मदनलाल का संघर्ष से समृद्धि तक का सफर, पीएम स्‍वनिधि योजना बनी संजीवनी

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बूंदी। बून्दी शहर में रहने वाले मदन लाल अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए ठेले पर सब्जी बेचने का कार्य करते थे। उनकी जिंदगी सामान्य रूप से चल रही थी, लेकिन कोरोना महामारी और उसके बाद लगे लॉकडाउन ने सब कुछ बदल कर रख दिया। महामारी के दौरान उनका ठेला पूरी तरह से बंद हो गया। आमदनी का कोई अन्य साधन न होने के कारण घर का खर्च चलाना, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करना उनके लिए बेहद मुश्किल हो गया था।

निराशा के दौर में भारत सरकार की ‘पीएम स्वनिधि योजना’ मदन लाल के लिए एक संजीवनी बनकर आई। उन्होंने इस योजना के तहत आवेदन किया और उन्हें अपना व्यवसाय फिर से शुरू करने के लिए ₹10,000 का प्रथम ऋण प्राप्त हुआ। इस छोटी सी आर्थिक मदद से उन्होंने दोबारा अपना सब्जी का ठेला लगाना शुरू किया। उनकी मेहनत रंग लाई और रोजाना ग्राहकों की संख्या बढ़ने से उनकी आमदनी में भी इजाफा होने लगा।
मदन लाल ने अपनी ईमानदारी और लगन से न केवल अपना व्यवसाय बढ़ाया, बल्कि समय पर ऋण भी चुकाया। इसके परिणामस्वरूप उन्हें द्वितीय ऋण के रूप में 20,000 रुपए तथा तृतीय ऋण के रूप में 50,000 रुपए की राशि प्राप्‍त हुई। उन्होंने दोनों ऋणों को भी पूर्ण रूप से चुकता कर दिया।

निरंतर मिली आर्थिक सहायता और अपनी कड़ी मेहनत के बदौलत आज मदन लाल की आर्थिक स्थिति पूरी तरह से सुधर चुकी है। बच्चों की पढ़ाई बिना किसी रुकावट के अच्छे से चल रही है। घर का मासिक खर्च और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें अब आसानी से पूरी हो रही हैं। कारोबार का दायरा भी पहले से अधिक बढ़ गया है। हाल ही में उन्‍होंने 10 जून को आयोजित विशेष कैम्प के माध्यम से क्रेडिट कार्ड के लिए भी आवेदन किया है, जो उनकी बढ़ती वित्तीय साख का प्रमाण हैं।

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