रित रणनीति अपना रही है। पार्टी ने कुर्मी वोटों को साधने के लिए पंकज चौधरी को प्रदेश का अध्यक्ष बनाया गया है। उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं का बड़ा हिस्सा परंपरागत रूप से समाजवादी पार्टी के साथ रहा है। सांसद ओवैसी की पार्टी भी दम ख़म के साथ चुनाव में कूद रही है। यूपी के चुनाव ही देश की दशा और दिशा निर्धारित करेंगे। सत्तारूढ़ भाजपा ने मोदी और योगी के सहारे जहाँ सत्ता में वापसी की उम्मीद जगाई है वहां अखिलेश की समाजवादी पार्टी ने कुछ छोटे दलों से गठजोड कर मुकाबला कांटे का खड़ा करने का प्रयास कर रही है।

यूपी चुनाव में राम मंदिर चढ़ावा चोरी की धमाकेदार एंट्री
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