कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन राउंड से बदलेगी सिंचाई प्रबंधन की तस्वीर-जल उपयोक्ता संगमों के सशक्तीकरण को मिली नई दिशा

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जयपुर। राजस्थान में सहभागिता आधारित सिंचाई प्रबंधन को और अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में जल संसाधन विभाग तथा राजस्थान वाटर सेक्टर लाइवलीहुड इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट द्वारा महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसी क्रम में जयपुर के दुर्गापुरा स्थित राज्य कृषि प्रबंधन संस्थान में जल उपयोक्ता संगमों के क्षमता विकास एवं सशक्तीकरण के लिए कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन के साथ एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला की अध्यक्षता जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार ने की। इस अवसर पर मुख्य अभियंता, गुण नियंत्रण, सतर्कता एवं ईएपी, जल संसाधन विभाग व अन्य विभागीय अधिकारी, परियोजना प्रतिनिधि एवं विभिन्न जिलों से आए प्रतिभागी उपस्थित रहे।
राजीविका की तर्ज पर विकसित होगा मजबूत जल उपयोक्ता संगमों का नेटवर्क
अभय कुमार ने कहा कि जल उपयोक्ता संगम ग्रामीण समुदायों से सीधे जुड़े हुए हैं और सिंचाई प्रबंधन में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने निर्देश दिए कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले जल उपयोक्ता संगमों के पदाधिकारियों एवं सदस्यों को प्रशिक्षित कर कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन के रूप में विकसित किया जाए। इससे उनके अनुभवों का लाभ अन्य संघों तक भी पहुंच सकेगा। उन्होंने अपने राजीविका अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस प्रकार महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लाखों महिलाओं का सशक्त नेटवर्क तैयार हुआ, उसी प्रकार प्रदेश के अन्य जल उपयोक्ता संघो को सीआरपी मॉडल के माध्यम से सुदृढ़ एवं आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।
किसान से किसान तक पहुंचेगा व्यवहारिक ज्ञान
अभय कुमार ने कहा कि अगस्त माह से शुरू होने वाले 5 दिवसीय फील्ड राउंड पूर्णतः व्यवहारिक होंगे। इन राउंड्स के माध्यम से किसान एक-दूसरे के अनुभवों से सीखेंगे तथा सिंचाई शुल्क संग्रहण, जल प्रबंधन, फसल उत्पादकता वृद्धि एवं कृषि-उद्यानिकी आधारित मूल्य संवर्धन जैसे विषयों पर सीधे संवाद स्थापित कर सकेंगे।
5 सदस्यीय टीमें करेंगी मैदानी स्तर पर कार्य
परियोजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक चयनित जल उपयोक्ता संगम में 5 दिवसीय सीआरपी राउंड आयोजित किए जाएंगे। प्रत्येक टीम में दो प्रशिक्षित जल उपयोक्ता संगम सीआरपी , एक एनजीओ प्रतिनिधि अथवा फील्ड पर्यवेक्षक, एक तकनीकी सहायक तथा जल संसाधन विभाग के कनिष्ठ अभियंता शामिल होंगे। इन गतिविधियों की नियमित मॉनिटरिंग संबंधित उपखण्ड के सहायक अभियंता द्वारा की जाएगी। टीम सदस्यों के लिए संबंधित ग्राम में चार रात्रि प्रवास अनिवार्य होगा। पांचवें दिन जयपुर मुख्यालय में आयोजित डी-ब्रीफिंग सत्र में अनुभवों, उपलब्धियों एवं सुझावों की समीक्षा की जाएगी। फील्ड राउंड्स से पूर्व सभी सीआरपी को दो दिवसीय रिफ्रेशर प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
अभिलेख सुधार से लेकर राजस्व संग्रहण तक होगा कार्य
सीआरपी टीमें जल उपयोक्ता संगमों के अभिलेखों को अद्यतन एवं व्यवस्थित करने, नियमित बैठकों का कैलेंडर तैयार करने तथा प्रशासन, वित्त, निर्माण, सिंचाई, निगरानी एवं चक प्रबंधन जैसी आवश्यक उप समितियों का गठन सुनिश्चित करेंगी। इसके साथ ही कृषकवार सिंचाई शुल्क मांग सूची तैयार कर न्यूनतम 25 खातेदारों से कम से कम एक वर्ष का सिंचाई शुल्क संग्रहित कर राजकीय खाते में जमा कराने की प्रक्रिया को भी गति दी जाएगी।
विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से होगा समन्वय
फील्ड राउंड्स के दौरान किसानों को जल प्रबंधन के साथ-साथ विभिन्न विभागीय एवं जनकल्याणकारी योजनाओं से भी जोड़ा जाएगा। इनमें सामाजिक सुरक्षा पेंशन, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, राजस्थान जल क्षेत्र आजीविका सुधार परियोजना की लखपति दीदी, उद्यानिकी एवं खाद्य मूल्य श्रृंखला तथा कृषि, उद्यानिकी एवं पशुपालन विभाग की योजनाएं शामिल हैं। किसानों को ड्रिप, स्प्रिंकलर, फार्म पॉण्ड, पशु बीमा एवं अन्य उत्पादकता बढ़ाने वाली योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा।
विशेष प्रशिक्षण के बाद अगस्त से होगा क्रियान्वयन
कार्यशाला के समापन सत्र में बताया गया कि चयनित कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन्स को हाइड्रोलॉजी एंड वाटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट , बीकानेर में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद इन्हें अगस्त माह से विभिन्न क्षेत्रों में फील्ड राउंड्स के लिए तैनात किया जाएगा। इससे जल उपयोक्ता संगमों को अधिक सक्षम, सक्रिय और आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ प्रदेश में सहभागिता आधारित सिंचाई प्रबंधन को नई दिशा प्रदान करेगी। इस दौरान मुख्य अभियंता जल संसाधन जितेंद्र दीक्षित अतिरिक्त मुख्य अभियंता देशराज मीना, उप निदेशक क़ृषि सी. के. शर्मा व एनजीओ के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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